Urea Fertilizer Demand Increase 2026 : भारत में मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान उर्वरकों की मांग में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है। खासकर यूरिया और डीएपी (DAP) की बिक्री में अप्रत्याशित वृद्धि ने कृषि क्षेत्र और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हुई, जिसके चलते कई राज्यों में किसानों ने जरूरत से ज्यादा खाद खरीदना शुरू कर दिया। इस स्थिति ने खाद सब्सिडी और डिजिटल वितरण प्रणाली की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
वैश्विक तनाव का असर, किसानों ने शुरू की खाद की जमाखोरी
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। वैश्विक आपूर्ति में संभावित कमी की आशंका के कारण भारत के कई राज्यों में किसानों ने पहले से अधिक मात्रा में खाद खरीदना शुरू कर दिया। किसानों को डर है कि आने वाले समय में उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है या कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसी आशंका के चलते हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में उर्वरकों की बिक्री में अचानक तेजी दर्ज की गई है। Urea Fertilizer Demand Increase 2026
हरियाणा में यूरिया बिक्री 80 फीसदी बढ़ी Urea Fertilizer Demand Increase 2026
उर्वरक बिक्री के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान यूरिया की बिक्री लगभग 80 प्रतिशत बढ़कर 1.71 लाख टन तक पहुंच गई। वहीं डीएपी की बिक्री भी दोगुने से अधिक बढ़कर 0.37 लाख टन दर्ज की गई। यह वृद्धि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी अधिक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किसान संभावित संकट को देखते हुए पहले से स्टॉक तैयार कर रहे हैं। Urea Fertilizer Demand Increase 2026
डीएपी और यूरिया बचत योजना पर पड़ा असर
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2025-26 में एक पायलट परियोजना लागू की थी, जिसके तहत किसानों को उनकी भूमि रिकॉर्ड और फसल के आधार पर ही सब्सिडी वाला उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा था। सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से यूरिया की खपत में 1.26 लाख टन और डीएपी की खपत में 23,489 टन की कमी दर्ज की गई थी। इस योजना के कारण सरकार को लगभग 700 करोड़ रुपये की बचत होने का दावा किया गया था।
पूरे 2025-26 में इस पायलट मॉडल से करीब 3.4 लाख टन उर्वरक बचत का अनुमान लगाया गया था। हालांकि वर्तमान में बढ़ी हुई मांग ने इस व्यवस्था की सीमाओं को उजागर कर दिया है, क्योंकि संकट की स्थिति में किसानों की बढ़ती खरीदारी को नियंत्रित करना मुश्किल साबित हो रहा है। Urea Fertilizer Demand Increase 2026
क्यों बढ़ रही है उर्वरकों की मांग?
विशेषज्ञों के अनुसार किसानों द्वारा अधिक मात्रा में खाद खरीदने के पीछे मुख्य कारण भविष्य में संभावित कमी की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं की खबरों ने किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है। कई किसानों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और खराब होती हैं तो खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण किसान पहले से ही आवश्यक खाद का स्टॉक तैयार करने में जुट गए हैं। Urea Fertilizer Demand Increase 2026
अन्य राज्यों में भी बढ़ी डीएपी की बिक्री
यह रुझान केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है। गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी फॉस्फेट आधारित उर्वरकों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आंकड़ों के मुताबिक:
- गुजरात में डीएपी की बिक्री लगभग 71 प्रतिशत बढ़ी।
- पश्चिम बंगाल में डीएपी की बिक्री करीब 77 प्रतिशत तक बढ़ गई।
- कई राज्यों में यूरिया और अन्य उर्वरकों की मांग भी सामान्य स्तर से काफी ऊपर रही।
यह संकेत देता है कि किसानों के बीच उर्वरक उपलब्धता को लेकर चिंता व्यापक स्तर पर मौजूद है। Urea Fertilizer Demand Increase 2026
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भारत में किसान कितना यूरिया इस्तेमाल करते हैं?
उर्वरक विभाग द्वारा संसद की स्थायी समिति को दी गई जानकारी के अनुसार भारत के लगभग 65 प्रतिशत किसान पूरे वर्ष में केवल 5 से 7 बोरी यूरिया का उपयोग करते हैं। हालांकि देश के 163 ऐसे जिले भी हैं जहां उर्वरकों की खपत सामान्य से काफी अधिक है। इन जिलों में कुल मिलाकर लगभग 22 लाख बैग उर्वरकों की खपत होती है, जो लगभग 1 से 1.8 लाख टन के बराबर है। इसी कारण सरकार अत्यधिक खपत वाले क्षेत्रों में उर्वरक उपयोग को संतुलित करने और सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए नई नीतियों पर विचार कर रही है। Urea Fertilizer Demand Increase 2026
किसानों और सरकार के लिए बढ़ी चुनौती
मार्च-अप्रैल 2026 में उर्वरकों की बिक्री में आई तेजी ने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक घटनाओं का सीधा असर भारतीय कृषि पर पड़ता है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव जारी रहता है तो आने वाले खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतें दोनों प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में सरकार के सामने उर्वरक आपूर्ति बनाए रखने और किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती होगी, जबकि किसानों के लिए संतुलित और जरूरत आधारित उर्वरक उपयोग अपनाना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। Urea Fertilizer Demand Increase 2026
