Groundnut Farming in India: मूंगफली (Groundnut) भारत की प्रमुख तिलहनी फसलों में से एक है। इसकी खेती मुख्य रूप से खरीफ सीजन में की जाती है, हालांकि कुछ क्षेत्रों में रबी और जायद मौसम में भी इसकी खेती होती है। सही तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और अच्छी आमदनी कमा सकते हैं। आइए जानते हैं मूंगफली की खेती की पूरी प्रक्रिया। Groundnut Farming in India

मूंगफली की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
मूंगफली की खेती के लिए गर्म एवं आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसकी अच्छी पैदावार के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल रहता है। अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे बेहतर होती है। खेत का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए। Groundnut Farming in India
खेत की तैयारी
बुवाई से पहले खेत की 2 से 3 बार अच्छी तरह जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरी बना लें। अंतिम जुताई के समय 8 से 10 टन प्रति हेक्टेयर अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। खेत समतल होना चाहिए ताकि पानी का जमाव न हो। Groundnut Farming in India
बुवाई का सही समय
खरीफ मौसम में मूंगफली की बुवाई जून से जुलाई के बीच, मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद करनी चाहिए। समय पर बुवाई करने से पौधों का विकास बेहतर होता है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जून से जुलाई के बीच करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट या दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे बेहतर रहती है। Groundnut Farming in India

बीज की मात्रा और बुवाई की विधि
बुवाई के लिए हमेशा प्रमाणित एवं रोगमुक्त बीज का चयन करें। प्रति हेक्टेयर लगभग 100 से 120 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखें। बुवाई 5 से 6 सेंटीमीटर गहराई पर करें Groundnut Farming in India
खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी परीक्षण के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें। सामान्यतः नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग लाभदायक रहता है। फली बनने के समय जिप्सम का प्रयोग करने से दानों का विकास अच्छा होता है और उत्पादन बढ़ता है। Groundnut Farming in India
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सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
यदि वर्षा पर्याप्त न हो तो आवश्यकतानुसार 2 से 4 सिंचाई करें। फूल आने और फली बनने की अवस्था में नमी बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। खरपतवारों से बचाव के लिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है। Groundnut Farming in India

कीट एवं रोग प्रबंधन
मूंगफली की फसल में माहू, तेला और पत्ती खाने वाली इल्ली जैसे कीट नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं टिक्का रोग और रस्ट जैसी बीमारियां भी उत्पादन कम कर सकती हैं। नियमित निरीक्षण करें और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उचित कीटनाशक एवं फफूंदनाशक का प्रयोग करें। Groundnut Farming in India
कटाई का सही समय
जब पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगें और फलियां पूरी तरह विकसित हो जाएं, तब फसल की खुदाई करें। खुदाई के बाद फलियों को अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारण करें, ताकि नमी के कारण नुकसान न हो। Groundnut Farming in India
मूंगफली की खेती से कितना उत्पादन मिलता है?
यदि किसान उन्नत किस्मों का चयन करें और वैज्ञानिक खेती अपनाएं, तो औसतन 20 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। अच्छी गुणवत्ता वाली मूंगफली बाजार में बेहतर कीमत दिलाती है, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलता है।
निष्कर्ष
मूंगफली की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल साबित हो सकती है। यदि सही समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित खाद एवं उर्वरकों का उपयोग, समय पर सिंचाई और कीट-रोगों का प्रभावी प्रबंधन किया जाए, तो बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाकर किसान मूंगफली की खेती से अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
