Sorghum Cultivation Process: ज्वार (Sorghum) भारत की प्रमुख अनाज एवं चारा फसलों में से एक है। यह कम पानी और गर्म जलवायु में भी अच्छी पैदावार देने वाली फसल मानी जाती है। ज्वार का उपयोग मानव भोजन, पशु चारे और औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें, तो कम लागत में बेहतर उत्पादन और अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। आइए जानते हैं ज्वार की खेती की पूरी प्रक्रिया। Sorghum Cultivation Process
ज्वार की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी
ज्वार गर्म एवं शुष्क जलवायु की फसल है। इसके लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छी तरह उगाई जा सकती है।
मिट्टी की बात करें तो अच्छी जल निकासी वाली दोमट, बलुई दोमट तथा मध्यम काली मिट्टी ज्वार की खेती के लिए उपयुक्त होती है। मिट्टी का pH मान 6.0 से 8.5 के बीच होना चाहिए।
ज्वार की उन्नत किस्में
अधिक उत्पादन के लिए उन्नत एवं प्रमाणित बीजों का चयन करें। प्रमुख किस्में निम्नलिखित हैं।
- CSV 15
- CSV 17
- CSV 20
- CSV 23
- CSH 14
- CSH 16
- CSH 25
- SPV 2217
- M 35-1
- Phule Vasudha
इन किस्मों में अधिक उत्पादन क्षमता तथा कई रोगों के प्रति बेहतर सहनशीलता होती है। Sorghum Cultivation Process

ज्वार की बुवाई का सही समय
खरीफ मौसम की ज्वार की बुवाई सामान्यतः जून से जुलाई के बीच मानसून आने के बाद की जाती है। वहीं रबी ज्वार की बुवाई सितंबर के अंत से अक्टूबर तक की जाती है। समय पर बुवाई करने से पौधों का विकास अच्छा होता है। Sorghum Cultivation Process
खेत की तैयारी
खेत की 2 से 3 गहरी जुताई करें और प्रत्येक जुताई के बाद पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा एवं समतल बना लें। अंतिम जुताई के समय 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर खेत में मिलाना लाभदायक रहता है। Sorghum Cultivation Process
बीज दर और बुवाई की विधि
ज्वार की खेती में सामान्यतः 10 से 15 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।
- पंक्ति से पंक्ति की दूरी: 45 सेंटीमीटर
- पौधे से पौधे की दूरी: 12 से 15 सेंटीमीटर
- बुवाई की गहराई: 3 से 5 सेंटीमीटर
सीड ड्रिल से लाइन में बुवाई करने पर पौधों का विकास समान रूप से होता है और उत्पादन बढ़ता है। Sorghum Cultivation Process
बीज उपचार
बुवाई से पहले बीज को अनुशंसित फफूंदनाशी से उपचारित करें। इससे बीज जनित रोगों से सुरक्षा मिलती है तथा अंकुरण अच्छा होता है।

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करना सबसे बेहतर होता है। सामान्यतः प्रति हेक्टेयर निम्न मात्रा उपयोगी रहती है।
- गोबर की खाद: 8 से 10 टन
- नाइट्रोजन: 80 से 100 किलोग्राम
- फास्फोरस: 40 से 50 किलोग्राम
- पोटाश: 20 से 30 किलोग्राम (आवश्यकतानुसार)
नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय तथा शेष मात्रा 30 से 35 दिन बाद टॉप ड्रेसिंग के रूप में दें।
सिंचाई प्रबंधन
यदि वर्षा पर्याप्त हो तो अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। वर्षा की कमी होने पर निम्न अवस्थाओं में सिंचाई करें।
- अंकुरण के समय
- पौधों की बढ़वार के समय
- बालियां निकलने के समय
- दाना भरने की अवस्था में
खेत में जलभराव बिल्कुल न होने दें।
चना की खेती कैसे करें? बुवाई से कटाई तक
खरपतवार नियंत्रण
बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करें। आवश्यकता पड़ने पर 40 दिन बाद दूसरी निराई करें। खरपतवार नियंत्रण से पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है और उत्पादन में वृद्धि होती है। Sorghum Cultivation Process
ज्वार की खेती में प्रमुख रोग एवं कीट
शूट फ्लाई
यह कीट पौधों की शुरुआती अवस्था में नुकसान पहुंचाता है। समय पर बुवाई और अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग लाभदायक रहता है।
तना छेदक
यह कीट तने में छेद कर पौधों की वृद्धि रोक देता है। नियमित निगरानी और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार नियंत्रण करें।
दाना फफूंद एवं लीफ ब्लाइट
बीज उपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और रोग प्रतिरोधी किस्मों के चयन से इन रोगों का प्रभाव कम किया जा सकता है।
कटाई और मड़ाई
जब ज्वार की बालियां पूरी तरह पक जाएं और दाने सख्त हो जाएं, तब फसल की कटाई करें। कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह सुखाकर मड़ाई करें और दानों को साफ करके सूखी जगह पर भंडारित करें। Sorghum Cultivation Process
ज्वार की खेती में संभावित उत्पादन
उन्नत तकनीकों और उचित प्रबंधन अपनाने पर किसान 35 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक अनाज उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। चारा ज्वार की खेती में हरे चारे का उत्पादन इससे भी अधिक मिलता है। Sorghum Cultivation Process
ज्वार की खेती से कमाई
ज्वार की बाजार में खाद्यान्न, पशु चारा और औद्योगिक उपयोग के कारण अच्छी मांग रहती है। यदि किसान उन्नत किस्मों की खेती करें और उचित प्रबंधन अपनाएं, तो प्रति हेक्टेयर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। पशुपालकों के लिए चारा उत्पादन के रूप में भी यह फसल बेहद लाभदायक है। Sorghum Cultivation Process
ज्वार की खेती के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- प्रमाणित एवं उन्नत बीजों का ही उपयोग करें।
- समय पर बुवाई करें।
- बीज उपचार अवश्य करें।
- संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग करें।
- खेत में जलभराव न होने दें।
- रोग एवं कीटों की नियमित निगरानी करें।
- फसल पकने पर समय पर कटाई करें।
निष्कर्ष
ज्वार की खेती कम लागत, कम पानी और बेहतर उत्पादन देने वाली लाभदायक फसल है। यदि किसान सही समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, समय पर सिंचाई तथा रोग-कीट नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय अपनाते हैं, तो अधिक उपज के साथ अच्छी गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करके ज्वार की खेती किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।
