बारिश का मौसम पशुपालकों के लिए जितना लाभदायक होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकता है। इस मौसम में नमी बढ़ने, बाड़ों में गंदगी जमा होने और जलभराव के कारण पशुओं में कई संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं। इनमें सबसे खतरनाक बीमारी FMD In Cattle यानी खुरपका-मुंहपका रोग मानी जाती है। यह बीमारी बहुत तेजी से एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है और दूध उत्पादन, पशुओं की कार्यक्षमता तथा पशुपालकों की आय पर सीधा प्रभाव डालती है। पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (कृषि विज्ञान केंद्र, नोएडा) के अनुसार यदि बारिश के मौसम में समय रहते सही देखभाल की जाए तो FMD In Cattle सहित कई गंभीर बीमारियों से पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है।
बारिश में क्यों बढ़ जाता है FMD In Cattle का खतरा?
बारिश के दौरान पशुओं के रहने की जगह अक्सर गीली रहती है, जिससे वायरस, बैक्टीरिया और फफूंद तेजी से पनपते हैं। यदि बाड़े में पानी जमा हो जाए या पशुओं को लंबे समय तक गीले वातावरण में रखा जाए तो संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि मानसून के दौरान FMD In Cattle के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। संक्रमित पशु के संपर्क, दूषित चारा और गंदे पानी के माध्यम से भी यह बीमारी तेजी से फैल सकती है।
FMD In Cattle क्या है?
FMD In Cattle (Foot and Mouth Disease) एक अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है, जो गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और अन्य खुर वाले पशुओं को प्रभावित करता है। इस बीमारी में पशुओं के मुंह, जीभ, मसूड़ों और खुरों पर छाले बन जाते हैं। पशु ठीक से चारा नहीं खा पाते, चलने में दर्द महसूस करते हैं और दूध उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है। समय पर उपचार और टीकाकरण नहीं होने पर यह बीमारी पूरे पशुधन में फैल सकती है।
FMD In Cattle के लक्षण कैसे पहचानें?
यदि किसी पशु को तेज बुखार हो, मुंह से ज्यादा लार निकल रही हो, जीभ या मसूड़ों पर छाले दिखाई दें, खुरों में सूजन हो, चलने में लंगड़ापन आए या अचानक दूध उत्पादन कम हो जाए, तो यह FMD In Cattle का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखने पर पशु को तुरंत अलग रखें और पशु चिकित्सक से संपर्क करें, ताकि संक्रमण दूसरे पशुओं तक न पहुंचे।
पशुओं के लिए सूखा और सुरक्षित शेड बनाना आवश्यक
बारिश के मौसम में पशुओं को कभी भी खुले स्थान या लगातार बारिश में नहीं बांधना चाहिए। उनके लिए ऐसा शेड होना चाहिए जहां छत से पानी न टपके और फर्श हमेशा सूखा रहे। गीले और गंदे वातावरण में वायरस तेजी से फैलते हैं, जिससे FMD In Cattle और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बाड़े की नियमित सफाई और जल निकासी की उचित व्यवस्था भी पशुओं की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक है।
संतुलित आहार से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
बारिश में केवल हरा चारा खिलाना पर्याप्त नहीं माना जाता। पशुओं को हरे चारे के साथ सूखा चारा भी देना चाहिए ताकि उनका पाचन तंत्र बेहतर बना रहे। इसके साथ ही जिंक, कॉपर, मैग्नीशियम और नमक युक्त मिनरल मिक्सचर खिलाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। मजबूत इम्यूनिटी FMD In Cattle सहित कई वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पशुओं को हमेशा साफ और ताजा पानी ही पिलाएं
बारिश के दौरान गड्ढों, तालाबों या जमा हुए पानी में हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस पनपते हैं। यदि पशु ऐसा पानी पीते हैं तो संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए पशुओं को हमेशा साफ, ताजा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना चाहिए। स्वच्छ पानी की व्यवस्था FMD In Cattle के जोखिम को कम करने में भी सहायक मानी जाती है।
समय पर टीकाकरण ही सबसे प्रभावी बचाव
विशेषज्ञों के अनुसार FMD In Cattle से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका नियमित टीकाकरण है। सरकार द्वारा चलाए जाने वाले टीकाकरण अभियान के दौरान सभी पशुओं को समय पर टीका अवश्य लगवाना चाहिए। बीमारी फैलने के बाद इलाज कराने की तुलना में पहले से टीकाकरण करवाना ज्यादा सुरक्षित और कम खर्चीला उपाय है।
मॉनसून में पशुओं की सुरक्षा के लिए शुरू हुआ बड़ा टीकाकरण अभियान
दूध निकालने से पहले थनों की सफाई आवश्यक
बारिश के मौसम में पशुओं के थन अक्सर कीचड़ और गीली मिट्टी के संपर्क में आते हैं। यदि बिना सफाई के दूध निकाला जाए तो थनैला जैसी बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। दूध निकालने से पहले थनों को साफ पानी से धोकर साफ कपड़े से अच्छी तरह पोंछना चाहिए। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहती है और संक्रमण की संभावना कम होती है।
पिस्सू और टिक्स से भी रखें पशुओं को सुरक्षित
बारिश के दौरान पशुओं के शरीर पर टिक्स, पिस्सू और अन्य बाहरी परजीवी तेजी से बढ़ते हैं। ये परजीवी पशुओं का खून चूसने के साथ कई संक्रामक बीमारियां भी फैलाते हैं। पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार समय-समय पर कीटनाशक स्प्रे या दवाओं का उपयोग करना चाहिए। साफ-सफाई और परजीवी नियंत्रण से FMD In Cattle सहित कई रोगों के खतरे को कम किया जा सकता है।
बारिश में पशुपालकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग कर दें। बाड़े में पानी जमा न होने दें, नियमित रूप से कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव करें और पशुओं को संतुलित आहार दें। समय-समय पर पशु चिकित्सक से स्वास्थ्य जांच करवाते रहें। इन उपायों का पालन करने से FMD In Cattle के साथ-साथ अन्य मौसमी बीमारियों से भी पशुओं की सुरक्षा की जा सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) नोएडा के पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम का कहना है कि बारिश के मौसम में पशुओं की देखभाल में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। स्वच्छ बाड़ा, संतुलित आहार, साफ पानी, नियमित टीकाकरण और समय पर स्वास्थ्य जांच जैसे उपाय अपनाकर FMD In Cattle के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है। इससे पशु स्वस्थ रहते हैं, दूध उत्पादन प्रभावित नहीं होता और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकता है।
