कपास पर गुलाबी सुंडी का हमला कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी Kapas Par Gulabi Sundi Ka Hamla

कपास पर गुलाबी सुंडी का हमला कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी Kapas Par Gulabi Sundi Ka Hamla

हरियाणा के सिरसा जिले में Kapas Par Gulabi Sundi Ka Hamla के शुरुआती संकेत मिलने के बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) का प्रकोप आर्थिक नुकसान की सीमा (Economic Threshold Level-ETL) से नीचे है। इसलिए किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि समय रहते निगरानी और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार प्रबंधन अपनाना चाहिए।

सिरसा में दिखाई दिए गुलाबी सुंडी के शुरुआती संकेत

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के रीजनल इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सेंटर (फरीदाबाद) और सिरसा के संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) कार्यालय की संयुक्त टीम ने जिले के कई कपास खेतों का निरीक्षण किया। सर्वे के दौरान Kapas Par Gulabi Sundi Ka Hamla के शुरुआती लक्षण मिले, लेकिन विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।संयुक्त कृषि निदेशक (कपास) आत्मा राम गोदारा के अनुसार, किसानों द्वारा लगाए गए फेरोमोन ट्रैप से समय रहते कीट की पहचान हो रही है, जिससे नुकसान होने से पहले ही आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह

कृषि विभाग ने हरियाणा के प्रमुख कपास उत्पादक जिलों सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, हांसी, भिवानी, चरखी दादरी और जींद में करीब 120 फेरोमोन ट्रैप लगाए हैं।विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि Kapas Par Gulabi Sundi Ka Hamla की प्रभावी निगरानी के लिए प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप जरूर लगाएं। इससे कीट की शुरुआती गतिविधि का पता आसानी से चल जाता है और समय पर नियंत्रण संभव होता है।

रस चूसने वाले कीटों के लिए स्टिकी ट्रैप भी जरूरी

गुलाबी सुंडी के अलावा सफेद मक्खी, जेसिड और अन्य रस चूसने वाले कीटों की निगरानी के लिए कृषि विभाग ने प्रति एकड़ 20 पीले या नीले स्टिकी ट्रैप लगाने की सलाह दी है।इन ट्रैप की मदद से खेत में कीटों की वास्तविक संख्या का आकलन किया जा सकता है और केवल जरूरत पड़ने पर ही नियंत्रण उपाय अपनाए जा सकते हैं।

जरूरत पड़ने पर ही करें कीटनाशकों का छिड़काव

विशेषज्ञों का कहना है कि Kapas Par Gulabi Sundi Ka Hamla दिखाई देने पर बिना जांच के कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करना चाहिए।किसानों को केवल केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIBRC) से मंजूर कीटनाशकों का ही उपयोग करना चाहिए। इससे अनावश्यक रसायनों का इस्तेमाल कम होगा, उत्पादन लागत घटेगी और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा

NPSS मोबाइल ऐप से मिलेगी वैज्ञानिक सलाह

कृषि विभाग ने किसानों को NPSS मोबाइल ऐप का उपयोग करने की भी सलाह दी है। इस ऐप के माध्यम से किसान कीट एवं रोगों की पहचान, उनकी निगरानी और नियंत्रण से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।यदि Kapas Par Gulabi Sundi Ka Hamla बढ़ने लगता है, तो ऐप के जरिए समय-समय पर विशेषज्ञों की सलाह भी मिल सकती है।

कमजोर बारिश से कपास की बुवाई भी प्रभावित

Kapas Par Gulabi Sundi Ka Hamla इस वर्ष हरियाणा में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कपास की खेती भी प्रभावित हुई है। राज्य में इस बार लगभग 3.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 3.94 लाख हेक्टेयर था।यानी इस बार करीब 0.83 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में कपास की खेती हुई है। राज्य अब तक निर्धारित लक्ष्य का लगभग 78 प्रतिशत ही हासिल कर पाया है।

किसानों के लिए क्या है सलाह?

यदि Kapas Par Gulabi Sundi Ka Hamla के शुरुआती संकेत दिखाई दें तो घबराने की बजाय नियमित निगरानी करें। खेत में फेरोमोन ट्रैप और स्टिकी ट्रैप लगाएं, केवल मंजूरशुदा कीटनाशकों का ही उपयोग करें और कृषि विभाग या वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही नियंत्रण उपाय अपनाएं। समय पर निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन से गुलाबी सुंडी से होने वाले संभावित नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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