मुर्गी पालन से बदली आदिवासी महिला किसान फूल कुमारी की जिंदगी, KVK की मदद से कमाई पहुंची 2.23 लाख रुपये Phool Kumari Farmer Success Story

मुर्गी पालन से बदली आदिवासी महिला किसान फूल कुमारी की जिंदगी, KVK की मदद से कमाई पहुंची 2.23 लाख रुपये  Phool Kumari Farmer Success Story

Phool Kumari Farmer Success Story: झारखंड के गुमला जिले की आदिवासी महिला किसान फूल कुमारी की कहानी खेती और पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए प्रेरणादायक है। Phool Kumari Farmer Success Story बताती है कि सही प्रशिक्षण, बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल करके छोटे स्तर पर शुरू किया गया मुर्गी पालन भी आमदनी का मजबूत साधन बन सकता है। कभी खेती से सालाना 50 से 60 हजार रुपये कमाने वाला उनका परिवार आज मुर्गी पालन और हैचरी से लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहा है।

बारिश आधारित खेती से शुरू हुआ सफर

फूल कुमारी गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड के बोरांग गांव की रहने वाली हैं। उनके परिवार के पास करीब 5 एकड़ जमीन है, जिसमें लगभग 2 एकड़ निचली और 3 एकड़ ऊपरी भूमि है। लंबे समय तक उनका परिवार वर्षा आधारित पारंपरिक खेती पर निर्भर रहा। कम उत्पादकता और बारिश पर निर्भरता के कारण खेती से परिवार को सालाना करीब 50 से 60 हजार रुपये की ही आमदनी होती थी। घरेलू खर्च और बच्चों की पढ़ाई के लिए यह आय पर्याप्त नहीं थी। ऐसे समय में Phool Kumari Farmer Success Story की शुरुआत एक ऐसे विकल्प की तलाश से हुई, जिससे खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी प्राप्त की जा सके।

KVK गुमला से मिला प्रशिक्षण

वर्ष 2016 में फूल कुमारी का संपर्क कृषि विज्ञान केंद्र यानी KVK गुमला से हुआ। KVK के कृषि वैज्ञानिकों ने उन्हें खेती की आधुनिक तकनीकों के साथ आय बढ़ाने के अन्य विकल्पों के बारे में भी जानकारी दी। वर्ष 2018 में KVK के विशेषज्ञों ने उन्हें मुर्गी पालन शुरू करने की सलाह दी और इसके लिए प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मुर्गियों के लिए बेहतर आवास, पोषण, साफ पानी, स्वास्थ्य प्रबंधन और बीमारी से बचाव जैसी जरूरी जानकारी दी गई। यहीं से Phool Kumari Farmer Success Story ने एक नया मोड़ लिया और उन्होंने मुर्गी पालन को अतिरिक्त आमदनी के साधन के रूप में अपनाया।

100 दिव्यायन रेड चूजों से शुरू किया मुर्गी पालन

ट्राइबल सब-प्लान (TSP) के तहत फूल कुमारी को दिव्यायन रेड नस्ल के 100 चूजे उपलब्ध कराए गए। यह नस्ल अंडे और मांस दोनों के लिए उपयोगी है। फूल कुमारी ने प्रशिक्षण में मिली जानकारी के अनुसार चूजों का पालन शुरू किया। उन्होंने शेड की साफ-सफाई, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और बीमारी से बचाव पर ध्यान दिया। बेहतर प्रबंधन के कारण पक्षियों का विकास अच्छा हुआ। लगभग तीन महीने में पक्षियों का औसत वजन 1.5 किलोग्राम तक पहुंचने लगा और करीब 22 सप्ताह की उम्र से अंडे मिलने शुरू हो गए। Phool Kumari Farmer Success Story में यह शुरुआती सफलता उनके लिए मुर्गी पालन को आगे बढ़ाने का आधार बनी।

हैचरी मशीन से बढ़ा कारोबार

मुर्गी पालन में सफलता मिलने के बाद KVK गुमला ने फूल कुमारी के स्वयं सहायता समूह को भी सहयोग दिया। TSP परियोजना के तहत समूह को एक हैचरी मशीन और 112 अंडे उपलब्ध कराए गए। हैचरी मशीन मिलने के बाद फूल कुमारी केवल बड़ी मुर्गियों की बिक्री तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने चूजों का उत्पादन भी शुरू किया। इससे स्थानीय किसानों को बेहतर नस्ल के चूजे उपलब्ध होने लगे और उनकी आय के स्रोत भी बढ़ गए। यह बदलाव Phool Kumari Farmer Success Story को एक सामान्य किसान की कहानी से आगे बढ़ाकर महिला पोल्ट्री उद्यमिता की मिसाल बनाता है।

2025-26 में 2.23 लाख रुपये की शुद्ध कमाई

वर्ष 2025-26 में फूल कुमारी ने करीब 1,000 बड़े पक्षियों की बिक्री की। इन्हें लगभग 400 रुपये प्रति पक्षी की दर से बेचने पर करीब 4 लाख रुपये की कुल बिक्री हुई। इस कारोबार में लगभग 2.25 लाख रुपये की लागत आई और पक्षियों की बिक्री से करीब 1.75 लाख रुपये की शुद्ध आय हुई। इसके अलावा उन्होंने करीब 960 चूजे 40 रुपये प्रति चूजे की दर से बेचकर 38,400 रुपये कमाए। लगभग 1,000 अंडों की बिक्री से करीब 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई। इस तरह मुर्गी पालन और हैचरी से उनकी कुल शुद्ध सालाना आय करीब 2,23,400 रुपये रही। यही उपलब्धि Phool Kumari Farmer Success Story को ग्रामीण महिला उद्यमिता की एक उल्लेखनीय कहानी बनाती है।

मुर्गी पालन की कमाई से खरीदा ऑटो

पोल्ट्री कारोबार से बढ़ी आमदनी का इस्तेमाल फूल कुमारी के परिवार ने दूसरे रोजगार में भी किया। परिवार ने अतिरिक्त कमाई से एक ऑटो-रिक्शा खरीदा, जिसे उनके पति जगदीश उरांव चलाते हैं। इससे परिवार के पास आमदनी का एक और साधन तैयार हुआ। बच्चों की पढ़ाई और परिवार की अन्य जरूरतों को पूरा करना भी पहले की तुलना में आसान हुआ। Phool Kumari Farmer Success Story यह भी दिखाती है कि कृषि से जुड़ी अतिरिक्त आय को दूसरे छोटे व्यवसाय में निवेश करके परिवार की आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया जा सकता है।

30 आदिवासी महिलाओं को मिली प्रेरणा

फूल कुमारी की सफलता का प्रभाव उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। उनकी पोल्ट्री यूनिट से प्रेरणा लेकर बोरांग गांव की करीब 30 आदिवासी महिलाएं भी बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग से जुड़ी हैं। ये महिलाएं बेहतर नस्ल के मुर्गे-मुर्गियों का पालन कर रही हैं। वे फूल कुमारी की यूनिट से अंडे भी खरीदती हैं और सोनाली तथा दिव्यायन रेड जैसी नस्लों को अपनाकर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रही हैं। इन महिलाओं को पोल्ट्री से करीब 35 से 45 हजार रुपये तक की अतिरिक्त सालाना आमदनी होने की बात कही गई है। इस तरह Phool Kumari Farmer Success Story गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी रोजगार और आय का रास्ता खोल रही है।

प्रशिक्षण और तकनीक ने बदली किसान की तस्वीर

फूल कुमारी की कहानी बताती है कि किसानों के लिए खेती के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना कितना उपयोगी हो सकता है। खासकर वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में मुर्गी पालन, पशुपालन और अन्य कृषि आधारित व्यवसाय परिवार की आय बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। Phool Kumari Farmer Success Story में KVK से मिला प्रशिक्षण, बेहतर नस्ल के चूजे, वैज्ञानिक प्रबंधन और हैचरी तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छोटे स्तर से शुरू हुआ उनका काम धीरे-धीरे एक व्यवस्थित पोल्ट्री कारोबार में बदल गया।

महिला किसानों के लिए बनी प्रेरणा

आज फूल कुमारी की पहचान केवल एक किसान के रूप में नहीं, बल्कि एक महिला पोल्ट्री उद्यमी के रूप में भी बन रही है। उन्होंने अपनी मेहनत और प्रशिक्षण के जरिए परिवार की आमदनी बढ़ाई और गांव की अन्य महिलाओं को भी इस व्यवसाय से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। Phool Kumari Farmer Success Story इस बात का उदाहरण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों और संस्थागत प्रशिक्षण का सही इस्तेमाल करके किसान अपनी आय के नए रास्ते तैयार कर सकते हैं। उनकी सफलता से जुड़ी जानकारी दूसरी महिला किसानों को भी खेती के साथ मुर्गी पालन जैसे व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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