Dhan Me Zinc Ki Kami धान की खेती में किसान अच्छी उपज के लिए यूरिया, डीएपी और एनपीके उर्वरकों का नियमित इस्तेमाल करते हैं। इसके बावजूद कई बार फसल की बढ़वार रुक जाती है, पौधे कमजोर दिखाई देते हैं और कल्ले भी कम निकलते हैं। ऐसी स्थिति में केवल एनपीके की मात्रा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होता। जिंक एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो पौधों की वृद्धि, प्रकाश संश्लेषण और दानों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि समय रहते Dhan Me Zinc Ki Kami को पूरा कर दिया जाए तो पौधों की सेहत के साथ-साथ पैदावार में भी उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
Dhan Me Zinc Ki Kami Ke Lakshan
धान की रोपाई के लगभग 2 से 3 सप्ताह बाद यदि नई और मध्यम पत्तियों पर हल्के पीले, भूरे या कांस्य रंग के धब्बे दिखाई देने लगें तो यह Dhan Me Zinc Ki Kami का संकेत हो सकता है। इस समस्या को खैरा रोग भी कहा जाता है। धीरे-धीरे पत्तियां सूखने लगती हैं, पौधों की लंबाई रुक जाती है और खेत में फसल कमजोर दिखाई देती है। Dhan Me Zinc Ki Kami होने पर प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पौधे पर्याप्त भोजन नहीं बना पाते। इसका सीधा असर कल्ले बनने और दानों के विकास पर पड़ता है।
धान में जिंक की कमी क्यों होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार एनपीके और नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का उपयोग करने से मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है। खासकर जलभराव वाली या क्षारीय मिट्टी में Dhan Me Zinc Ki Kami अधिक देखने को मिलती है। ऐसी मिट्टी में पौधे जिंक को पर्याप्त मात्रा में अवशोषित नहीं कर पाते, जिससे उनकी वृद्धि प्रभावित होती है और उत्पादन घट सकता है।
रोपाई के समय जिंक का सही उपयोग करें
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि Dhan Me Zinc Ki Kami से बचाव के लिए रोपाई से पहले या शुरुआती अवस्था में जिंक का प्रयोग सबसे प्रभावी रहता है। अंतिम जुताई के समय प्रति एकड़ 10 से 12 किलोग्राम जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) या 7 से 8 किलोग्राम जिंक सल्फेट (33 प्रतिशत) मिट्टी में मिलाकर डालना चाहिए। इससे जड़ों का विकास बेहतर होता है और पौधे शुरुआती अवस्था से ही मजबूत बनते हैं।
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खड़ी फसल में जिंक की कमी दिखे तो क्या करें?
यदि खड़ी फसल में Dhan Me Zinc Ki Kami के लक्षण दिखाई दें तो किसान जिंक सल्फेट का फोलियर स्प्रे कर सकते हैं। इसके लिए 1 किलोग्राम जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत) के साथ 2.5 किलोग्राम बुझा हुआ चूना या यूरिया को 150 से 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 10 से 12 दिन बाद दोबारा स्प्रे किया जा सकता है। इससे Dhan Me Zinc Ki Kami तेजी से दूर होती है और पौधों की बढ़वार में सुधार आता है।
जिंक का उपयोग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिंक सल्फेट को डीएपी या एसएसपी जैसे फॉस्फेट उर्वरकों के साथ सीधे मिलाकर नहीं डालना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए जिंक का प्रयोग अलग से या यूरिया के साथ करें। खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें और फसल की नियमित निगरानी करते रहें। सही समय पर Dhan Me Zinc Ki Kami का प्रबंधन करने से अधिक कल्ले निकलते हैं, पौधे स्वस्थ रहते हैं और किसानों को बेहतर गुणवत्ता के साथ अधिक उत्पादन प्राप्त हो सकता है।
