देश में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata। पिछले कुछ वर्षों में सुपारी की खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद कुल उत्पादन और प्रति हेक्टेयर पैदावार में लगातार कमी दर्ज की गई है। सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार खेती का विस्तार होने के बाद भी किसानों को पहले जैसी उपज नहीं मिल रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक खेती पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में सुपारी उत्पादकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
11 लाख हेक्टेयर से अधिक पहुंचा सुपारी का रकबा
यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata यह सवाल और भी अहम हो जाता है। वर्ष 2021-22 में देश में सुपारी की खेती का कुल रकबा 8.49 लाख हेक्टेयर था, जो 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमान में बढ़कर 11.06 लाख हेक्टेयर हो गया। यानी करीब 2.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई।सामान्य तौर पर खेती का क्षेत्र बढ़ने से उत्पादन भी बढ़ता है, लेकिन सुपारी के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata? आंकड़े बता रहे हैं पूरी कहानी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में देश का कुल सुपारी उत्पादन 16.66 लाख टन था, जबकि 2025-26 में यह घटकर 15.29 लाख टन रह गया। यही वजह है कि किसान लगातार जानना चाहते हैं कि Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata, जबकि खेती का रकबा लगातार बढ़ रहा है।यह गिरावट इस बात का संकेत है कि केवल खेती का विस्तार पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पादन बढ़ाने के लिए बेहतर प्रबंधन भी जरूरी है।
प्रति हेक्टेयर पैदावार में आई भारी कमी
Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata इसका एक बड़ा कारण उत्पादकता में आई गिरावट भी है। पहले जहां औसतन 1.96 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिलता था, वहीं अब यह घटकर 1.38 टन प्रति हेक्टेयर रह गया है।कम पैदावार के कारण किसानों की उत्पादन लागत बढ़ रही है और मुनाफा लगातार घटता जा रहा है।
नए राज्यों में तेजी से बढ़ रही सुपारी की खेती
हालांकि Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata यह चिंता बनी हुई है, लेकिन दूसरी ओर कई नए राज्यों में सुपारी की खेती तेजी से फैल रही है।पिछले पांच वर्षों में मेघालय में लगभग 195 प्रतिशत, नागालैंड में 177 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 171 प्रतिशत और तमिलनाडु में 92 प्रतिशत रकबे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसान बोरवेल सिंचाई और आधुनिक तकनीकों के सहारे सुपारी की खेती को अपना रहे हैं।
कर्नाटक में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ उत्पादन
यदि पूछा जाए कि Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata, तो इसका सबसे बड़ा उदाहरण कर्नाटक है। देश के कुल सुपारी उत्पादन में लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इस राज्य में रकबा करीब 32 प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन उत्पादन में लगभग 16 प्रतिशत और उत्पादकता में 36 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।दक्षिण कन्नड़, शिवमोग्गा और तुमकुरु जैसे प्रमुख जिलों में किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
फल सड़न और लीफ स्पॉट बनी सबसे बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata इसका सबसे बड़ा कारण बागानों में फैल रही बीमारियां हैं। फल सड़न (Fruit Rot) और लीफ स्पॉट (Leaf Spot) जैसी बीमारियों ने पिछले कुछ वर्षों में लगभग 50 से 60 प्रतिशत सुपारी बागानों को प्रभावित किया है।इन रोगों के कारण पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है, फल कम लगते हैं और गुणवत्ता भी घट जाती है। यही वजह है कि उत्पादन में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
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मौसम और सिंचाई की चुनौतियां भी जिम्मेदार
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata इसके पीछे बदलता मौसम भी एक बड़ा कारण है। अनियमित बारिश, अधिक नमी, सूखे क्षेत्रों में खेती का विस्तार और सिंचाई प्रबंधन की कमी ने भी उत्पादन को प्रभावित किया है।नई जगहों पर खेती बढ़ने के बावजूद किसानों को रोग प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती की पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
उत्पादन बढ़ाने के लिए अपनानी होगी वैज्ञानिक खेती
यदि भविष्य में Supari Ki Kheti Mein Utpadan Kyon Ghata जैसी समस्या से बचना है, तो किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना होगा। समय पर रोगों की पहचान, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, उचित सिंचाई, बागानों की नियमित निगरानी और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार दवाओं का उपयोग करने से उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक खेती और बेहतर रोग प्रबंधन अपनाकर आने वाले वर्षों में सुपारी उत्पादन में फिर से वृद्धि संभव है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और सुपारी की खेती अधिक लाभदायक बन सकेगी।
