खरीफ 2026 बुवाई धान, मक्का और कपास का रकबा घटा, दलहन-तिलहन में बढ़ोतरी Kharif Fasal Rakba 2026

खरीफ 2026 बुवाई धान, मक्का और कपास का रकबा घटा, दलहन-तिलहन में बढ़ोतरी  Kharif Fasal Rakba 2026

Kharif Fasal Rakba 2026 को लेकर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की 18 सितंबर 2026 तक की प्रोग्रेसिव क्रॉप एरिया रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल देश में कुल खरीफ फसल क्षेत्र 1,103.90 लाख हेक्टेयर रहा है। पिछले साल इसी अवधि में कुल फसल क्षेत्र 1,118.95 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कुल खरीफ रकबे में 15.05 लाख हेक्टेयर यानी 1.35 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।

Kharif Fasal Rakba 2026 के आंकड़ों में प्रमुख खरीफ फसलों के क्षेत्र में अलग-अलग बदलाव देखने को मिले हैं। धान, मक्का और कपास का रकबा पिछले साल के मुकाबले घटा है, जबकि दलहन और कुछ तिलहन फसलों के क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई है। उड़द, तिल, सूरजमुखी, ज्वार और बाजरा जैसी फसलों के रकबे में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

Kharif Fasal Rakba 2026 में कुल क्षेत्र कितना रहा?

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 18 सितंबर तक खरीफ 2026 में कुल फसल क्षेत्र 1,103.90 लाख हेक्टेयर रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,118.95 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल कुल खरीफ रकबा 15.05 लाख हेक्टेयर कम हुआ है।कुल क्षेत्र में आई कमी की वजह अलग-अलग फसलों के रकबे में हुआ बदलाव है। प्रमुख फसलों में धान, मक्का, कपास और सोयाबीन का क्षेत्र कम हुआ है, जबकि कुछ दलहन, तिलहन और मोटे अनाज वाली फसलों में बढ़ोतरी हुई है। Kharif Fasal Rakba 2026 की यह तस्वीर किसानों और कृषि बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Kharif Fasal Rakba 2026 धान का रकबा 3.73 फीसदी घटा

धान खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसलों में शामिल है। इस साल धान की बुवाई 429.28 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में धान का क्षेत्र 445.92 लाख हेक्टेयर था। इस तरह धान के रकबे में 16.64 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। प्रतिशत के लिहाज से धान का क्षेत्र करीब 3.73 फीसदी घटा है। धान की बुवाई में यह कमी Kharif Fasal Rakba 2026 के प्रमुख आंकड़ों में शामिल है। धान की खेती के लिए पर्याप्त बारिश और सिंचाई पानी जरूरी होता है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में बारिश की स्थिति कमजोर रही है, वहां बुवाई के क्षेत्र पर इसका असर देखने को मिला है।

मक्का की बुवाई में भी गिरावट

मक्का के रकबे में भी इस खरीफ सीजन कमी दर्ज की गई है। 2026 में मक्का की बुवाई 92.76 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में मक्का का क्षेत्र 94.88 लाख हेक्टेयर था। इस तरह मक्का का रकबा 2.12 लाख हेक्टेयर घटा है। प्रतिशत में यह करीब 2.23 फीसदी की कमी है। मक्का का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों के अलावा पशु चारा और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है।

Kharif Fasal Rakba 2026 कपास का रकबा 0.90 फीसदी कम

कपास खरीफ सीजन की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है। इस साल कपास की बुवाई 109.61 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसका क्षेत्र 110.60 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कपास का रकबा 0.99 लाख हेक्टेयर घटा है। यानी कपास के क्षेत्र में 0.90 फीसदी की कमी हुई है। कपास का सामान्य क्षेत्रफल 125.51 लाख हेक्टेयर बताया गया है। Kharif Fasal Rakba 2026 में कपास का क्षेत्र सामान्य क्षेत्रफल की तुलना में भी कम दिखाई दे रहा है।

गन्ने की खेती में मामूली कमी

गन्ने के रकबे में भी इस साल हल्की गिरावट देखने को मिली है। 2026-27 में गन्ने की बुवाई 58.47 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह क्षेत्र 58.87 लाख हेक्टेयर था। इस तरह गन्ने का क्षेत्र 0.40 लाख हेक्टेयर घटा है। प्रतिशत में गन्ने के रकबे में 0.69 फीसदी की कमी दर्ज हुई है।

Kharif Fasal Rakba 2026 दलहन के रकबे में 1.45 फीसदी बढ़ोतरी

खरीफ सीजन में दलहन की बुवाई के आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं। इस साल कुल दलहन क्षेत्र 119.65 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 117.94 लाख हेक्टेयर था। इस तरह दलहन के क्षेत्र में 1.71 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। यानी कुल दलहन रकबा 1.45 फीसदी बढ़ा है। इस वृद्धि में उड़द की बुवाई का प्रमुख योगदान रहा है। Kharif Fasal Rakba 2026 में दलहन क्षेत्र की यह बढ़ोतरी एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

Kharif Fasal Rakba 2026 उड़द की बुवाई में 11.97 फीसदी उछाल

उड़द के रकबे में इस साल अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल उड़द की बुवाई 23.12 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो इस साल बढ़कर 25.89 लाख हेक्टेयर हो गई है। इस तरह उड़द का क्षेत्र 2.77 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। प्रतिशत के लिहाज से उड़द की बुवाई में 11.97 फीसदी की वृद्धि हुई है। तुअर के क्षेत्र में भी 0.89 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, मूंग का रकबा 1.37 लाख हेक्टेयर घटा है।

तिलहन का कुल रकबा लगभग स्थिर

Kharif Fasal Rakba 2026 में कुल तिलहन क्षेत्र लगभग स्थिर रहा है। इस साल तिलहन की बुवाई 194.76 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 194.75 लाख हेक्टेयर था। यानी कुल तिलहन क्षेत्र में सिर्फ 0.01 लाख हेक्टेयर का अंतर रहा। हालांकि, अलग-अलग तिलहन फसलों के रकबे में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है।

सोयाबीन का रकबा 0.72 फीसदी घटा

सोयाबीन खरीफ की प्रमुख तिलहन फसल है। इस साल सोयाबीन की बुवाई 122.22 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में इसका क्षेत्र 123.11 लाख हेक्टेयर था।इस तरह सोयाबीन का रकबा 0.89 लाख हेक्टेयर घटा है। प्रतिशत में सोयाबीन का क्षेत्र 0.72 फीसदी कम हुआ है। सोयाबीन का सामान्य क्षेत्रफल 128.71 लाख हेक्टेयर बताया गया है।

तिल की खेती में 13.22 फीसदी बढ़ोतरी

तिल की बुवाई के क्षेत्र में इस खरीफ सीजन अच्छी वृद्धि हुई है। पिछले साल तिल का क्षेत्र 9.79 लाख हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़कर 11.08 लाख हेक्टेयर हो गया है। इस तरह तिल का रकबा 1.29 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। प्रतिशत में देखें तो तिल की बुवाई में 13.22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। तिलहन क्षेत्र में हुआ यह बदलाव Kharif Fasal Rakba 2026 के महत्वपूर्ण आंकड़ों में शामिल है।

सूरजमुखी के रकबे में 84.34 फीसदी वृद्धि

सूरजमुखी की बुवाई के क्षेत्र में इस साल उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल सूरजमुखी का क्षेत्र 0.70 लाख हेक्टेयर था, जो इस साल बढ़कर 1.29 लाख हेक्टेयर हो गया है। इस तरह सूरजमुखी का रकबा 0.59 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। प्रतिशत में यह वृद्धि 84.34 फीसदी रही है। हालांकि, कुल क्षेत्रफल के लिहाज से सूरजमुखी का रकबा अन्य प्रमुख तिलहन फसलों की तुलना में कम है।

Kharif Fasal Rakba 2026 ज्वार और बाजरा का रकबा बढ़ा

मोटे अनाज और श्री अन्न के क्षेत्र में भी इस साल बढ़ोतरी हुई है। कुल क्षेत्र पिछले साल के 184.63 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 185.79 लाख हेक्टेयर हो गया है। ज्वार का रकबा 12.61 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 13.79 लाख हेक्टेयर हो गया। इसमें 9.39 फीसदी की वृद्धि हुई है। वहीं, बाजरा का क्षेत्र 62.87 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 64.94 लाख हेक्टेयर हो गया है। बाजरा के रकबे में 3.29 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके विपरीत रागी का क्षेत्र 10.12 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.81 लाख हेक्टेयर रह गया है। Kharif Fasal Rakba 2026 में मोटे अनाज की यह मिश्रित तस्वीर सामने आई है।

कई राज्यों में बारिश की कमी बनी चिंता

खरीफ फसलों के रकबे के साथ मौसम की स्थिति भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। कई राज्यों में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात की खबरें सामने आई हैं। ऐसे क्षेत्रों में सिंचाई के पानी की समस्या किसानों की चिंता बढ़ा रही है।कर्नाटक में कई तहसीलों में सूखे की स्थिति की जानकारी सामने आई है। वहीं महाराष्ट्र में भी किसान सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। पानी की कमी का असर गन्ना, सोयाबीन, मक्का और दूसरी फसलों पर पड़ सकता है।

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है फसल रकबे का आंकड़ा?

किसी फसल के रकबे में बढ़ोतरी या कमी का असर आगे चलकर उत्पादन और कृषि बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि, केवल बुवाई क्षेत्र के आधार पर अंतिम उत्पादन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। मौसम, बारिश, सिंचाई, तापमान, कीट-रोग और प्रति हेक्टेयर उत्पादकता जैसे कई कारक फसल उत्पादन को प्रभावित करते हैं। इसलिए Kharif Fasal Rakba 2026 के साथ आने वाले समय में फसल की स्थिति और उत्पादन से जुड़े आंकड़ों पर भी नजर रखना जरूरी होगा

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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