भारत में El Niño Ka Monsoon Par Asar हमेशा चर्चा का विषय रहता है। जैसे ही अल नीनो की स्थिति बनने की खबर आती है, किसानों और आम लोगों के मन में कम बारिश और सूखे की चिंता बढ़ जाती है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि El Niño Ka Monsoon Par Asar हर बार एक जैसा नहीं होता। पिछले 70 वर्षों के रिकॉर्ड बताते हैं कि 1950 के बाद 16 बार El Niño की स्थिति बनी, लेकिन इनमें से केवल 7 बार ही देश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। यानी केवल El Niño के आधार पर कमजोर मॉनसून का अनुमान लगाना सही नहीं है।
El Niño Ka Monsoon Par Asar हर बार अलग क्यों होता है?
लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि El Niño Ka Monsoon Par Asar जरूर पड़ता है, लेकिन यह भारतीय मॉनसून को प्रभावित करने वाला अकेला कारण नहीं है। भारतीय मॉनसून कई वैश्विक और क्षेत्रीय जलवायु कारकों पर निर्भर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार इंडियन ओशन डायपोल (IOD), मैडेन-जूलियन ऑस्सिलेशन (MJO), समुद्र की सतह का तापमान, हवाओं का पैटर्न और महासागर-वायुमंडल की परिस्थितियां भी बारिश को प्रभावित करती हैं। यही वजह है कि कई बार El Niño बनने के बावजूद सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की जाती है।
1950 के बाद 16 El Niño घटनाएं, लेकिन सिर्फ 7 बार कम हुई बारिश
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1950 के बाद भारत में 16 बार El Niño की स्थिति बनी। इनमें से सिर्फ 7 बार ही सामान्य से कम मॉनसून वर्षा रिकॉर्ड की गई। इससे साफ होता है कि El Niño Ka Monsoon Par Asar हर वर्ष समान नहीं रहता और अन्य मौसमीय कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मौसम वैज्ञानिक भी मॉनसून का पूर्वानुमान तैयार करते समय केवल El Niño पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि कई अन्य जलवायु संकेतकों का विश्लेषण करते हैं।
सितंबर में ज्यादा दिखाई देता है El Niño Ka Monsoon Par Asar
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार पूरे मॉनसून सीजन की तुलना में सितंबर महीने में El Niño Ka Monsoon Par Asar अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून के अंतिम चरण में El Niño और बारिश के बीच मजबूत विपरीत संबंध देखने को मिलता है। इसलिए सितंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश की संभावना बढ़ जाती है।
2026 में सामान्य से कम बारिश का अनुमान
IMD ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए सामान्य से कम बारिश का अनुमान जारी किया है। 13 अप्रैल 2026 को जारी पहले पूर्वानुमान में देशभर में मौसमी वर्षा Long Period Average (LPA) का 92 प्रतिशत रहने का अनुमान था, जिसे बाद में दूसरे चरण के पूर्वानुमान में घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया। मौसम विभाग ने पहले ही संकेत दिया था कि इस वर्ष El Niño Ka Monsoon Par Asar देखने को मिल सकता है, ताकि किसान, जल संसाधन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां समय रहते तैयारी कर सकें।
फरवरी 2027 तक बना रह सकता है El Niño
भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) के अनुसार मई 2026 में सक्रिय हुआ El Niño जून 2026 से फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। इसके बने रहने की संभावना 70 से 90 प्रतिशत के बीच बताई गई है।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि El Niño Ka Monsoon Par Asar समुद्र के तापमान, हवाओं के रुख और अन्य जलवायु परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
कृषि और जल प्रबंधन एजेंसियां अलर्ट पर
सरकार ने बताया कि भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) कृषि और जल संसाधन विभागों के साथ मिलकर लगातार अध्ययन कर रहा है। इसका उद्देश्य El Niño Ka Monsoon Par Asar खेती, सिंचाई और जल संसाधनों पर कितना पड़ सकता है, इसका समय रहते आकलन करना है। IMD नियमित रूप से मौसमी, मासिक, जिला और ब्लॉक स्तर तक मौसम संबंधी पूर्वानुमान जारी करता है। कृषि मंत्रालय की Crop Weather Watch बैठकों में भी किसानों के हित में हर सप्ताह मौसम और वर्षा की जानकारी साझा की जाती है।
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मछली पालन और समुद्री गतिविधियों पर भी असर संभव
सरकार के अनुसार El Niño Ka Monsoon Par Asar केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। इसके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान बढ़ सकता है, जिससे समुद्री लू जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना रहती है। इसका असर मछली पालन, समुद्री जैव विविधता और फिशिंग गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल राज्यों के लिए कोई अलग जिला-स्तरीय जोखिम रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।
किसानों के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को केवल El Niño की खबरों से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्हें IMD के नियमित मौसम पूर्वानुमानों और कृषि सलाह का पालन करना चाहिए। आधुनिक मौसम मॉडल पहले की तुलना में अधिक सटीक जानकारी दे रहे हैं, जिससे फसल प्रबंधन और सिंचाई की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।कुल मिलाकर, El Niño Ka Monsoon Par Asar जरूर पड़ता है, लेकिन हर बार इसका परिणाम कमजोर मॉनसून नहीं होता। आने वाले महीनों में हिंद महासागर की स्थिति, हवाओं का पैटर्न और अन्य जलवायु कारक तय करेंगे कि इस बार भारतीय मॉनसून पर वास्तविक प्रभाव कितना रहेगा।
