Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना विकासखंड के ग्राम बेलई के किसान विवेक दुबे ने खेती के साथ अतिरिक्त आय का नया रास्ता तैयार किया है। उन्होंने करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद निर्माण इकाई विकसित करने की शुरुआत की है। करीब 40 से 50 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 100 से अधिक वर्मी कम्पोस्ट बेड तैयार किए गए हैं। यूनिट की पूरी क्षमता से संचालन के बाद रोजाना करीब 1 टन जैविक खाद उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
इसी वजह से Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP किसानों के लिए खास बन रही है। इस पहल में खेती के साथ जैविक खाद उत्पादन को भी एक संभावित व्यवसाय और अतिरिक्त आय के साधन के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP
डेढ़ एकड़ में शुरू किया जैविक खाद का काम
विवेक दुबे ने वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन शुरू करने से पहले इस क्षेत्र की तकनीक को समझने के लिए भोपाल में विशेष प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने फार्म पर व्यवस्थित तरीके से जैविक खाद निर्माण इकाई तैयार करने का काम शुरू किया। करीब डेढ़ एकड़ क्षेत्र में तैयार की जा रही इस यूनिट में 4×50 फीट और 4×36 फीट आकार के 100 से अधिक वर्मी कम्पोस्ट बेड बनाए गए हैं। Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP
इन बेड में जैविक सामग्री को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने की योजना है। परियोजना की क्षमता बढ़ने के साथ उत्पादन को लगातार बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। यही वजह है कि इस यूनिट को केवल खेती के लिए खाद तैयार करने वाली व्यवस्था के बजाय एक व्यवस्थित कृषि व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा रहा है।
100 से ज्यादा बेड, रोजाना 1 टन उत्पादन का लक्ष्य
विवेक दुबे के अनुसार प्रत्येक बेड से करीब 1 से 1.5 टन तक जैविक खाद तैयार होने की संभावना है। परियोजना पूरी क्षमता से संचालित होने के बाद रोजाना करीब 1 टन जैविक खाद उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इतने बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए बेड की संख्या के साथ कच्चे जैविक पदार्थ की उपलब्धता, नमी प्रबंधन, तापमान और खाद की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए तकनीकी प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का सहारा लिया जा रहा है। Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP का महत्वपूर्ण पहलू यही है कि इसमें किसान ने उत्पादन के साथ गुणवत्ता और बाजार की जरूरत को भी ध्यान में रखा है। Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP
स्थानीय किसानों को मिलेगी जैविक खाद
विवेक दुबे की योजना तैयार जैविक खाद को स्थानीय बाजार से जोड़ने की है। इससे बीना और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को स्थानीय स्तर पर जैविक खाद उपलब्ध हो सकती है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन और बिक्री की व्यवस्था बनने से किसानों को बाहर से खाद मंगाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे परिवहन लागत और खाद की उपलब्धता से जुड़ी परेशानियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। अगर उत्पादन और बाजार के बीच बेहतर व्यवस्था तैयार होती है, तो यह मॉडल आगे चलकर अन्य किसानों के लिए भी कृषि आधारित व्यवसाय शुरू करने का आधार बन सकता है। Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP
वर्मी कम्पोस्ट को बनाया आय का जरिया
विवेक दुबे ने वर्मी कम्पोस्ट को केवल खेत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के तौर पर नहीं देखा है। उनका उद्देश्य इसे कमाई के एक अतिरिक्त स्रोत के रूप में विकसित करना है। किसान आमतौर पर फसल उत्पादन पर निर्भर रहते हैं, लेकिन कृषि से जुड़े मूल्यवर्धित व्यवसायों के जरिए आय के नए विकल्प तैयार किए जा सकते हैं। जैविक खाद उत्पादन भी ऐसा ही एक क्षेत्र है, जिसमें स्थानीय मांग के आधार पर व्यवसाय विकसित किया जा सकता है। इसी सोच के कारण Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP कृषि क्षेत्र में मूल्यवर्धन और अतिरिक्त आय के मॉडल को सामने लाती है। Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP
जैविक डीएपी बनाने की भी तैयारी
Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के साथ विवेक दुबे भविष्य में जैविक डीएपी तैयार करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। इसमें करीब 10 प्रतिशत फास्फोरस उपलब्धता का लक्ष्य रखा गया है। अगर यह प्रयास सफल होता है, तो किसानों को वर्मी कम्पोस्ट के साथ जैव उर्वरक का एक स्थानीय विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है। इससे जैविक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी भी नए कृषि इनपुट के इस्तेमाल से पहले उसकी गुणवत्ता, मानकों और उपयोग की उपयुक्तता को सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
40 से 50 लाख रुपये का बड़ा निवेश
वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद उत्पादन की पूरी परियोजना पर करीब 40 से 50 लाख रुपये का निवेश किया जा रहा है। इतनी बड़ी परियोजना को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए विवेक ने प्रशिक्षण के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी लिया है। परियोजना में बेड निर्माण, यूनिट की व्यवस्था, कच्चे माल की उपलब्धता और उत्पादन प्रक्रिया जैसे कई पहलुओं पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे नियमित रूप से जैविक खाद का उत्पादन किया जा सके। Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP
वैज्ञानिकों से मिल रहा तकनीकी मार्गदर्शन
यूनिट के संचालन और उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए विवेक दुबे को कृषि विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी मिल रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र, सागर के वैज्ञानिक आशीष त्रिपाठी और जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के राकेश साहू से उन्हें तकनीकी सलाह मिल रही है।\ विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से वर्मी कम्पोस्ट की उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता और यूनिट के प्रबंधन को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल रही है। बड़े स्तर पर जैविक खाद उत्पादन के लिए तकनीकी जानकारी का होना महत्वपूर्ण माना जाता है।
147 करोड़ से ज्यादा टीकों से मुंहपका-खुरपका बीमारी पर लगा ब्रेक
दूसरे किसानों के लिए बन सकता है बिजनेस मॉडल
विवेक दुबे की पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने खेती के साथ एक वैकल्पिक कृषि व्यवसाय को जोड़ने की कोशिश की है। अगर यह परियोजना निर्धारित क्षमता के अनुसार सफलतापूर्वक संचालित होती है, तो बीना क्षेत्र में यह जैविक खाद उत्पादन और अतिरिक्त कृषि आय का मॉडल बन सकती है। दूसरे किसान भी अपने क्षेत्र में उपलब्ध जैविक संसाधनों, स्थानीय मांग और बाजार को ध्यान में रखते हुए वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन जैसे व्यवसाय पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, ऐसे व्यवसाय को शुरू करने से पहले प्रशिक्षण, बाजार, कच्चे माल और उत्पादन लागत का सही आकलन करना जरूरी है। Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP
खेती से आगे बढ़कर कृषि व्यवसाय की ओर
आज के समय में किसान केवल फसल उत्पादन तक सीमित न रहकर कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी कमाई के अवसर तलाश रहे हैं। वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद, जैव उर्वरक और कृषि प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र किसानों को मूल्यवर्धन का अवसर देते हैं। विवेक दुबे की करीब डेढ़ एकड़ में शुरू की गई परियोजना इसी दिशा में एक प्रयास है।
Vermicompost Success Story of Vivek Dube in MP यह दिखाती है कि अगर खेती के साथ उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार को जोड़ा जाए, तो कृषि से जुड़े नए व्यवसाय खड़े किए जा सकते हैं। 100 से अधिक बेड, रोजाना 1 टन उत्पादन का लक्ष्य और भविष्य में जैविक डीएपी तैयार करने की योजना इस परियोजना को एक व्यापक कृषि व्यवसाय मॉडल का रूप दे रही है।
