देश में पशुओं को मुंहपका-खुरपका यानी FMD बीमारी से बचाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 अभियान के तहत अब तक 147.16 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान से करीब 8.04 करोड़ किसानों को लाभ मिला है। मुंहपका-खुरपका बीमारी पशुओं के स्वास्थ्य और पशुपालकों की आय को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में नियमित टीकाकरण, बीमारी की निगरानी और समय पर उपचार को पशु स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
147 करोड़ से ज्यादा टीके लगाए गए
राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी। इसका उद्देश्य पशुओं में संक्रामक बीमारियों को नियंत्रित करने के साथ पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक FMD के खिलाफ 147.16 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं। Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 इसी व्यापक टीकाकरण व्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस अभियान से लगभग 8.04 करोड़ किसानों को फायदा मिला है। लगातार टीकाकरण और बीमारी की निगरानी के कारण FMD के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है।
FMD बीमारी के मामलों में आई बड़ी गिरावट
टीकाकरण अभियान का असर मुंहपका-खुरपका बीमारी के मामलों पर भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2019 में FMD के 132 मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2025 में इनकी संख्या घटकर 40 रह गई। इसी तरह ब्रुसेलोसिस के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2019 में ब्रुसेलोसिस के 22 मामले सामने आए थे, जो 2025 में घटकर 15 रह गए। विशेषज्ञों के अनुसार, पशुओं में बीमारी की रोकथाम के लिए समय पर वैक्सीनेशन बेहद जरूरी है। Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 के जरिए पशुपालकों तक टीकाकरण सुविधा पहुंचाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
पशुओं का स्वास्थ्य सुधरा तो बढ़ा दूध उत्पादन
पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार का असर देश के दूध उत्पादन पर भी देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में दूध उत्पादन वर्ष 2014-15 में 146.31 मिलियन टन था। वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 247.87 मिलियन टन हो गया। यानी करीब एक दशक में देश के दूध उत्पादन में 69.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि में औसत पशु उत्पादकता में भी 36.63 प्रतिशत का सुधार हुआ है। पशुओं को बीमारी से सुरक्षित रखने और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 जैसे अभियान अहम भूमिका निभा सकते हैं।
2030 तक दूध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार ने वर्ष 2030 तक औसत दूध उत्पादन को 3,000 किलोग्राम प्रति पशु प्रति वर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण, प्रजनन और नियमित टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। बीमारी से प्रभावित पशुओं की उत्पादकता कम हो सकती है। इसलिए पशुपालकों के लिए Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 को लेकर जागरूक रहना जरूरी है और निर्धारित समय पर पशुओं का टीकाकरण करवाना चाहिए।
4,019 मोबाइल वेटरनरी यूनिट कर रही काम
पशुपालकों को इलाज की सुविधा घर के नजदीक उपलब्ध कराने के लिए देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4,019 मोबाइल वेटरनरी यूनिट काम कर रही हैं। पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 के माध्यम से इन सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां पशुपालकों के दरवाजे तक पहुंचकर पशुओं की जांच और उपचार करती हैं। अब तक इन मोबाइल सेवाओं के माध्यम से करीब 136 लाख किसानों के लगभग 276 लाख पशुओं का इलाज किया जा चुका है। Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 के साथ ऐसी मोबाइल स्वास्थ्य सेवाएं पशुपालकों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही हैं।
भारत पशुधन पोर्टल पर 39 करोड़ से ज्यादा पशु पंजीकृत
पशुधन की डिजिटल पहचान और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को व्यवस्थित करने के लिए भारत पशुधन पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक पोर्टल पर 39 करोड़ से अधिक पशुओं का पंजीकरण हो चुका है। प्रत्येक पशु को 12 अंकों की विशिष्ट पहचान दी जा रही है। इससे पशुओं की पहचान, टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को डिजिटल तरीके से ट्रैक करने में मदद मिलती है। डिजिटल रिकॉर्ड के कारण Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 जैसे टीकाकरण अभियानों की निगरानी और योजना बनाने में भी मदद मिल सकती है।
पशु स्वास्थ्य के लिए 2,010 करोड़ रुपये का बजट
पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने 2,010 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। वर्ष 2024 से ऊन उत्पादन वाले भेड़-बकरियों और प्रवासी पशुपालकों के पशुओं को भी टीकाकरण अभियान के दायरे में शामिल किया गया है। इससे पशुधन के बड़े हिस्से को बीमारी से बचाने की दिशा में प्रयासों को मजबूती मिली है। Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 अभियान के साथ सरकार पशु स्वास्थ्य सेवाओं को गांव और पशुपालकों तक पहुंचाने पर भी ध्यान दे रही है।
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जूनोटिक बीमारियों की निगरानी पर भी जोर
पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों को जूनोटिक रोग कहा जाता है। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए वन हेल्थ मिशन और पेंडेमिक फंड प्रोजेक्ट के माध्यम से निगरानी को मजबूत किया जा रहा है। पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को एक साथ ध्यान में रखकर बीमारी की रोकथाम की रणनीति तैयार की जा रही है। ऐसे में Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 केवल पशुओं की बीमारी रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक पशु स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा है।
पशुपालकों के लिए क्यों जरूरी है FMD टीकाकरण?
मुंहपका-खुरपका बीमारी पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता पर असर डाल सकती है। बीमारी की रोकथाम के लिए नियमित टीकाकरण सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। पशुपालकों को अपने क्षेत्र में चल रहे टीकाकरण अभियान की जानकारी रखनी चाहिए और पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुसार समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए। Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 से संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों और स्थानीय पशुपालन विभाग की जानकारी पर भी ध्यान देना चाहिए।
147 करोड़ टीकों से पशु स्वास्थ्य अभियान को मजबूती
देश में 147.16 करोड़ से अधिक FMD टीके लगाए जाना पशु स्वास्थ्य क्षेत्र में चल रहे बड़े टीकाकरण अभियान को दर्शाता है। FMD के मामलों में आई कमी भी बीमारी की रोकथाम के प्रयासों के सकारात्मक असर की ओर संकेत करती है। आने वाले समय में टीकाकरण, डिजिटल पशु पहचान, बीमारी की निगरानी और मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं को एक साथ मजबूत करने पर जोर रहेगा। Pashuon ka FMD Tikakaran 2026 इसी दिशा में पशुपालकों और पशुधन को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देने की कोशिश है।
