Pashupalan Yojana 2026: पशुपालकों को सुअर पालन, डेयरी और पशु स्वास्थ्य में मिलेगा फायदा

Pashupalan Yojana 2026: पशुपालकों को सुअर पालन, डेयरी और पशु स्वास्थ्य में मिलेगा फायदा

Pashupalan Yojana 2026: देश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार पशुपालन क्षेत्र को लगातार मजबूत कर रही है। Pashupalan Yojana 2026 के तहत पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन, बेहतर नस्ल, वैज्ञानिक प्रजनन, गुणवत्तापूर्ण चारा, पशु स्वास्थ्य और पशुधन आधारित कारोबार को बढ़ावा देने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। सरकार का उद्देश्य पशुपालन को किसानों के लिए आय का मजबूत और टिकाऊ जरिया बनाना है।

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM), पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF), राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) जैसी योजनाओं के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र को सहायता दे रही है।

Pashupalan Yojana 2026 के तहत किन क्षेत्रों पर है सरकार का फोकस?

Pashupalan Yojana 2026 के तहत सरकार का फोकस केवल दूध उत्पादन बढ़ाने पर नहीं है। पशुओं की नस्ल सुधार, वैज्ञानिक प्रजनन, आधुनिक पशुपालन फार्म, पशु आहार, चारा उत्पादन, पशु रोग नियंत्रण और ग्रामीण स्तर पर पशुधन आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों और उद्यमियों को आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने तथा पशुपालन से जुड़े कारोबार को आधुनिक बनाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। Pashupalan Yojana 2026

सुअर पालन को आधुनिक बनाने के लिए मिल रही आर्थिक मदद

सरकार ने असम में सुअर पालन उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन और पशुपालन अवसंरचना विकास कोष के तहत आधुनिक सुअर पालन फार्म और सुअर मांस प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय पशुधन मिशन के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत 23 सुअर पालन फार्म सहित 50 पशुधन परियोजनाओं के लिए 4.98 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की गई है। Pashupalan Yojana 2026

वहीं, AHIDF के तहत एक सुअर पालन फार्म सहित आठ परियोजनाओं को 1.44 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी दी गई है। इससे पशुपालकों को आधुनिक तकनीक के साथ सुअर पालन व्यवसाय शुरू करने और उसका विस्तार करने में मदद मिल सकती है।

पशुपालन क्षेत्र में करोड़ों रुपये का निवेश

Pashupalan Yojana 2026 के तहत पशुपालन क्षेत्र से जुड़े अलग-अलग कामों के लिए सरकार की ओर से बड़ी राशि जारी की जा रही है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 41.67 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसी अवधि में पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 124.29 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत विभिन्न गतिविधियों के लिए 7.74 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इस तरह के निवेश से पशुपालन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी। Pashupalan Yojana 2026

सुअरों की नस्ल सुधार पर भी सरकार का जोर

असम में सुअर सीमेन संग्रहण एवं प्रसंस्करण प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे कृत्रिम गर्भाधान और सुअरों के आनुवंशिक सुधार को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इसके अलावा वैज्ञानिक सुअर पालन को बढ़ावा देने के लिए ‘सुअर पालन में सुचारू पशुपालन पद्धतियां’ नामक पुस्तिका भी प्रकाशित की गई है। इससे पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से सुअरों के पालन-पोषण और प्रबंधन की जानकारी मिल सकेगी। Pashupalan Yojana 2026

पशु रोगों से बचाव के लिए मुफ्त टीकाकरण

Pashupalan Yojana 2026 के तहत पशु स्वास्थ्य को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। असम में क्लासिकल स्वाइन फीवर से बचाव के लिए 9,92,863 टीके मुफ्त लगाए गए हैं। पशु रोगों की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भी बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य पशुओं में होने वाली गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करके पशुधन की उत्पादकता और पशुपालकों की आय को सुरक्षित रखना है।

डेयरी क्षेत्र में बढ़ी दूध उत्पादन क्षमता

देश के डेयरी क्षेत्र ने पिछले एक दशक में काफी प्रगति की है। सरकार के अनुसार वर्ष 2014-15 में गायों की औसत दूध उत्पादकता 1,648 किलोग्राम प्रति पशु प्रति वर्ष थी, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 2,251 किलोग्राम हो गई। इसी अवधि में देश का कुल दूध उत्पादन 146 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 248 मिलियन मीट्रिक टन हो गया। इस तरह देश में दूध उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। डेयरी क्षेत्र में बढ़ती उत्पादकता को देखते हुए Pashupalan Yojana 2026 के तहत नस्ल सुधार, वैज्ञानिक पशुपालन और पशु पोषण जैसे क्षेत्रों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराने की तैयारी

पशुपालन में पशुओं को पर्याप्त और पौष्टिक चारा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत गुणवत्तापूर्ण चारा बीज उत्पादन, घास, साइलेज और संपूर्ण मिश्रित राशन यानी TMR से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ावा दे रही है। पिछले पांच वर्षों में चारा क्षेत्र के लिए 1,152.40 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इससे करीब 1.6 लाख टन गुणवत्तापूर्ण चारा बीज का उत्पादन हुआ है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत 204 चारा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। वहीं AHIDF के माध्यम से 3,602.47 करोड़ रुपये के निवेश से 174 पशु आहार संयंत्रों को सहायता प्रदान की गई है।

किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह

Pashupalan Yojana 2026 के तहत पशुपालकों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने देशभर में 100 चारा-समृद्ध किसान उत्पादक संगठन यानी FPO स्थापित किए हैं। आईसीएआर-भारतीय घासभूमि एवं चारा अनुसंधान संस्थान ने उच्च उपज देने वाली चारा किस्में विकसित करने के साथ राज्यवार चारा विकास योजनाएं तैयार की हैं। संस्थान की ओर से 10 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।

भारत पशुधन योजना के अंतर्गत 1962 किसान ऐप के माध्यम से डिजिटल परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे किसान वैज्ञानिक राशन संतुलन और बेहतर पशुपालन तकनीकों को अपनाकर पशुओं की उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।

गर्मी और लू से पशुओं की सुरक्षा पर भी ध्यान

बढ़ते तापमान को देखते हुए सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लू प्रबंधन दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही अधिक तापमान सहन करने वाली स्वदेशी मवेशी नस्लों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे गर्मी के मौसम में पशुओं की सेहत और उत्पादकता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। पशुपालकों के लिए मौसम के अनुसार पशु प्रबंधन की जानकारी भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।

FMD और ब्रुसेलोसिस के खिलाफ 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता

राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत खुरपका-मुंहपका रोग यानी FMD और ब्रुसेलोसिस के खिलाफ टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता उपलब्ध करा रही है। पशुओं को समय पर टीका लगने से गंभीर रोगों की रोकथाम में मदद मिलती है। इससे पशुधन की उत्पादकता बनाए रखने के साथ पशुपालकों को होने वाले आर्थिक नुकसान को भी कम किया जा सकता है।

पशुपालकों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर

कुल मिलाकर Pashupalan Yojana 2026 के तहत पशुपालन क्षेत्र को कई स्तरों पर मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सुअर पालन, डेयरी, पशु आहार, चारा उत्पादन, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, पशु स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में सरकारी सहायता बढ़ाई जा रही है। सरकार की इन पहलों से पशुपालकों को आधुनिक तकनीक अपनाने, पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और पशुपालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ने के साथ किसानों की आय को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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