Rajasthan Gokasht Yojana 2026: राजस्थान में पंजीकृत गौशालाओं की आय बढ़ाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए Rajasthan Gokasht Yojana 2026 शुरू की गई है। इस योजना के तहत पात्र गौशालाओं को गो-काष्ठ मशीन खरीदने के लिए सरकार की ओर से 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। बाकी 20 प्रतिशत राशि संबंधित गौशाला को स्वयं वहन करनी होगी। योजना का उद्देश्य गोवंश से प्राप्त सामग्री का उपयोग करके गो-काष्ठ तैयार करना और उसकी बिक्री से गौशालाओं के लिए आय का नया स्रोत तैयार करना है।
Rajasthan Gokasht Yojana 2026 में मिलेगा 80% सरकारी अनुदान
Rajasthan Gokasht Yojana 2026 के तहत गो-काष्ठ मशीन की कुल लागत का 80 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार की ओर से अनुदान के रूप में दिया जाएगा। शेष 20 प्रतिशत राशि संबंधित गौशाला को स्वयं जमा करनी होगी। मशीनों की खरीद गोपालन निदेशालय की ओर से की जाएगी। मशीन मिलने के बाद गौशालाएं गो-काष्ठ तैयार करके उसकी बिक्री कर अपनी आय बढ़ा सकेंगी।
Rajasthan Gokasht Yojana 2026 में 10 दिन में करानी होगी जियो-टैगिंग
योजना के तहत अनुदान पर मिलने वाली गो-काष्ठ मशीन की जियो-टैगिंग अनिवार्य होगी। मशीन प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर संबंधित पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक के माध्यम से इसकी जियो-टैगिंग करानी होगी। इससे विभाग के पास मशीन की वास्तविक लोकेशन और उसके इस्तेमाल की जानकारी उपलब्ध रहेगी। साथ ही मशीन के गलत इस्तेमाल पर भी निगरानी रखी जा सकेगी।
Rajasthan Gokasht Yojana 2026 में 10 साल तक मशीन बेचने पर रोक
Rajasthan Gokasht Yojana 2026 के तहत अनुदान पर प्राप्त गो-काष्ठ मशीन को 10 साल की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले बेचा नहीं जा सकेगा। इसके अलावा मशीन को किसी अन्य व्यक्ति, संस्था या गौशाला को हस्तांतरित करना भी प्रतिबंधित रहेगा। सरकार ने यह नियम मशीन के दुरुपयोग और सरकारी अनुदान के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए लागू किया है।
Rajasthan Gokasht Yojana 2026 में नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
यदि कोई लाभार्थी गौशाला योजना के नियमों का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। निर्धारित अवधि से पहले मशीन बेचने या हस्तांतरित करने की स्थिति में सरकारी अनुदान बंद किया जा सकता है। इसके साथ ही गंभीर नियम उल्लंघन होने पर संबंधित गौशाला का पंजीकरण भी निरस्त किया जा सकता है।
Rajasthan Gokasht Yojana 2026 में हर महीने होगी निगरानी
योजना के तहत गो-काष्ठ मशीन के संचालन और उत्पादन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। जिला स्तरीय गोपालन समिति को हर महीने मशीन के संचालन का पर्यवेक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं लाभार्थी गौशालाओं को प्रत्येक तीन महीने में गो-काष्ठ के उत्पादन, बिक्री और उससे प्राप्त आय का पूरा विवरण विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
गो-काष्ठ की बिक्री से बढ़ेगी गौशालाओं की आय
योजना के तहत तैयार गो-काष्ठ की अनुमानित दर 8 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है। गौशालाएं तैयार गो-काष्ठ को ईंधन के रूप में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगी। इससे गौशालाओं को अपने दैनिक संचालन के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है और वे धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
गो-काष्ठ की बिक्री मोक्ष धाम और होटल-ढाबों में होगी
गो-काष्ठ का इस्तेमाल पारंपरिक लकड़ी के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है। गौशालाएं तैयार गो-काष्ठ को मोक्ष धाम, फैक्ट्रियों के बॉयलर, होटल-ढाबों और हवन-पूजन के लिए ईंधन के रूप में बेच सकती हैं। इससे प्राप्त पूरी आय संबंधित गौशाला के खाते में जाएगी और गौशाला अपनी जरूरतों के लिए इस आय का उपयोग कर सकेगी।
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Rajasthan Gokasht Yojana 2026 के लिए कौन पात्र होगा?
Rajasthan Gokasht Yojana 2026 का लाभ केवल राजस्थान में पंजीकृत और कम से कम तीन साल से नियमित रूप से संचालित हो रही गौशालाओं को मिलेगा। योजना के लिए गौशाला में 200 से अधिक गोवंश होना जरूरी है। इसके साथ ही कम से कम 5 बीघा जमीन और थ्री-फेज बिजली कनेक्शन भी होना चाहिए। जिन गौशालाओं के खिलाफ कोई कोर्ट केस लंबित है, वे योजना के लिए पात्र नहीं होंगी। इसके अलावा जिन गौशालाओं ने वर्ष 2024-25 में इस योजना का लाभ लिया है, वे दोबारा आवेदन नहीं कर सकेंगी।
Rajasthan Gokasht Yojana 2026 में अधिक आवेदन आने पर किसे मिलेगी प्राथमिकता?
यदि योजना के तहत 100 से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं तो अधिक गोवंश वाली संस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे उन गौशालाओं के चयन की संभावना अधिक होगी जहां गोवंश की संख्या ज्यादा है और गो-काष्ठ उत्पादन की क्षमता भी अधिक हो सकती है। Rajasthan Gokasht Yojana 2026 के जरिए सरकार का उद्देश्य गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनकी आय के नए साधन विकसित करना है। गो-काष्ठ मशीन के माध्यम से गोवंश से प्राप्त सामग्री का उपयोग कर उत्पाद तैयार किया जाएगा, जिसकी बिक्री से गौशालाएं अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगी।
