Pashuon Ka Bima Kaise Karaye: पशुपालन करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है। पशुओं की अचानक मौत से होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान से बचने के लिए सरकार की ओर से पशुधन बीमा योजना के तहत बीमा की सुविधा दी जा रही है। इस योजना की खास बात यह है कि पशुपालक को कुल प्रीमियम का सिर्फ 15 प्रतिशत ही देना होगा, जबकि बाकी 85 प्रतिशत प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगी। ऐसे में Pashuon Ka Bima Kaise Karaye, यह जानना हर पशुपालक के लिए जरूरी है।
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में इस योजना के तहत 20 अगस्त से पशुओं का बीमाकरण शुरू हो चुका है। जिले में सितंबर तक 50,625 पशुओं का बीमा कराने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के जरिए पशुपालकों को पशु की मृत्यु के बाद होने वाले आर्थिक नुकसान से राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।
Pashuon Ka Bima Kaise Karaye और कितना देना होगा प्रीमियम?
पशुओं का बीमा कराने के लिए पशुपालक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने पात्र पशु का बीमा कराना होगा। योजना के तहत कुल प्रीमियम का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा पशुपालक को देना होगा। वहीं 51 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 34 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार की ओर से दिया जाएगा।
इस तरह पशुपालक को बीमा के लिए पूरी प्रीमियम राशि नहीं चुकानी होगी। सरकार की ओर से प्रीमियम का बड़ा हिस्सा वहन किए जाने से छोटे और सीमांत किसानों के लिए पशुओं का बीमा कराना आसान हो सकता है। बीमित पशु की मृत्यु होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बीमा दावा किया जा सकता है। आवश्यक जांच और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पात्र लाभार्थी को दावा राशि उसके बैंक खाते में भेजी जा सकती है। Pashuon Ka Bima Kaise Karaye
Pashuon Ka Bima Kaise Karaye, कौन-कौन से पशु होंगे कवर?
इस योजना में कई प्रकार के पशुओं का बीमा कराया जा सकता है। इसके तहत दुधारू गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूकर, बैल, भैसा और भारवाहक पशु शामिल हैं। योजना का लाभ अलग-अलग प्रकार के पशुपालन से जुड़े किसान उठा सकते हैं। खासतौर पर जिन परिवारों की आमदनी दूध उत्पादन, बकरी पालन, भेड़ पालन या अन्य पशुपालन गतिविधियों पर निर्भर है, उनके लिए पशु बीमा आर्थिक जोखिम कम करने का एक माध्यम हो सकता है।
एक परिवार अधिकतम 10 बड़े पशु इकाई और योजना के नियमों के अनुसार छोटे पशुओं की निर्धारित संख्या का बीमा करा सकता है। बीमा की अवधि अधिकतम एक वर्ष तक हो सकती है। योजना में स्वदेशी नस्ल के पशुओं को प्राथमिकता देने का प्रावधान है। इसके साथ ही भूमिहीन, सीमांत और लघु किसान, बीपीएल परिवार, एससी-एसटी वर्ग तथा महिला पशुपालकों को प्राथमिकता दी जाएगी। Pashuon Ka Bima Kaise Karaye
Pashuon Ka Bima Kaise Karaye, टैगिंग और फोटो क्यों जरूरी?
पशु का बीमा कराने के लिए उसकी टैगिंग जरूरी होगी। पशु की पहचान सुनिश्चित करने के लिए टैग लगाया जाएगा और बीमा प्रक्रिया के दौरान पशुपालक तथा टैग लगे पशु का स्पष्ट फोटो लिया जाएगा। पशु का मूल्य निर्धारित करने के लिए निर्धारित स्कोर कार्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी आधार पर पशु की बीमा राशि तय करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसलिए पशुपालक को बीमा कराते समय पशु की सही पहचान और जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इस योजना के तहत बीमा प्रीमियम पर जीएसटी से छूट का भी प्रावधान है। इससे पशुपालक को प्रीमियम के अलावा अतिरिक्त जीएसटी का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
पशु की मौत होने पर तुरंत देनी होगी सूचना
अगर बीमित पशु की मृत्यु हो जाती है, तो पशुपालक को इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारी या बीमा कंपनी के प्रतिनिधि को देनी होगी। इसके लिए पशु चिकित्साधिकारी, पैरावेट, पशुसखी, प्वाइंट ऑफ सेल या बीमा कंपनी के प्रतिनिधि से संपर्क किया जा सकता है। पशु की मौत के बाद समय पर सूचना देना जरूरी है, क्योंकि बीमा दावा प्रक्रिया में पशु की मृत्यु से जुड़े तथ्यों की जांच की जाती है। इसके बाद जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने पर दावा आगे बढ़ाया जाता है। Pashuon Ka Bima Kaise Karaye
मौत के बाद 24 घंटे तक सुरक्षित रखना होगा शव
बीमा दावा प्राप्त करने के लिए पशु की मृत्यु के बाद भी कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होगा। विभाग के अनुसार, पशु की मौत के बाद उसके शव को अधिकतम 24 घंटे तक सुरक्षित रखना होगा, ताकि संबंधित अधिकारी या बीमा कंपनी के प्रतिनिधि आवश्यक निरीक्षण कर सकें। इसलिए पशु की मृत्यु होने के तुरंत बाद पशुपालक को शव को हटाने या नष्ट करने के बजाय संबंधित अधिकारी को सूचना देनी चाहिए। निरीक्षण और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है। Pashuon Ka Bima Kaise Karaye
पशुधन बीमा योजना में किन पशुपालकों को प्राथमिकता?
योजना में स्वदेशी पशुओं के बीमाकरण को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा भूमिहीन, सीमांत और लघु किसानों के साथ बीपीएल परिवारों, एससी-एसटी वर्ग तथा महिला पशुपालकों को भी प्राथमिकता देने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य ऐसे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जिनके लिए पशुधन परिवार की आय का महत्वपूर्ण साधन है। किसी पशु की अचानक मृत्यु होने पर परिवार की आमदनी प्रभावित हो सकती है। बीमा इस तरह के आर्थिक जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। Pashuon Ka Bima Kaise Karaye
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एटा में 50,625 पशुओं के बीमा का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में योजना के तहत बड़े स्तर पर पशुओं का बीमा कराने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में 20 अगस्त से बीमाकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सितंबर तक 50,625 पशुओं का बीमा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पशुपालन विभाग की ओर से पशुपालकों से अधिक से अधिक संख्या में अपने पात्र पशुओं का बीमा कराने की अपील की गई है। इससे पशुपालकों को भविष्य में पशु की मृत्यु से होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा मिल सकती है। Pashuon Ka Bima Kaise Karaye
पशुओं का बीमा कराना क्यों है जरूरी?
किसानों और पशुपालकों के लिए पशु आय का महत्वपूर्ण साधन होते हैं। गाय और भैंस से दूध की बिक्री के जरिए नियमित आमदनी होती है, जबकि बकरी, भेड़ और सूकर पालन भी ग्रामीण परिवारों के लिए कमाई का जरिया है। ऐसे में किसी पशु की अचानक मृत्यु होने पर पशुपालक को एक साथ बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यदि पशु का बीमा कराया गया है, तो नियमों के अनुसार दावा राशि प्राप्त कर आर्थिक नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। सरकार की ओर से प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा वहन किए जाने के कारण पात्र पशुपालकों के लिए यह योजना काफी उपयोगी हो सकती है। हालांकि बीमा कराने से पहले अपने जिले में लागू नियम, पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी संबंधित पशुपालन विभाग या अधिकृत प्रतिनिधि से जरूर लेनी चाहिए।
