Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein: बदलती जलवायु, पानी की कमी और खेती की बढ़ती लागत के बीच किसानों के लिए नई कृषि तकनीकें महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। इसी दिशा में जीनोम एडिटिंग तकनीक कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। भारत में Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein जल्द किसानों तक पहुंच सकती हैं। इन किस्मों को कम पानी में बेहतर प्रदर्शन, खारेपन को सहन करने और ज्यादा पैदावार देने की क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है।
धान भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में शामिल है और बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती करते हैं। हालांकि धान की खेती में पानी की खपत अधिक होती है। ऐसे में ऐसी किस्मों की जरूरत बढ़ रही है, जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकें। जीनोम एडिटिंग इसी चुनौती को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीक मानी जा रही है।
जीनोम एडिटिंग से कम समय में तैयार होंगी नई धान की किस्में
जीनोम एडिटिंग एक ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए पौधे के अपने जीन में लक्षित बदलाव किया जाता है। पारंपरिक जीएम तकनीक से अलग इसमें पौधे के जीन में विशेष परिवर्तन करके उसके वांछित गुणों को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक की मदद से फसल की पैदावार, पानी के इस्तेमाल की क्षमता और प्रतिकूल मौसम में पौधे की सहनशीलता जैसे गुणों पर काम किया जा सकता है। यही वजह है कि Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein को भविष्य की जलवायु-अनुकूल खेती के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धान के साथ मक्का और सोयाबीन पर भी रिसर्च
जीनोम एडिटिंग का इस्तेमाल सिर्फ धान तक सीमित नहीं है। कृषि क्षेत्र में मक्का, कपास, सोयाबीन, गेहूं और सब्जियों जैसी फसलों पर भी इस तकनीक के जरिए शोध किया जा रहा है। बायर क्रॉप साइंस समेत कई संस्थान जीनोम एडिटिंग के जरिए ऐसी फसल किस्में विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जो बदलते मौसम के बीच बेहतर उत्पादन दे सकें। आने वाले वर्षों में जीन एडिटिंग से विकसित फसलों का दायरा और बढ़ने की उम्मीद है। Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein
भारत में धान की दो जीन एडिटिंग किस्में चर्चा में
भारत में जीनोम एडिटिंग तकनीक से तैयार धान की दो किस्मों को लेकर विशेष उम्मीद जताई जा रही है। राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के पूर्व निदेशक के.सी. बंसल के अनुसार, डीआरआर राइस 100 (कमला) और पूसा डीएसटी राइस 1 किसानों तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इन दोनों किस्मों को पानी की बचत और खारेपन जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन के उद्देश्य से विकसित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इनसे सामान्य परिस्थितियों में लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक ज्यादा पैदावार मिलने की संभावना बताई गई है। हालांकि वास्तविक उत्पादन खेत की मिट्टी, मौसम, सिंचाई और कृषि प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
कम पानी में धान की खेती को मिल सकता है बढ़ावा
धान की खेती में सिंचाई के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर में गिरावट और बारिश के बदलते पैटर्न के कारण किसानों के सामने पानी की समस्या बढ़ रही है।ऐसे में Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein
अगर ये किस्में कम पानी में बेहतर उत्पादन देने में सफल रहती हैं, तो इससे सिंचाई लागत कम करने और पानी की बचत करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में मिट्टी का खारापन फसल उत्पादन को प्रभावित करता है, वहां भी इन किस्मों की उपयोगिता बढ़ सकती है। जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी फसलों की मांग आने वाले समय में और बढ़ने की संभावना है।
40 से ज्यादा फसलों पर जीनोम एडिटिंग का शोध
भारत में जीनोम एडिटिंग का दायरा लगातार बढ़ रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य संस्थानों में करीब 40 कृषि और बागवानी फसलों पर जीनोम एडिटिंग से जुड़े शोध किए जा रहे हैं। इस तकनीक के जरिए फसलों में बेहतर उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, पानी के बेहतर इस्तेमाल और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने जैसे गुण विकसित करने पर काम किया जा रहा है। इससे भविष्य में किसानों को क्षेत्र और मौसम के अनुसार अधिक उपयोगी फसल किस्में मिल सकती हैं। Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein
ये भी देखे: राजस्थान में मानसून की चाल बिगड़ी, 24% कम बारिश; 12 सितंबर से फिर करवट लेगा मौसम
जीन एडिटिंग को लेकर भारत में नियमों में बदलाव
भारत में जीनोम एडिटिंग फसलों को लेकर नियामकीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। मार्च 2022 में पर्यावरण मंत्रालय ने जीनोम-एडिटेड फसलों की कुछ श्रेणियों को मौजूदा कड़े जैव-सुरक्षा नियमों से छूट दी थी। दुनिया के कई देशों में भी जीनोम एडिटिंग को लेकर नियम और नीतियां तैयार की जा रही हैं। अमेरिका, कनाडा, जापान, ब्राजील और अर्जेंटीना समेत कई देशों में इस तकनीक से विकसित फसलों को लेकर अलग-अलग नियामकीय व्यवस्थाएं लागू हैं। Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein
किसानों के लिए क्यों खास हैं नई जीन एडिटिंग किस्में?
Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनका उद्देश्य सिर्फ ज्यादा उत्पादन हासिल करना नहीं है, बल्कि कम संसाधनों में बेहतर खेती को बढ़ावा देना भी है। पानी की कमी, मिट्टी का बढ़ता खारापन और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। अगर जीन एडिटिंग से तैयार धान की नई किस्में इन चुनौतियों के बीच बेहतर प्रदर्शन करती हैं, तो इससे किसानों को कम पानी में धान उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein
साथ ही खेती को अधिक टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में भी यह तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में Gene Editing Se Taiyar Dhan Ki Nayi Kismein किसानों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती हैं। हालांकि इन किस्मों की वास्तविक उपयोगिता का आकलन बड़े स्तर पर खेती और किसानों के खेतों में प्रदर्शन के बाद ही बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

1 Comment