Tuvar Mandi Bhav: देश में तुअर की बुवाई का रकबा बढ़ने के बावजूद बाजार में कीमतों में तेजी बनी हुई है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, मंडियों में सीमित आवक, धीमे आयात और कम स्टॉक ने तुअर के बाजार को मजबूत बनाए रखा है। ऐसे में किसानों और कारोबारियों की नजर Tuvar Mandi Bhav पर बनी हुई है।
Tuvar Mandi Bhav में क्यों बनी हुई है तेजी?
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 4 सितंबर तक देश में तुअर की बुवाई 1.6 फीसदी बढ़कर 45.66 लाख हेक्टेयर हो गई है। इसके बावजूद तुअर की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। इसकी प्रमुख वजह उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितता और मंडियों में सीमित सप्लाई है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश के कारण कई क्षेत्रों में फसल की बढ़वार कमजोर हुई है। इससे आने वाले समय में उत्पादन कम रहने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि Tuvar Mandi Bhav में फिलहाल मजबूती देखने को मिल रही है।
मंडियों में तुअर की आवक कम
इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के मुताबिक, मंडियों में तुअर की आवक फिलहाल कम है। दूसरी ओर, म्यांमार और अफ्रीकी देशों से आयातित तुअर के भाव ऊंचे मिल रहे हैं। आयात की रफ्तार भी धीमी है, जिससे घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ नहीं पा रही है। आयातित तुअर की लागत मौजूदा घरेलू बाजार भाव से ज्यादा होने के कारण आयातकों को नई खेप मंगाने में परेशानी हो रही है। बाजार में उपलब्ध स्टॉक भी सीमित है। ऐसे में कारोबारियों की नजर लगातार Tuvar Mandi Bhav में होने वाले बदलाव पर है।
गुलबर्गा में तुअर का भाव 9,400 रुपये तक पहुंचा
IPGA के अनुसार, 5 सितंबर को गुलबर्गा में घरेलू तुअर का भाव 8,500 से 9,400 रुपये प्रति क्विंटल रहा। पिछले महीने की तुलना में इसमें करीब 1,100 रुपये की तेजी आई है। वहीं, पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले भाव 2,668 रुपये अधिक है। अकोला में तुअर 8,800 से 8,825 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिकी। यहां पिछले महीने के मुकाबले करीब 500 रुपये और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 2,100 रुपये की तेजी दर्ज की गई। इस तेजी के चलते Tuvar Mandi Bhav किसानों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।
तुअर दाल के भाव में भी तेजी
तुअर के साथ तुअर दाल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। गुलबर्गा में तुअर दाल का भाव 12,000 से 12,100 रुपये प्रति क्विंटल रहा। यह पिछले महीने के मुकाबले 600 रुपये और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 2,400 रुपये अधिक है। अकोला में तुअर दाल 12,100 से 12,300 रुपये प्रति क्विंटल बिकी। यहां पिछले महीने की तुलना में 700 रुपये और सालाना आधार पर 2,900 रुपये की तेजी दर्ज की गई। दाल के बढ़ते भाव से मिलर्स का मार्जिन बेहतर हुआ है, जिससे तुअर की खरीदारी भी बढ़ रही है। इससे Tuvar Mandi Bhav को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में फसल पर चिंता
देश में तुअर की कुल बुवाई भले ही बढ़ी है, लेकिन महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल की स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है। लंबे समय से कम बारिश के कारण कई इलाकों में पौधों की बढ़वार प्रभावित हुई है। कर्नाटक के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है और कुछ क्षेत्रों में सूखा घोषित किया गया है। ऐसे में किसानों को उत्पादन में कमी की चिंता है। इसका सीधा असर आने वाले समय में Tuvar Mandi Bhav पर देखने को मिल सकता है।
सरकार के पास करीब 10 लाख टन तुअर का स्टॉक
IPGA के मुताबिक, फिलहाल देश में तुअर की तत्काल कमी नहीं है। सरकार के पास करीब 10 लाख टन तुअर का स्टॉक मौजूद है। इसके बावजूद बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है।बाजार में सीमित उपलब्धता और भविष्य में उत्पादन कम रहने की आशंका के कारण कारोबारी सतर्क हैं। वहीं, मौजूदा स्टॉक बेचने में भी कई कारोबारी जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में Tuvar Mandi Bhav आने वाले दिनों में मांग और सप्लाई के आधार पर तय होगा।
सितंबर के अंत से अफ्रीकी तुअर की नई खेप
अफ्रीकी देशों से तुअर की नई खेप सितंबर के आखिर से आने की उम्मीद है। हालांकि, नई खेप की लागत मौजूदा बाजार भाव से ज्यादा बताई जा रही है। इसलिए आयात बढ़ने से घरेलू बाजार में तुरंत बड़ी सप्लाई आने की संभावना कम है। IPGA के अनुसार, दाल की लगातार मांग, मिलर्स की खरीद और कई क्षेत्रों में असमान बारिश तुअर के भाव को मजबूती दे सकती है। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर Tuvar Mandi Bhav में और तेजी देखने को मिल सकती है।
इन राज्यों में बढ़ा तुअर की बुवाई का रकबा
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में तुअर का रकबा 33 फीसदी बढ़कर 4.95 लाख हेक्टेयर हो गया है। झारखंड में यह 53 फीसदी बढ़कर 2.12 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।गुजरात में तुअर का रकबा 11 फीसदी बढ़कर 3.13 लाख हेक्टेयर और तेलंगाना में 17 फीसदी बढ़कर 2.23 लाख हेक्टेयर हो गया। आंध्र प्रदेश में भी रकबा 9 फीसदी बढ़कर 2.42 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। इन आंकड़ों के बावजूद Tuvar Mandi Bhav पर फिलहाल मौसम और सप्लाई का ज्यादा असर दिखाई दे रहा है।
कर्नाटक और महाराष्ट्र में घटा रकबा
कर्नाटक में तुअर की बुवाई का रकबा 9 फीसदी घटकर 12.93 लाख हेक्टेयर रह गया है। मध्य प्रदेश में भी रकबा 15 फीसदी घटकर 2.74 लाख हेक्टेयर हो गया है। महाराष्ट्र में तुअर की बुवाई का रकबा करीब 1.5 फीसदी घटकर 12 लाख हेक्टेयर रह गया है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में रकबा घटने और कम बारिश के कारण उत्पादन पर असर की आशंका है। इसलिए Tuvar Mandi Bhav पर आगे भी तेजी का दबाव बना रह सकता है।
आगे कैसा रह सकता है तुअर का बाजार?
कुल मिलाकर तुअर की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद बाजार में सप्लाई सीमित है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश, धीमा आयात और त्योहारों से पहले बढ़ने वाली मांग तुअर की कीमतों को सपोर्ट कर सकती है। सितंबर के अंत से अफ्रीकी तुअर की नई खेप आने के बाद सप्लाई में कुछ सुधार हो सकता है, लेकिन तत्काल बड़ी गिरावट की संभावना कम दिखाई दे रही है। ऐसे में किसानों और कारोबारियों के लिए Tuvar Mandi Bhav पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।

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