Allam Gouthami Success Story: नारियल की भूसी को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, लेकिन आंध्र प्रदेश की अल्लम गौथमी ने इसी भूसी से निकलने वाले कॉयर रेशे को कारोबार का आधार बनाया। उनकी कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों को दिखाती है। Allam Gouthami Success Story इस बात का उदाहरण है कि प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और सरकारी सहायता के जरिए स्थानीय संसाधन से भी कारोबार खड़ा किया जा सकता है।
नारियल की भूसी से शुरू किया कॉयर कारोबार
आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के कडियाम की अल्लम गौथमी ने कॉयर उत्पादों से जुड़ा कारोबार शुरू किया। उन्होंने धवलेश्वरम स्थित कॉयर बोर्ड प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण लिया और इसके बाद नारियल की भूसी से मिलने वाले कॉयर रेशे से अलग-अलग उत्पाद तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया। Allam Gouthami Success Story में सबसे खास बात यह है कि उन्होंने केवल अपने लिए कारोबार शुरू नहीं किया, बल्कि आसपास की महिलाओं को भी इस काम से जोड़ने का प्रयास किया। उनके कारोबार में चटाई, रस्सी, सजावटी सामान और हस्तशिल्प जैसे कॉयर उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
करीब 10 लाख रुपये की परियोजना से शुरू हुई इकाई
वर्ष 2024-25 में गौथमी ने करीब 10 लाख रुपये की परियोजना लागत से एडिगो कॉयर प्रोडक्ट्स की शुरुआत की। कारोबार के लिए उन्हें 6.50 लाख रुपये का बैंक ऋण और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी PMEGP के तहत सहायता मिली। कॉयर बोर्ड से प्राप्त प्रशिक्षण ने उन्हें उत्पादन प्रक्रिया और कॉयर उत्पादों की जानकारी हासिल करने में मदद की। Allam Gouthami Success Story यह भी बताती है कि किसी ग्रामीण उद्यम को आगे बढ़ाने में कौशल प्रशिक्षण के साथ वित्तीय सहायता की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
कॉयर से बनाए जा रहे हैं कई उपयोगी उत्पाद
गौथमी की इकाई में पर्यावरण अनुकूल दरवाजे की चटाइयां, रस्सियां, सजावटी गुड़िया और कई प्रकार के हस्तशिल्प तैयार किए जाते हैं। नारियल की भूसी से निकलने वाले प्राकृतिक रेशे को उपयोगी उत्पाद में बदलकर उसकी वैल्यू बढ़ाई जाती है। कॉयर उत्पादों की मांग पारंपरिक बाजार के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की बढ़ती जरूरत के कारण भी महत्वपूर्ण हो रही है। Allam Gouthami Success Story में यह पहलू ग्रामीण संसाधनों को व्यावसायिक अवसर में बदलने की मिसाल पेश करता है।
सालाना 35 लाख रुपये तक का कारोबार
गौथमी की इकाई ने कारोबार शुरू करने के बाद विस्तार किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी इकाई से करीब 35 लाख रुपये का सालाना कारोबार हो रहा है और लगभग 10 लाख रुपये का लाभ कमाया जा रहा है। उनकी इकाई में छह महिलाओं को सीधे रोजगार मिला है। कारोबार के विस्तार के साथ उन्होंने स्थानीय स्तर पर अन्य महिलाओं को भी कॉयर से जुड़े काम का प्रशिक्षण देना शुरू किया। Allam Gouthami Success Story इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनकी सफलता का प्रभाव उनके अपने कारोबार से आगे बढ़कर आसपास के क्षेत्र तक पहुंचा।
120 महिलाओं को दिया कॉयर का प्रशिक्षण
अल्लम गौथमी ने करीब 120 महिलाओं को चटाई बुनने, रस्सी बनाने और कॉयर से हस्तशिल्प तैयार करने की ट्रेनिंग दी है। इससे महिलाओं को कॉयर आधारित काम सीखने और आय के अवसर तलाशने में मदद मिली। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल से छोटे उद्योग शुरू किए जा सकते हैं। Allam Gouthami Success Story इसी तरह के महिला उद्यमिता मॉडल को सामने लाती है, जिसमें एक कारोबार के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार और कौशल विकास के अवसर पैदा होते हैं।
सफलता के बाद आसपास शुरू हुईं नई इकाइयां
गौथमी के कारोबार से प्रेरित होकर आसपास के क्षेत्रों में करीब पांच और कॉयर इकाइयां शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इससे कॉयर से जुड़े काम का स्थानीय स्तर पर विस्तार हुआ और नारियल की भूसी के उपयोग की संभावनाएं बढ़ीं। नारियल उत्पादक क्षेत्रों में भूसी आसानी से उपलब्ध होने के कारण कॉयर आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की व्यवस्था की जा सकती है। Allam Gouthami Success Story दिखाती है कि स्थानीय संसाधन, कौशल और बाजार की समझ मिलकर ग्रामीण कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
महिलाओं के लिए रोजगार का अवसर
कॉयर उद्योग में महिलाओं की भागीदारी लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। रेशा निकालने, कताई, चटाई बनाने और हस्तशिल्प तैयार करने जैसे कामों में महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। गौथमी ने अपने कारोबार के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण देने पर ध्यान दिया। Allam Gouthami Success Story ग्रामीण महिलाओं के लिए कौशल आधारित रोजगार और छोटे उद्यमों की संभावनाओं को समझने का एक उदाहरण बनकर सामने आती है।
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कॉयर कारोबार में सरकारी सहायता की भूमिका
कॉयर बोर्ड कॉयर उद्योग से जुड़े कामगारों और उद्यमियों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, अनुसंधान और बाजार से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम करता है। वहीं PMEGP जैसी योजनाएं पात्र उद्यमियों को अपना कारोबार शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर देती हैं। हालांकि किसी भी कारोबार को शुरू करने से पहले परियोजना लागत, बाजार की मांग, मशीनरी, कच्चे माल और बिक्री व्यवस्था का आकलन करना जरूरी है। Allam Gouthami Success Story में प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के साथ कारोबार को बाजार से जोड़ने की भूमिका भी दिखाई देती है।
नारियल की भूसी अब नहीं है बेकार
नारियल की भूसी से कॉयर रेशा और कॉयर पिथ प्राप्त होता है। कॉयर रेशे से चटाई, रस्सी और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद बनाए जा सकते हैं, जबकि कॉयर पिथ का उपयोग कृषि और बागवानी से जुड़े उत्पादों में किया जाता है। इस तरह नारियल के एक ऐसे हिस्से का उपयोग किया जा रहा है जिसे पहले अक्सर अपशिष्ट माना जाता था। Allam Gouthami Success Story ग्रामीण भारत में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर व्यावसायिक इस्तेमाल की संभावनाओं को सामने लाती है।

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