Pyaj Ki Keemat: सितंबर 2026 में प्याज के थोक भाव में देशभर में बड़ी तेजी देखने को मिली है। प्रमुख कृषि मंडियों में प्याज के थोक भाव लगातार बढ़े हैं, जिसका असर अब खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है। सितंबर 2026 के राज्यवार थोक मूल्य आंकड़ों के अनुसार प्याज का औसत थोक भाव बढ़कर 4,249 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है। अगस्त 2026 में यह औसत 3,235 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह केवल एक महीने में कीमतों में 31.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पिछले साल की समान अवधि से तुलना करें तो Pyaj Ki Keemat में तेजी और भी ज्यादा रही है। सितंबर 2025 में प्याज का औसत थोक भाव 1,837 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके मुकाबले सितंबर 2026 में औसत भाव 131.3 फीसदी अधिक रहा। यानी एक साल में प्याज के थोक बाजार में काफी बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
Pyaj Ki Keemat बढ़ने की क्या है वजह?
प्याज की कीमत में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता के कारण उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके अलावा मंडियों में उपलब्ध स्टॉक पर भी दबाव दिखाई दे रहा है। खरीफ प्याज की नई फसल की आवक अपेक्षा के अनुसार तेज नहीं होने के कारण मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ा है। भंडारण और परिवहन से जुड़ी समस्याएं भी Pyaj Ki Keemat को प्रभावित कर सकती हैं। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त भंडारण सुविधा नहीं है, वहां किसानों और व्यापारियों के लिए प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। इससे बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश में प्याज के दाम में 50 फीसदी से ज्यादा उछाल
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में प्याज के थोक भाव में सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सितंबर 2026 में यहां प्याज का औसत थोक भाव 2,923 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि अगस्त में यह 1,940 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह एक महीने में कीमत 50.7 फीसदी बढ़ गई।
गुजरात में प्याज के भाव में 51.4 फीसदी, चंडीगढ़ में 47.5 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 46.4 फीसदी, पंजाब में 46.3 फीसदी और तेलंगाना में 42.4 फीसदी की मासिक बढ़ोतरी दर्ज हुई है। राजस्थान, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर में भी प्याज के भाव में 40 फीसदी से अधिक की तेजी देखने को मिली है। इन राज्यों में बढ़ी Pyaj Ki Keemat का असर स्थानीय बाजारों के साथ उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है।
इन राज्यों में सबसे महंगा रहा प्याज
सितंबर 2026 में कुछ राज्यों में प्याज का औसत थोक भाव देश के औसत से काफी अधिक रहा। मेघालय में प्याज का भाव 6,117 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। मणिपुर में यह 6,044 रुपये और केरल में 6,072 रुपये प्रति क्विंटल रहा। तमिलनाडु में भी औसत थोक भाव 5,807 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। जम्मू-कश्मीर में प्याज का औसत भाव 5,338 रुपये और असम में 5,022 रुपये प्रति क्विंटल रहा। अंडमान-निकोबार में भी कीमत करीब 5,000 रुपये प्रति क्विंटल रही। इन क्षेत्रों में सीमित स्थानीय उत्पादन और परिवहन लागत का असर Pyaj Ki Keemat पर देखने को मिल सकता है।
महाराष्ट्र में भी तेजी से बढ़े प्याज के भाव
महाराष्ट्र देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां की मंडियों में होने वाले बदलाव का असर देश के दूसरे बाजारों पर भी पड़ता है। सितंबर 2026 में महाराष्ट्र में प्याज का औसत थोक भाव 3,950 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो अगस्त की तुलना में 41.6 फीसदी अधिक है। मध्य प्रदेश में सितंबर के दौरान औसत भाव 3,039 रुपये, कर्नाटक में 4,126 रुपये और गुजरात में करीब 3,996 रुपये प्रति क्विंटल रहा। प्रमुख उत्पादक राज्यों में सप्लाई प्रभावित होने पर आने वाले दिनों में Pyaj Ki Keemat में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
मंडी भाव बढ़ने के बावजूद किसान क्यों परेशान?
मंडी में प्याज का भाव बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर किसान की आय भी उसी अनुपात में बढ़ रही है। किसानों को उत्पादन के दौरान बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च करना पड़ता है। इसके बाद फसल को मंडी तक पहुंचाने, छंटाई और भंडारण की लागत भी जुड़ती है। कई किसानों के पास लंबे समय तक प्याज को सुरक्षित रखने की पर्याप्त सुविधा नहीं होती। ऐसे में फसल को जल्दी बेचने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए बाजार में Pyaj Ki Keemat बढ़ने के बावजूद किसान की वास्तविक कमाई कई अन्य खर्चों और बिक्री की स्थिति पर निर्भर करती है।
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खरीदारों पर भी बढ़ रहा है बोझ
प्याज भारतीय रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल है। इसलिए थोक बाजार में प्याज की कीमत बढ़ने का असर खुदरा बाजार और घरेलू बजट पर भी पड़ता है। मंडियों में लगातार तेजी रहने पर खुदरा विक्रेता भी ऊंचे भाव पर प्याज खरीदते हैं, जिसका असर ग्राहकों तक पहुंचता है। अगर आने वाले दिनों में प्याज की आवक कमजोर रहती है और मांग के मुकाबले सप्लाई कम बनी रहती है, तो Pyaj Ki Keemat में तेजी जारी रह सकती है। हालांकि नई फसल की आवक बढ़ने पर बाजार में उपलब्धता बेहतर होने से कीमतों में राहत मिलने की संभावना भी रहेगी।
त्योहारी सीजन से पहले बाजार पर नजर
त्योहारी सीजन नजदीक आने के साथ प्याज की मांग और सप्लाई पर बाजार की नजर बनी हुई है। नई फसल की आवक, मौसम की स्थिति, मंडियों में उपलब्ध स्टॉक और राज्यों के बीच परिवहन आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अगर नई फसल की आवक तेज होती है तो बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ सकती है और Pyaj Ki Keemat पर दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर, यदि सप्लाई कमजोर रहती है तो प्याज के भाव में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
आगे कैसी रह सकती है Pyaj Ki Keemat?
सितंबर 2026 के आंकड़ों से पता चलता है कि प्याज के थोक भाव में पिछले महीने और पिछले साल की तुलना में बड़ी तेजी आई है। अब आने वाले समय में बाजार की दिशा मुख्य रूप से नई फसल की आवक, मांग-आपूर्ति, मौसम और उपलब्ध स्टॉक पर निर्भर करेगी। किसानों के लिए बेहतर भंडारण सुविधा और बाजार तक आसान पहुंच महत्वपूर्ण होगी, जबकि उपभोक्ताओं के लिए आने वाले सप्ताह प्याज के खुदरा भाव के लिहाज से अहम रहेंगे। फिलहाल Pyaj Ki Keemat में आई तेजी ने किसानों, व्यापारियों और खरीदारों तीनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

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