Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story: कृषि में नई तकनीकों और जैविक खेती को अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के किसान अभेन्द्र सिंह चंदेल की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायक मिसाल है। उन्होंने जैविक तरीके से गन्ने की खेती शुरू करने के बाद उससे अलग-अलग तरह का गुड़ तैयार करना शुरू किया। आज उनका तैयार किया हुआ ड्राईफ्रूट गुड़ 300 रुपये किलो तक बिक रहा है। Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story किसानों के लिए खेती के साथ वैल्यू एडिशन का एक अच्छा उदाहरण है।
अभेन्द्र सिंह चंदेल की जैविक खेती की शुरुआत
Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story जबलपुर जिले के पाटन विकासखंड के दौनी गांव के किसान अभेन्द्र सिंह चंदेल ने शुरुआत में जैविक खेती के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। कृषि विभाग से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने जैविक तरीके से गन्ने की खेती शुरू की। वर्तमान में अभेन्द्र करीब 5 एकड़ जमीन में जैविक गन्ने की खेती कर रहे हैं।
वे रासायनिक खादों के बजाय खुद तैयार की गई जैविक खाद का इस्तेमाल करते हैं। खेती के साथ उन्होंने गन्ने से गुड़ तैयार करने का काम भी शुरू किया। इसी वजह से Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story केवल जैविक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि उत्पाद की प्रोसेसिंग और बेहतर बाजार मूल्य हासिल करने की कहानी भी है।
गन्ने से तैयार कर रहे हैं 3 तरह का जैविक गुड़
अभेन्द्र सिंह चंदेल अपने जैविक गन्ने से तीन तरह का गुड़ तैयार करते हैं। इनमें सामान्य जैविक गुड़, ड्राईफ्रूट गुड़ और अजवाइन-अदरक वाला गुड़ शामिल है। जैविक गुड़ करीब 120 रुपये किलो तक बिकता है। वहीं ड्राईफ्रूट गुड़ की कीमत 300 रुपये किलो तक पहुंच जाती है। इसके अलावा अजवाइन और अदरक मिलाकर तैयार किया गया गुड़ करीब 200 रुपये किलो में बेचा जा रहा है। इस तरह गन्ने को सीधे बेचने के बजाय उससे तैयार उत्पाद बाजार में बेचने से किसान को बेहतर कीमत प्राप्त हो रही है। यही कारण है कि Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story कृषि में वैल्यू एडिशन की उपयोगिता को दर्शाती है।
ड्राईफ्रूट गुड़ से मिल रही बेहतर कीमत
बाजार में सामान्य गुड़ की कीमत लगभग 60 से 65 रुपये प्रति किलो बताई गई है। वहीं अभेन्द्र का जैविक गुड़ करीब 120 रुपये किलो और ड्राईफ्रूट गुड़ 300 रुपये किलो तक बिक रहा है। ड्राईफ्रूट गुड़ में अतिरिक्त सामग्री मिलाए जाने के कारण इसका उत्पाद मूल्य बढ़ जाता है। ग्राहकों की पसंद और मांग को देखते हुए अभेन्द्र अलग-अलग वजन में गुड़ की पैकिंग भी तैयार करते हैं। Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story में सबसे खास बात यह है कि किसान ने अपनी फसल से तैयार होने वाले उत्पाद को सीधे बाजार तक पहुंचाकर उसकी वैल्यू बढ़ाई है।
कृषि विभाग से मिली ट्रेनिंग ने बदली दिशा
अभेन्द्र सिंह चंदेल ने जैविक खेती और गुड़ निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कृषि विभाग से प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद उन्हें जैविक खेती के साथ कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग के बारे में भी जानकारी मिली। उन्होंने इसी जानकारी का इस्तेमाल अपने खेत में किया और गन्ने की खेती के साथ गुड़ बनाने की यूनिट शुरू की। धीरे-धीरे उनके उत्पादों को स्थानीय बाजार में पहचान मिलने लगी। यह कहानी Organic Farming Success Story के तौर पर भी देखी जा सकती है, क्योंकि इसमें किसान ने खेती की पारंपरिक प्रक्रिया को आधुनिक वैल्यू एडिशन से जोड़ा है।
जैविक हाट में बेच रहे हैं अपने उत्पाद
जबलपुर में आयोजित जैविक हाट में अभेन्द्र सिंह चंदेल को अपने उत्पाद बेचने के लिए जगह मिली। यहां वे ग्राहकों को अपने जैविक गुड़ के बारे में जानकारी देते हैं और सीधे उत्पाद बेचते हैं। जैविक हाट में ग्राहकों से मिलने वाली प्रतिक्रिया ने उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद की है। वर्तमान में वे मुख्य रूप से जबलपुर शहर में अपने उत्पादों की सप्लाई कर रहे हैं। स्थानीय बाजार से मिल रही मांग को देखते हुए वे आने वाले समय में अपने कारोबार का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story में बाजार से सीधे जुड़ना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।
एक साल में बेच चुके हैं 50 क्विंटल गुड़
अभेन्द्र के अनुसार पिछले करीब एक साल में वे तीनों तरह के गुड़ की लगभग 50 क्विंटल बिक्री कर चुके हैं। अब उनका लक्ष्य आने वाले सीजन में बिक्री को लगभग दोगुना करना है। ग्राहकों की जरूरत के अनुसार वे 100 ग्राम से लेकर 1 किलो तक की अलग-अलग पैकिंग तैयार करते हैं। छोटी पैकिंग से ग्राहक कम मात्रा में भी उत्पाद खरीद सकते हैं, जबकि ज्यादा जरूरत वाले ग्राहक बड़ी पैकिंग ले सकते हैं। Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story
यह तरीका छोटे किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए उपयोगी हो सकता है। Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story दिखाती है कि सही उत्पाद, पैकेजिंग और बाजार से जुड़ाव के जरिए खेती को एक व्यवसाय में बदला जा सकता है।
ये भी देखे: जयपुर-टोंक समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
जैविक खेती के साथ वैल्यू एडिशन पर जोर
आज किसान केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहते। कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए किसान अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। अभेन्द्र सिंह चंदेल ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने जैविक गन्ने से गुड़ तैयार किया और फिर अलग-अलग फ्लेवर और सामग्री के साथ नए उत्पाद तैयार किए। उनकी कहानी Organic Farming Success Story के रूप में उन किसानों के लिए उपयोगी उदाहरण है, जो खेती के साथ अपना छोटा कृषि व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
देशभर में जैविक गुड़ पहुंचाने का लक्ष्य
फिलहाल अभेन्द्र सिंह चंदेल अपने उत्पादों की सप्लाई जबलपुर शहर में कर रहे हैं। उनके अनुसार उत्पादों की मांग बढ़ रही है और ग्राहकों से ऑर्डर भी मिल रहे हैं। आने वाले समय में उनका लक्ष्य कारोबार का विस्तार करते हुए अपने जैविक गुड़ को मध्य प्रदेश के दूसरे शहरों और देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाना है। इसके लिए उत्पादन, पैकिंग और मार्केटिंग को और बेहतर करने पर जोर दिया जा सकता है। Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story यह बताती है कि किसान अपनी फसल की प्रोसेसिंग करके बाजार में नया उत्पाद तैयार कर सकते हैं और अपनी कमाई के नए रास्ते बना सकते हैं।
किसानों के लिए क्या है सीख?
अभेन्द्र सिंह चंदेल की कहानी से किसानों को खेती में वैल्यू एडिशन की अहमियत समझने को मिलती है। यदि किसान अपनी फसल से सीधे तैयार उत्पाद बनाकर बाजार तक पहुंचाते हैं, तो उन्हें केवल कच्ची उपज बेचने की तुलना में अलग बाजार तैयार करने का अवसर मिल सकता है। Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story
जैविक खेती, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और स्थानीय बाजार से सीधा जुड़ाव इस मॉडल के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। Abhendra Singh Chandel Organic Jaggery Success Story इसी तरह खेती को कृषि उद्यम में बदलने की संभावनाओं को सामने लाती है। अभेन्द्र सिंह चंदेल की यह Organic Farming Success Story बताती है कि प्रशिक्षण, मेहनत और कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन के जरिए किसान अपनी पारंपरिक खेती को एक व्यवसाय के रूप में विकसित कर सकते हैं।

1 Comment