Surendra Jaitwar Farming Success Story: खेती में बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के बीच किसान अब खेती के नए तरीकों को अपना रहे हैं। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के वारासिवनी तहसील के ग्राम भांडी निवासी किसान सुरेंद्र जैतवार ने भी पारंपरिक खेती के साथ कई कृषि गतिविधियों को जोड़कर अपने खेत को आय के अलग-अलग स्रोतों वाला मॉडल बनाया है। उनकी कहानी Surendra Jaitwar Farming Success Story के रूप में किसानों के लिए प्रेरणा देने वाली है।
सुरेंद्र जैतवार के खेत में मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन, फलोद्यान, हल्दी, सिंघाड़ा और जिमीकंद जैसी गतिविधियां एक साथ संचालित हो रही हैं। कृषि विभाग की RAD Yojana (Rainfed Area Development) से मिले सहयोग ने भी उनके खेत में इस मॉडल को विकसित करने में मदद की।
पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अपनाया Vividikrit Farming
सुरेंद्र जैतवार ने खेती को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने खेत में उपलब्ध जमीन, पानी और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अलग-अलग कृषि गतिविधियों को एक-दूसरे से जोड़ा। उनके खेत में तालाब, मुर्गीपालन इकाई, पशुपालन, फलदार पौधे और वर्मी टांका जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इस तरह खेती के साथ पशुपालन और मत्स्यपालन को जोड़कर उन्होंने Vividikrit Farming यानी विविधीकृत खेती का मॉडल तैयार किया है। यह मॉडल एक ही कृषि गतिविधि पर निर्भरता कम करने और अलग-अलग स्रोतों से आय के अवसर विकसित करने की दिशा में काम करता है।
खेत में लगाए 100 से अधिक फलदार और उपयोगी पौधे
सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में 100 से अधिक फलदार और उपयोगी पौधे लगाए हैं। इनमें आम, केला, अमरूद, काजू, हाथीफल और नींबू जैसी फलदार प्रजातियों के साथ सागौन और नीलगिरी के पौधे भी शामिल हैं। उन्होंने नींबू की अलग-अलग किस्मों का भी रोपण किया है। अलग-अलग प्रजातियों के पौधों को खेत में शामिल करने से कृषि प्रणाली में विविधता आई है और आने वाले समय में फल एवं अन्य कृषि उत्पादों से आय प्राप्त करने की संभावना बनी है। सुरेंद्र जैतवार की यह पहल Surendra Jaitwar Farming Success Story का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें खेती के साथ फलोद्यान को भी जोड़ा गया है।
तालाब में मछलीपालन से बढ़ा आय का विकल्प
सुरेंद्र जैतवार के खेत में बने तालाब का इस्तेमाल मछलीपालन के लिए किया जा रहा है। तालाब में रूपचंदा, जलगा और पित्ती सहित विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। मत्स्यपालन को खेती के साथ जोड़ने से किसान को फसल उत्पादन के अलावा एक अतिरिक्त कृषि गतिविधि मिलती है। तालाब आधारित इस व्यवस्था को खेत की दूसरी गतिविधियों के साथ जोड़कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा रहा है। Surendra Jaitwar Farming Success Story
Surendra Jaitwar Farming Success Story कड़कनाथ, ब्रॉयलर और देसी मुर्गों का पालन
खेती के साथ सुरेंद्र जैतवार ने मुर्गीपालन को भी अपने कृषि मॉडल का हिस्सा बनाया है। उनके खेत में कड़कनाथ, ब्रॉयलर और देसी मुर्गे-मुर्गियों का पालन किया जा रहा है। मुर्गीपालन से कृषि के अलावा पशु आधारित उत्पादों के माध्यम से आय का एक और विकल्प तैयार होता है। खेती, मुर्गीपालन और मछलीपालन को एक साथ जोड़ना उनके Vividikrit Farming मॉडल की खासियत है। Surendra Jaitwar Farming Success Story
Surendra Jaitwar Farming Success Story हल्दी के साथ सिंघाड़ा और जिमीकंद की खेती
सुरेंद्र जैतवार खेती में नए प्रयोग करने पर भी जोर देते हैं। उनके खेत में हल्दी की खेती की जा रही है। इसके अलावा उन्होंने सिंघाड़ा और सूरन यानी जिमीकंद की खेती भी शुरू की है। अलग-अलग फसलों को शामिल करने से खेत की गतिविधियां एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहतीं। स्थानीय परिस्थितियों और बाजार की मांग के अनुसार फसलों का चयन किसानों को खेती में विविधता लाने में मदद कर सकता है। Surendra Jaitwar Farming Success Story
ये भी देखे: जबलपुर जिले के किसान ने जैविक गन्ने से 3 तरह का गुड़ बनाकर बढ़ाई कमाई
RAD Yojana से मिला कृषि मॉडल को बढ़ावा
कृषि विभाग की RAD Yojana यानी Rainfed Area Development योजना के माध्यम से मिले सहयोग का उपयोग सुरेंद्र जैतवार ने अपने खेत में विविधीकृत कृषि प्रणाली विकसित करने में किया। इस योजना के सहयोग से उन्होंने खेती के साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, फलोद्यान और अन्य गतिविधियों को जोड़ने की दिशा में काम किया। इससे उनके खेत को एक ऐसी कृषि प्रणाली में विकसित करने में मदद मिली, जिसमें कई गतिविधियां एक साथ संचालित हो रही हैं।
एक ही खेत में कई आय के विकल्प
सुरेंद्र जैतवार के खेत की सबसे खास बात यह है कि यहां फसल उत्पादन के साथ कई अन्य गतिविधियां भी चल रही हैं। फलोद्यान, मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन, हल्दी, सिंघाड़ा और जिमीकंद जैसी गतिविधियों को एक ही कृषि मॉडल में शामिल किया गया है। इसके साथ ही वर्मी टांका और विभिन्न उपयोगी पौधों का रोपण भी किया गया है। इस तरह खेती को बहुआयामी बनाने का प्रयास किया गया है। यही वजह है कि Surendra Jaitwar Farming Success Story किसानों के लिए यह समझने का उदाहरण देती है कि खेती में उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अलग-अलग गतिविधियों को जोड़कर कृषि मॉडल में विविधता लाई जा सकती है।
किसानों के लिए क्या है सीख?
सुरेंद्र जैतवार की कहानी बताती है कि किसान केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जमीन, पानी, बाजार और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अलग-अलग कृषि गतिविधियों को जोड़ सकते हैं। फसल उत्पादन के साथ फलोद्यान, पशुपालन, मुर्गीपालन और मत्स्यपालन को योजनाबद्ध तरीके से अपनाने से खेती में विविधता लाई जा सकती है।
हालांकि किसी भी कृषि मॉडल को अपनाने से पहले स्थानीय जलवायु, बाजार, लागत और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करना जरूरी है। Surendra Jaitwar Farming Success Story में खेती के साथ कई गतिविधियों को जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। RAD Yojana के सहयोग और Vividikrit Farming की सोच के साथ उन्होंने अपने खेत को एक विविधीकृत कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया है।

1 Comment