Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026: रबी सीजन 2026-27 में गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए बुवाई का सही समय जानना बेहद जरूरी है। समय पर बुवाई करने से फसल का अच्छा विकास होता है और बेहतर पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIWBR), करनाल ने नए सीजन के लिए गेहूं और जौ की खेती से जुड़ी कृषि एडवाइजरी जारी की है।
संस्थान की सलाह के अनुसार, किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर गेहूं की किस्मों का चयन करना चाहिए। इस लेख में जानिए Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026, गेहूं की उन्नत किस्में, बीज की मात्रा और खाद प्रबंधन से जुड़ी पूरी जानकारी।
Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026 क्या है?
Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026 के लिए नवंबर का पहला सप्ताह महत्वपूर्ण माना जाता है। ICAR-IIWBR की कृषि एडवाइजरी के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में अगेती बुवाई करने वाले किसानों को 7 नवंबर तक बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए। इस क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल हैं। वहीं, सामान्य समय पर गेहूं की बुवाई के लिए 20 नवंबर तक का समय उपयुक्त बताया गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे बुवाई में देरी न करें, क्योंकि देर से बुवाई करने पर फसल के पकने के समय तापमान बढ़ने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026, गेहूं की अगेती बुवाई करने के फायदे
गेहूं की अगेती बुवाई करने से फसल को विकास के लिए अनुकूल मौसम मिल सकता है। इससे पौधों की जड़ों का विकास अच्छा होता है और फसल को बढ़ने के लिए पर्याप्त समय मिलता है। समय पर बुवाई करने से फसल के पकने के समय गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, सही किस्म और संतुलित खाद का इस्तेमाल करने से बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026
गेहूं की अगेती बुवाई के लिए उन्नत किस्में
अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए किसानों को अपने क्षेत्र के अनुसार अनुशंसित गेहूं की किस्मों का चयन करना चाहिए। उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में अगेती बुवाई के लिए DBW 187, DBW 303, WH 1270, DBW 327, DBW 332, PBW 872, DBW 370, DBW 371 और DBW 372 किस्मों की सिफारिश की गई है। वहीं, मध्य क्षेत्र के किसानों के लिए DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 445, JW 1399, PBW 906, HD 3463 और GW 543 जैसी किस्में बताई गई हैं। किसानों को सलाह है कि वे अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्मों का ही चयन करें और प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल करें।
गेहूं की बुवाई के लिए बीज की मात्रा
Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026 सिंचित और समय पर बुवाई की स्थिति में गेहूं की बीज दर 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखनी चाहिए। अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करने से अंकुरण बेहतर होता है और खेत में पौधों की संख्या संतुलित रहती है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करें और उचित गहराई पर बीज डालें, ताकि फसल का विकास सही तरीके से हो सके।
गेहूं की फसल में खाद और उर्वरक कितनी मात्रा में डालें?
अच्छी पैदावार के लिए गेहूं की फसल में संतुलित खाद प्रबंधन जरूरी है। ICAR-IIWBR की सलाह के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश की जरूरत बताई गई है। वहीं, मध्य और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश देने की सिफारिश की गई है। नाइट्रोजन की एक-तिहाई मात्रा और फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय डालें। बची हुई नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में बांटकर पहली और दूसरी सिंचाई के समय दें। Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026
ये भी देखे: मध्यप्रदेश की 3 हजार से अधिक गौशालाओं को मिलेंगे 60 करोड़ रुपये, पशुपालकों को भी मिलेगा 1 लाख का पुरस्कार
गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण कैसे करें?
गेहूं की फसल में गुल्ली डंडा (फैलारिस माइनर) सहित कई प्रकार के खरपतवार फसल की बढ़वार और उत्पादन को प्रभावित करते हैं। इनकी रोकथाम के लिए बुवाई के 0 से 3 दिन के भीतर अनुशंसित खरपतवारनाशी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए पायरोक्सासल्फोन 85 WG की 60 ग्राम मात्रा प्रति एकड़ या पेंडीमेथालिन 30 EC की 2 लीटर मात्रा प्रति एकड़ का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा एक्लोनिफेन, डाइफ्लुफेनिकन और पायरोक्सासल्फोन के रेडीमिक्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दवा का छिड़काव 150 से 200 लीटर पानी में करें। इस्तेमाल से पहले उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
गेहूं की अच्छी पैदावार लेने के लिए बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच करवाएं और जरूरत के अनुसार खाद एवं उर्वरकों का इस्तेमाल करें। धान की कटाई के बाद खेत में बचे फसल अवशेषों को जलाने से बचें। हैप्पी सीडर और स्मार्ट सीडर की मदद से फसल अवशेषों के बीच सीधी बुवाई की जा सकती है। इसके अलावा सिंचाई समय पर करें और फसल में खरपतवार एवं रोगों की नियमित निगरानी रखें। अनावश्यक रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल से बचें। Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026
किसानों के लिए जरूरी है बुवाई की समय-सीमा का ध्यान रखना
रबी सीजन 2026-27 में गेहूं की खेती करने वाले किसानों को बुवाई की तारीख का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में अगेती बुवाई के लिए 7 नवंबर तक और सामान्य समय पर बुवाई के लिए 20 नवंबर तक का समय बताया गया है। Gehu Ki Ageti Buwai Ka Sahi Samay 2026 को ध्यान में रखते हुए किसान समय पर खेत तैयार करें, प्रमाणित बीजों का चयन करें और अपने क्षेत्र के अनुसार कृषि विशेषज्ञों की सलाह अपनाएं। इससे फसल का बेहतर विकास करने और अच्छी पैदावार प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

1 Comment