Swarn Anmol Tomato Variety Success Story: टमाटर की खेती में अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए उन्नत बीजों का चयन करना बेहद जरूरी है। त्रिपुरा के धलाई जिले के किसान कृष्ण गोपाल दास ने Swarn Anmol Tomato Variety Success Story के जरिए साबित किया है कि सही किस्म और वैज्ञानिक खेती तकनीक अपनाकर कम जमीन से भी अच्छी कमाई की जा सकती है। पहले उनकी टमाटर की फसल में बैक्टीरियल विल्ट रोग का प्रकोप अधिक रहता था, जिससे पौधे सूख जाते थे और उत्पादन प्रभावित होता था। लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में स्वर्ण अनमोल हाइब्रिड किस्म अपनाने के बाद उनकी खेती की तस्वीर बदल गई।
बैक्टीरियल विल्ट रोग से परेशान थे किसान
Swarn Anmol Tomato Variety Success Story त्रिपुरा के धलाई जिले के उत्तरी कचुचेरा गांव में किसान कृष्ण गोपाल दास लंबे समय से टमाटर की खेती कर रहे थे। उनके सामने सबसे बड़ी समस्या बैक्टीरियल विल्ट यानी जीवाणु जनित मुरझा रोग की थी। इस बीमारी के कारण टमाटर के पौधे अचानक मुरझाकर सूखने लगते थे, जिससे फसल में काफी नुकसान होता था। इसके अलावा टमाटर लीफ कर्ल, अर्ली ब्लाइट, लेट ब्लाइट और फल छेदक कीट भी किसानों के लिए परेशानी बने हुए थे। लगातार होने वाले नुकसान से खेती की लागत बढ़ रही थी और किसानों का मुनाफा कम हो रहा था।
Swarn Anmol Tomato Variety Success Story की शुरुआत कैसे हुई?
किसानों की इस समस्या को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), धलाई ने नई हाइब्रिड किस्म को बढ़ावा दिया। ICAR-ATARI जोन VII, उमियम, मेघालय की तकनीकी देखरेख में ICAR-RCER, पटना द्वारा विकसित स्वर्ण अनमोल किस्म किसानों को उपलब्ध कराई गई कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बेहतर नर्सरी तैयार करने, उचित दूरी पर पौधों की रोपाई करने और संतुलित पोषण प्रबंधन की जानकारी दी। इसके बाद कृष्ण गोपाल दास ने अपने खेत में इस किस्म की खेती शुरू की। Swarn Anmol Tomato Variety Success Story
NS 962 से बेहतर साबित हुई स्वर्ण अनमोल किस्म
इससे पहले किसान NS 962 हाइब्रिड टमाटर किस्म की खेती करते थे। हालांकि इसके फल बड़े होते थे, लेकिन बैक्टीरियल विल्ट रोग के कारण गर्म और उमस भरे मौसम में पौधों के सूखने की समस्या अधिक थी। स्वर्ण अनमोल किस्म में पौधों के जीवित रहने की दर बेहतर दर्ज की गई। रोपाई के बाद इस किस्म के 94.6 प्रतिशत पौधे जीवित रहे, जबकि NS 962 में यह आंकड़ा 84.8 प्रतिशत था। वहीं, स्वर्ण अनमोल में बैक्टीरियल विल्ट का प्रकोप केवल 1.8 प्रतिशत रहा। इसके अलावा लीफ कर्ल और झुलसा रोग का असर भी तुलनात्मक रूप से कम देखने को मिला।
Swarn Anmol Tomato Variety Success Story में मिले शानदार उत्पादन के आंकड़े
स्वर्ण अनमोल हाइब्रिड किस्म ने उत्पादन के मामले में भी बेहतर परिणाम दिए। इस किस्म में प्रति पौधा औसतन 47.2 फल प्राप्त हुए। प्रत्येक फल का औसत वजन लगभग 68.4 ग्राम रहा। उत्पादन की तुलना करें तो स्वर्ण अनमोल किस्म से प्रति हेक्टेयर 58.60 टन यानी 586 क्विंटल टमाटर प्राप्त हुए। वहीं, पुरानी NS 962 किस्म से 45.20 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिला। इस तरह स्वर्ण अनमोल किस्म से प्रति हेक्टेयर लगभग 13.40 टन अधिक उत्पादन हासिल हुआ। इससे किसानों को बाजार में बेचने के लिए अधिक उपज मिली और उनकी आमदनी बढ़ी।
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छोटी जमीन से कमाया 1,09,280 रुपये का शुद्ध मुनाफा
कृष्ण गोपाल दास के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि उनकी कमाई में हुई बढ़ोतरी रही। उन्होंने लगभग 0.16 हेक्टेयर जमीन पर स्वर्ण अनमोल टमाटर की खेती की। इस छोटे से क्षेत्र से उन्हें 1,09,280 रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हुआ। यह पुरानी NS 962 किस्म की तुलना में लगभग 30,880 रुपये अधिक था। इस सफलता ने किसान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ आसपास के दूसरे किसानों को भी उन्नत हाइब्रिड किस्मों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। Swarn Anmol Tomato Variety Success Story
टमाटर की अच्छी पैदावार के लिए अपनाई ये वैज्ञानिक तकनीकें
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को केवल उन्नत बीज ही नहीं दिए, बल्कि खेती की सही तकनीक भी समझाई। अच्छी पैदावार के लिए खेत में उठी हुई क्यारियां तैयार की गईं, जिससे अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। नर्सरी प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया और पौधों को उचित दूरी पर लगाया गया। इसके साथ ही संतुलित पोषण, समय पर सिंचाई, पौधों को सहारा देने के लिए स्टेकिंग और जल निकासी की उचित व्यवस्था की गई। इन वैज्ञानिक तरीकों से फसल में रोगों का खतरा कम करने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिली।
Swarn Anmol Tomato Variety Success Story से किसानों को मिली नई उम्मीद
त्रिपुरा के धलाई जिले में स्वर्ण अनमोल किस्म की सफलता दूसरे टमाटर किसानों के लिए भी प्रेरणादायक बन रही है। इस किस्म ने दिखाया है कि रोगों से होने वाले नुकसान को कम करके खेती की कमाई बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, किसी भी हाइब्रिड किस्म का प्रदर्शन क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और खेती के प्रबंधन पर निर्भर करता है।
इसलिए किसानों को बड़े क्षेत्र में इसकी खेती शुरू करने से पहले अपने स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेनी चाहिए। Swarn Anmol Tomato Variety Success Story यह बताती है कि उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती और सही फसल प्रबंधन के तालमेल से किसान कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन और मुनाफा हासिल कर सकते हैं।

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