Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai कैसे करे मशरूम की खेती

Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai कैसे करे मशरूम की खेती

Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai आज से कुछ समय पहले तक मशरूम की खेती का प्रचलन कम था, लेकिन पिछले कुछ वर्षो में इसकी मांग बढ़ रही हैं, लेकिन मांग के अनुसार इसका उत्पादन कम हो रहा हैं, इसलिए मशरूम की खेती के लिए अब सरकार को अन्य संस्था द्वारा कई योजना और शिक्षा कार्यकम चालये जा रहे हैं, जिसे किसान इसका लाभ ले कर अपनी अतिरिक्त आय बड़ा सकते हैं, जो कम लागत में बड़ा मुनाफा दे सकते हैं, हाल समय में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महारष्ट्र मशरूम के सब से बड़े उत्पादक प्रदेश हैं।मशरूम को खुम्ब,खुंभी,कुकुरमुत्ता, आदि नामो से भी जाना जाता है। Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai

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पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान मशरूम की खेती की तरफ तेजी से बढ़ा है, मशरूम की खेती बेहतर आमदनी का जरिया बन सकती है। बस कुछ बातों का ध्यान रखना होता है, बाजार में मशरूम का अच्छा दाम मिल जाता है। Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai

मशरूम की पौष्टिकता एवं औषधीय गुण

मशरूम एक पूर्ण स्वास्थ्यवर्धक है जो सभी लोगों बच्चों से लेकर वृद्ध तक के लिए अनुकूल है इसमे प्रोटीन, रेशा, विटामिन तथा खनिज लवण प्रचुर मात्रा में पाये जाते है ताजे मशरूम में 80-90 प्रतिशत पानी होता है तथा प्रोटीन की मात्रा 12- 35 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट 26-82 प्रतिशत एवं रेशा 8-10 प्रतिशत होता है मशरूम में पाये जाने वाला रेशा पाचक होता है। मशरूम में पाये जाने वाले पोषक तत्व Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai


औषधीय गुण

मशरूम शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढाता है स्वास्थ्य ठीक रहता है कैंसर की सम्भावना कम करता है गॉठ की वृद्धि को रोकता है, रक्त शर्करा को सन्तुलित करता है। मशरूम निम्न रोगों में लाभदायक है।

  1. हृदय के लिए
  2. मधुमेह के रोगियों एवं मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए
  3. कैंसर रोधी प्रभाव

भारत में उगाई जाने वाली मशरूम की किस्में

विश्व में खाने योग्य मशरुम की लगभग 10000 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 70 प्रजातियां हीं खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। भारतीय वातावरण में मुख्य रुप से पांच प्रकार के खाद्य मशरुमों की व्यावसायिक स्तर पर खेती की जाती है। जिसका वर्णन निम्नलिखित है। Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai

सफेद बटन मशरुम , ढींगरी (ऑयस्टर) मशरुम, दूधिया मशरुम, पैडीस्ट्रा मशरुम ,शिटाके मशरुम

मशरूम फार्मिंग के लिए कितनी जगह चाहिए?

दोस्तों मशरूम को खुली जगह या खुले मैदान में नहीं उगाया जा सकता। इसलिए लोग इसे उगाने के लिए कोई झोपड़ी या वेंटिलेटेड रूम बनाते हैं। मशरूम फार्मिंग की शुरुआत आप एक झोपड़ी बनाकर कर सकते हैं। झोपड़ी का एरिया 1300 स्क्वायर फीट से 1500 स्क्वायर फीट होना चाहिए। हम मान कर चलते हैं कि हमारे झोपड़ी का एरिया 1500 स्क्वायर फीट है। अब हम आगे के सारे मानक जैसे कि कंपोस्ट, एग्रीकल्चरल दवाएं और इसमें लगने वाला पूरा खर्च झोपड़ी के एरिया के हिसाब से ही तय करेंगे। इससे आपको एक सटीक अंदाजा होगा कि आप कितना पैसा इन्वेस्ट करके कितना कमा सकते हैं।

मशरूम उत्पादन के लिए उपयुक्त मौसम

सितम्बर महीने से नवंबर तक ढ़िगरी मशरूम की खेती कर सकते हैं, इसके बाद फरवरी से मार्च माह तक बटन मशरूम की खेती की जा सकती हैं, और जून से जुलाई तक मिल्की मशरूम का उत्पादन कर सकते हैं, इस तरह से आप पुरे वर्ष मशरूम की खेती कर लाभ कमा सकते हैं, और इस खेती को किसान अपनी परम्परागत खेती के साथ कर सकते हैं। Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai

मशरूम की खेती के लिए सभी प्रकार की जलवायु उपयुक्त होती है, और इसकी खेती छोटे कमरों से लेकर बड़े स्थानों तक की जा सकती है, मशरूम की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक बीज है, जिसे स्पॉन भी कहा जाता है, स्पॉन तैयार करने के लिए गेहूं के बीज सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं, इसके लिए अच्छी गुणवत्ता वाले गेहूं का उपयोग करें, अन्यथा मशरूम की गुणवत्ता खराब हो सकती है, शुरूवात करने के लिए स्पॉन किसी भी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था या किसी कृषि संस्थान से लिया जाना चाहिए, जिसकी कीमत ३० से लेकर ५० रुपये प्रति किलो तक होती है Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai

आधार सामग्री की तैयारी

मशरूम की खेती हेतु गेहूँ के भूसे को बोरे में रात भर के लिए साफ पानी में भिगो दिया जाता है यदि आवश्यक हो तो 7 ग्राम कार्बेन्डाइजिन (50 प्रतिशत) तथा 115 मिली0 फार्सलीन प्रति 100 लीटर पानी की दर से मिला दिया जाता है, इसके पश्चात भूसे को बाहर निकालकर अतिरिक्त पानी निथारकर अलग कर दिया जाता है और जब भूसे से लगभग 70 प्रतिशत नमी रह जाये तब यह बिजाई के लिए तैयार हो जाता है। Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai

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बुवाई करना

बुवाई के पहले जिस कमरे में मशरूम की थैली रखना हो उस कमरे को 2 प्रतिशत फार्मलीन से उपचारित कर लेना चाहिए. ५० किग्रा सूखे भूसे के लिए 5 किलो बीज की आवश्यकता पड़ती है, ध्यान रहे बीज 20 दिन से ज्यादा पुराना न हो, सर्दी और गर्मी के अनुसार मशरूम की प्रजाति का चयन करना जरूरी रहता है.

बीजाई करने के लिए 4 किलो की क्षमता वाली पोलिथीन की थैली में 4 किलो गीले भूसे में लगभग 100 ग्राम बीज अच्छी तरह से मिला कर भर दें, इस बात का ध्यान रखें कि थैली के अंदर हवा ना जाए. अब पोलिथीन को मोड़कर रबड़ बेंड से बंद कर दें. इसके बाद पोलिथीन के चारों और लगभग 5 मिमी. के 10-15 छेद कर दें. Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai

बुवाई के बाद रखरखाव

बीजाई करने के पश्चात् थैलियों को उपचारित किये गए कमरे में रख देना चाहिए, और 2 से 4 दिन बाद बेग का निरीक्षण करना चाहिए, अगर किसी बैग में हरा, काला या नीले रंग की फंफूद या मोल्ड दिखाई दे तो ऐसे बैगों को कमरे से निकाल कर नष्ट कर देना चाहिए, अगर बैग तथा कमरे का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ने लगे तो कमरे की दीवारों तथा छत पर पानी का छिड़काव दो से तीन बार करे या कूलर का उपयोग करे।

इसका ध्यान रखना चाहिए कि बैगों पर पानी जमा न हो। लगभग 15 से 25 दिनों में मशरूम का कवक जाल सारे भूसे पर फैल जायेगा तथा बैग सफेद नजर आने लगेंगे। इस स्थिति में पाॅलीथीन को हटा लेना चाहिए। गर्मियों के दिनों में (अप्रैल-जून) पाॅलीथीन को पूरा नहीं हटाना चाहिए क्योंकि बैगों में नमी की कमी हो सकती है। पाॅलीथीन हटाने के बाद फलन के लिए कमरे में तथा बैगों पर दिन में दो से तीन बार पानी का छिड़काव करना चाहिए। कमरे में लगभग 6 से 8 घंटे तक प्रकाश देना चाहिए या कमरों में टयूबलाईट का प्रबंधन होना चाहिए। Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai

तुड़ाई

लगभग 15 से 25 दिन बाद या मशरूम के बाहरी किनारे ऊपर मुड़ने लगे तो मशरूम की पहली तुड़ाई कर लेनी चाहिए. मशरूम को नीचे से हल्का सा मोड़ने से मशरूम टूट जाती है. पहली फसल के 8-10 दिन बाद दूसरी तुड़ाई की जा सकती है. इस प्रकार तींन बार उत्पादन लिया जा सकता है. एक किलो सूखे भूसे से लगभग 600 से 650 ग्राम तक पैदावार मिलती है Mashroom Ki Kheti Kese Hoti Hai

भण्डारण/ बाजार

भण्डारण/ बाजार

तुड़ाई के तुरंत बाद मशरूम को थैली में नहीं रखना चाहिए,लगभग 3 घंटे के बाद इन्हे पैक करना चाहिए, इन मशरूम को पूर्ण रूप से सूखा कर भी बेचा जा सकता है, इस मशरूम की खेती में लगने वाली लागत 10 से 15 रूपर प्रति बेग होती है और मशरूम का मूल्य 200 से 300 रुपए प्रति किग्रा होती है।

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