Bakari Palan Me Kya Sawdhani Rkhe भारत जैसे देशो में पशु पालन व्यवसाय सदियों से चला रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन तो आय का प्रमुख स्रोत रहा है। ऐसा ही एक बहुत ही लोकप्रिय है उन में से एक है बकरी पालन व्यवसाय बकरी एक बहुउपयोगी, सीधा-साधा, किसी भी वातावरण में आसानी से ढलने वाला छोटा पशु है जो अपनी रहन-सहन व खान-पान सम्बंधित आदतों के कारण सबका चाहता पशु है। तो आइए जानें बकरी पालन में कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए जिससे की आप ज्यादा मुनाफा कमा सकें. Bakari Palan Me Kya Sawdhani Rkhe

बकरी पालन में सफलता के लिए कुछ जरूरी सावधानियां रखना बहुत महत्वपूर्ण है। बकरी पालकों को निम्नलिखित बातों पर ध्यान देनी चाहिए
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सबसे पहले करें शेड की व्यवस्था
अक्सर देखा जाता है कि गर्मी शुरू होते ही किसान शेड के पर्दे या बोरे हटा देते हैं. लेकिन अचानक हुई बारिश बकरियों को ठंड की चपेट में ले आती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब आपको रेज़्ड प्लेटफॉर्म यानी जमीन से थोड़े ऊंचे बाड़े बनाने चाहिए जिससे नीचे से हवा का वेंटिलेशन बना रहे और नमी न रुके. Bakari Palan Me Kya Sawdhani Rkhe
- बाड़े की छत ऐसी हो जो गर्मी में ठंडी और सर्दी में गर्माहट दे सके. इसके साथ ही अचानक ठंड बढ़ने पर तुरंत कवर करने के लिए मजबूत पर्दों का इंतजाम रखें.
- फर्श पर हमेशा सूखा बिछावन रखें क्योंकि गीली जगह बीमारियों का सबसे बड़ा गढ़ होती है. खासकर मेमनों के लिए सूखा बिस्तर लाइफ-सेवर होता है.
शेड मैनेजमेंट में की गई यह छोटी सी समझदारी आपके इलाज के भारी-भरकम खर्च को जीरो कर सकती है. Bakari Palan Me Kya Sawdhani Rkhe
खानपान का रखें खास ध्यान
बदलते मौसम में बकरियों की एनर्जी लेवल और इम्यूनिटी काफी गिर जाती है. इसलिए उनके खानपान में बदलाव करना बहुत जरूरी है. जब भी तापमान गिरे या बारिश हो. उन्हें एक्स्ट्रा एनर्जी देने के लिए दाना और संतुलित आहार की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए. जिससे उनका शरीर अंदर से गर्म रहे.
- बकरियों को हमेशा साफ और हल्का गुनगुना पानी दें. क्योंकि एकदम ठंडा पानी उन्हें तुरंत बीमार कर सकता है.
- आहार में मिनरल मिक्सचर और विटामिन्स का सही बैलेंस रखें जिससे उनकी नेचुरल रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे और वे मौसम की मार झेल सकें.
सही पोषण ही वह कवच है जो आपकी बकरियों को बिना किसी दवा के अंदरूनी तौर पर मजबूत बनाए रखता है. Bakari Palan Me Kya Sawdhani Rkhe
सही नस्ल का चुनाव करें
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बिजनेस शुरू करते समय ऐसी नस्लों का चुनाव करें. जो आपके लोकल मौसम के हिसाब से खुद को ढाल सकें. जैसे ब्लैक बंगाल ब्रीड अपनी अडैप्टेबिलिटी के लिए मशहूर है. इसके साथ ही मौसम बदलने से पहले ही जरूरी बीमारियों के टीके लगवाना जरूरी है.
- लोकल एनवायरनमेंट के प्रति फ्रेंडली नस्लें पालने से बीमारी का रिस्क 50% तक कम हो जाता है और मेंटेनेंस भी आसान रहता है.
- मौसम के पूर्वानुमान (Weather Forecast) पर नजर रखें और बारिश या आंधी आने से पहले ही पशुओं को सुरक्षित शेड के अंदर शिफ्ट कर दें.
साइंटिफिक तरीके और सही ब्रीड का कॉम्बिनेशन ही आपके बकरी पालन के बिजनेस को लॉन्ग-टर्म में सक्सेसफुल बनाएगा. Bakari Palan Me Kya Sawdhani Rkhe
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चारा और पोषण प्रबंधन
- प्राकृतिक चारा: बकरियाँ हरे चारे (बर्सीम, लूसर्न, नेपियर घास) और सूखे चारे (भूसा, गन्ने की पत्तियाँ) को पसंद करती हैं। प्रति बकरी 2-3 किग्रा हरा चारा और 200-300 ग्राम सूखा चारा रोज दें।
- दाना (Concentrate Feed): गर्भवती, दूध देने वाली, या बढ़ते बच्चों के लिए प्रोटीन युक्त दाना (गेहूँ, मक्का, चोकर, खल) दें। प्रति बकरी 200-400 ग्राम दाना रोज।
- पानी: साफ और ताजा पानी हमेशा उपलब्ध रखें (प्रति बकरी 3-5 लीटर/दिन)।
- खनिज और विटामिन: कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन सप्लीमेंट (खनिज मिश्रण) दें, विशेषकर दूध उत्पादन के लिए।
- चराई: यदि चराई संभव हो, तो बकरियों को 4-6 घंटे चरने दें, लेकिन जहरीले पौधों (जैसे लटजीरा) से बचाएँ।
टीकाकरण
सभी बकरियों को क्लोस्ट्रिडियल से होने वाली 5 बीमारियों के खिलाफ टीका लगवाना आवश्यक है। इनमें एंटरोटॉक्सिमिया (पल्पी किडनी), टेटनस, ब्लैकलेग, मैलिग्नेंट एडिमा (गैस गैंग्रीन) और ब्लैक डिजीज शामिल हैं।
इसके अलावा, बकरियों को कोक्सीडिया नामक परजीवी से बचाव के लिए टीका लगवाने पर भी विचार करें, जो लगभग सभी बकरियों में पाया जाता है। तनावग्रस्त होने या अचानक मौसम परिवर्तन के संपर्क में आने पर बकरियों में कोक्सीडिया का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है।
अपने पशु चिकित्सक से बात करें और उनसे सलाह लें कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या है। मैंने भी कई बार ऐसा नहीं किया है, इसलिए अपने पशु चिकित्सक के साथ मिलकर तय करें कि आपके जानवर के लिए सबसे अच्छा क्या है। Bakari Palan Me Kya Sawdhani Rkhe
उनके खुरों की छंटाई करना
बकरियों के खुरों को समय-समय पर काटना आवश्यक है क्योंकि उनके खुर इंसानों के नाखूनों की तरह लगातार बढ़ते रहते हैं। बढ़े हुए खुरों से लंगड़ापन, संक्रमण और चोट लग सकती है। साथ ही, बकरी के बड़े होने पर हड्डियों की संरचना में विकृति आने का खतरा भी बढ़ जाता है।
उनके खुरों को नियमित रूप से, अधिमानतः हर 2-3 महीने में, ट्रिम करें ताकि उनके खुर स्वस्थ रहें और वे ठीक से चल सकें। आप इस दिशानिर्देश का पालन करके इसे स्वयं कर सकते हैं या अपने स्थानीय पशु चिकित्सक से सहायता ले सकते हैं।
अगर आपकी बकरियां पथरीले इलाकों में घूमती हैं और काफी सक्रिय हैं, तो उनके खुरों की छंटाई कम ही करनी पड़ेगी। हम एक पथरीले इलाके में रहते हैं, इसलिए हमारी बकरियों के खुरों की छंटाई की उतनी जरूरत ही नहीं पड़ती! Bakari Palan Me Kya Sawdhani Rkhe
मौसम का ध्यान
- गर्मी: छाया और ठंडा पानी जरूरी
- सर्दी: शेड को ढककर रखें, ठंडी हवा से बचाव
- बरसात: नमी और कीचड़ से दूर रखें
भीड़भाड़ से बचाव
एक जगह ज्यादा बकरियां रखने से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ता है। हर बकरी के लिए पर्याप्त जगह रखें और नई या बीमार बकरियों को अलग रखें (isolation)।

