जैविक खेती कैसे करे Jaivik Kheti Kese Hoti He

जैविक खेती कैसे करे Jaivik Kheti Kese Hoti He

Jaivik Kheti Kese Hoti He जैविक खेती (Organic Farming) वह खेती है जिसमें रासायनिक खाद, कीटनाशक और हानिकारक दवाइयों का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि प्राकृतिक तरीकों जैसे गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद और जैविक कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। इस खेती का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखना, पर्यावरण की सुरक्षा करना और लोगों को स्वस्थ व सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना होता है। आजकल बाजार में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए किसान इस खेती से ज्यादा कीमत और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इस क्षेत्र में National Centre of Organic Farming और Paramparagat Krishi Vikas Yojana जैसी योजनाएं ट्रेनिंग और सहायता भी प्रदान करती हैं। Jaivik Kheti Kese Hoti He

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जैविक खेती का अर्थ 

जैविक खेती का अर्थ कृषि उत्पादन प्रणाली से है जो हरी खाद, खाद, जैविक कीट नियंत्रण और फसलों, पशुधन और मुर्गी पालन के लिए फसल चक्र पर निर्भर करती है। जैविक खेती वृक्षारोपण फार्म में पारिस्थितिक जैव विविधता के विकास पर निर्भर है ताकि कीटों और बीमारियों के निवास को बाधित किया जा सके और मिट्टी की उर्वरता के सार्थक रखरखाव और सुधार को सुनिश्चित किया जा सके। Jaivik Kheti Kese Hoti He

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जैविक खेती की मुख्य विशेषताएं

  • रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं
  • प्राकृतिक खाद और जैविक विधियों का इस्तेमाल
  • मिट्टी की संरचना और उर्वरता में सुधार
  • पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित उत्पादन
  • लंबे समय तक स्थायी खेती (Sustainable Farming)

जैविक खेती से होने वाले लाभ

कृषकों की दृष्टि से लाभ

  • भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है।
  • सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है।
  • रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है।
  • फसलों की उत्पादकता में वृद्धि।
  • बाज़ार में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में भी वृद्धि होती है |

मिट्टी की दृष्टि से

  • जैविक खाद के उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है।
  • भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती हैं।
  • भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम होगा।

पर्यावरण की दृष्टि से

  • भूमि के जल स्तर में वृद्धि होती है। भूमि के जल मे स्तर मे वृद्धि क्रिया शील होता हैं।
  • मिट्टी, खाद्य पदार्थ और जमीन में पानी के माध्यम से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है।
  • कचरे का उपयोग, खाद बनाने में, होने से बीमारियों में कमी आती है।
  • फसल उत्पादन की लागत में कमी एवं आय में वृद्धि
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्पर्धा में जैविक उत्पाद की जैविक क्रिया बड़ गुणवत्ता का खरा उतरना।

जैविक खेती, की विधि रासायनिक खेती की विधि की तुलना में बराबर या अधिक उत्पादन देती है अर्थात जैविक खेती मृदा की उर्वरता एवं कृषकों की उत्पादकता बढ़ाने में पूर्णत: सहायक है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में जैविक खेती की विधि और भी अधिक लाभदायक है। जैविक विधि द्वारा खेती करने से उत्पादन की लागत तो कम होती ही है इसके साथ ही कृषक भाइयों को आय अधिक प्राप्त होती है तथा अंतराष्ट्रीय बाजार की स्पर्धा में जैविक उत्पाद अधिक खरे उतरते हैं। Jaivik Kheti Kese Hoti He

जिसके फलस्वरूप सामान्य उत्पादन की अपेक्षा में कृषक भाई अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आधुनिक समय में निरन्तर बढ़ती हुई जनसंख्या, पर्यावरण प्रदूषण, भूमि की उर्वरा शकि्त का संरक्षण एवं मानव स्वास्थ्य के लिए जैविक खेती की राह अत्यन्त लाभदायक है। मानव जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए नितान्त आवश्यक है कि प्राकृतिक संसाधन प्रदूषित न हों, शुद्ध वातावरण रहे एवं पौषि्टक आहार मिलता रहे, इसके लिये हमें जैविक खेती की कृषि पद्धतियाँ को अपनाना होगा जोकि हमारे नैसर्गिक संसाधनों एवं मानवीय पर्यावरण को प्रदूषित किये बगैर समस्त जनमानस को खाद्य सामग्री उपलब्ध करा सकेगी तथा हमें खुशहाल जीने की राह दिखा सकेगी। Jaivik Kheti Kese Hoti He

जैविक खेती के तरीके

जैविक खेती के तरीके प्राचीन हैं और पृथ्वी के लिए अच्छे हैं।

  • फसल चक्र: मिट्टी को पोषण देने और कीटों को रोकने के लिए पौधों को बदलते रहें।
  • खाद बनाना: कचरे का उपयोग मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए किया जाता है।
  • प्राकृतिक कीट नियंत्रण: हानिकारक कीटों से लड़ने के लिए अच्छे कीट या नीम का उपयोग करें।
  • कोई मिलावटी चीज़ या बदले हुए बीज नहीं: शुद्धता बनाए रखें।

जैविक खेती की ये पद्धतियाँ मिट्टी को मजबूत बनाती हैं। ये कीटनाशकों से होने वाले मिट्टी के प्रदूषण को कम करती हैं । Jaivik Kheti Kese Hoti He

उद्देश्य

जैविक खेती का मुख्य उद्देश्य कृषि प्रणाली को अधिक संतुलित, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है। इसके तहत निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखा जाता है:

  1. मिट्टी की उर्वरता और जैविक संरचना को बनाए रखना और सुधारना। रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खाद और हरी खाद का उपयोग कर मृदा स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना।
  2. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण। जल, वायु और भूमि को प्रदूषण से मुक्त रखना एवं पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता बनाए रखना।
  3. स्वस्थ एवं सुरक्षित खाद्य उत्पादन। मानव स्वास्थ्य के लिए रासायन-मुक्त और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना।
  4. स्थायी कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना। दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ खेती की ऐसी प्रणाली विकसित करना जो आर्थिक, सामाजिक और पारिस्थितिक रूप से लाभकारी हो।
  5. कृषकों की आत्मनिर्भरता एवं आय में वृद्धि। स्थानीय संसाधनों पर आधारित खेती से लागत को कम करना और जैविक उत्पादों के बाज़ार मूल्य के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना।
  6. जैव विविधता का संरक्षण। परंपरागत बीजों और स्थानीय प्रजातियों का प्रयोग कर जैव विविधता को बढ़ावा देना।

मार्केटिंग और कमाई

जैविक उत्पादों की मांग शहरों, सुपरमार्केट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तेजी से बढ़ रही है। किसान अपने प्रोडक्ट को सीधे ग्राहक तक (Direct Selling), किसान बाजार, या ब्रांड बनाकर बेच सकते हैं। “Organic” टैग के कारण प्रोडक्ट का मूल्य सामान्य से अधिक मिलता है, जिससे मुनाफा बढ़ता है।

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