पंजाब में गेहूं खरीद के बाद उठान और ढुलाई में हो रही देरी से स्थिति गंभीर होती जा रही है। मंडियों में पड़ा गेहूं तेज गर्मी के कारण खराब होने लगा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
राजनीतिक खींचतान और ठेकेदारों के विवाद के चलते अब तक केवल करीब 33 फीसदी ही उठान हो पाया है। इस धीमी प्रक्रिया के कारण कमीशन एजेंटों और किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है और व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam

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पंजाब में गेहूं उठान की स्थिति लगातार बिगड़ती नजर आ रही है, खासकर फरीदकोट जिले में हालात ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं। मंडियों में खरीदे गए गेहूं की ढुलाई और उठान में हो रही देरी अब बड़ी समस्या का रूप ले चुकी है। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam
कमीशन एजेंटों और खाद्य खरीद एजेंसियों के मुताबिक, राजनीतिक दखल और ट्रांसपोर्ट व लेबर ठेकेदारों के बीच चल रहे टकराव के कारण मंडियों से गोदामों तक गेहूं पहुंचाने में रुकावट आ रही है। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam
इस देरी का सीधा असर गेहूं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। बड़ी मात्रा में बोरी में भरा गेहूं खुले आसमान और तेज गर्मी में पड़ा रहने से उसका वजन घट रहा है और गुणवत्ता भी खराब हो रही है। ऐसे में कमीशन एजेंटों का कहना है कि बिना किसी गलती के उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिससे उनमें काफी नाराजगी देखी जा रही है। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, खरीद सीजन शुरू हुए 27 दिन बीत जाने के बाद भी मंडियों से केवल करीब 33 फीसदी गेहूं का ही उठान हो पाया है। यह स्थिति साफ तौर पर उठान और ढुलाई व्यवस्था में गंभीर सुस्ती को दर्शाती है। इस मुद्दे पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे किसानों, आढ़तियों और संबंधित एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam
रविवार शाम तक जिले की मंडियों में कुल 3,93,625 मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज की गई, जिसमें से 3,74,680 मीट्रिक टन की खरीद विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है। इसके बावजूद, खरीदे गए गेहूं में से अब तक केवल 1,33,708 मीट्रिक टन का ही उठान हो सका है, जो जमीनी स्तर पर गंभीर बाधाओं की ओर इशारा करता है। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam
लगातार हो रही इस देरी के कारण मंडियों में गेहूं का भारी स्टॉक जमा हो गया है। खुले में रखे बोरे तेज गर्मी और मौसम के प्रभाव से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वजन घटने और गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे हालात में समय पर उठान नहीं होने से किसानों और आढ़तियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि पूरी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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गेहूं उठान में आएगी तेजी?
फरीदकोट की डीसी पूनमदीप कौर ने कहा है कि आने वाले दिनों में गेहूं उठान की प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्रशासन स्तर पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मंडियों में जमा गेहूं को जल्द से जल्द गोदामों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुधारी जाएगी, ताकि किसानों और आढ़तियों को हो रहे नुकसान को कम किया जा सके।
प्रशासन का यह भी कहना है कि ट्रांसपोर्ट और लेबर से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है। इसके जरिए उठान की गति में तेजी लाने और पूरी प्रक्रिया को सुचारु बनाने की कोशिश की जा रही है। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam
हालांकि, इन आश्वासनों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। किसानों और कमीशन एजेंटों का कहना है कि जब तक लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं होता और समय पर परिवहन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। ऐसे में सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन अपने वादों को कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से लागू करता है। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam

कमीशन एजेंटों की क्या है शिकायत
कमीशन एजेंटों का कहना है कि अब तक जितनी भी सीमित ढुलाई हुई है, उसका खर्च भी उन्हें अपनी जेब से उठाना पड़ा है। उनका आरोप है कि ट्रांसपोर्ट और लेबर ठेकेदार देरी और नुकसान को लेकर गंभीर नहीं हैं, जबकि उठान और परिवहन की पूरी जिम्मेदारी खरीद एजेंसियों और उनके ठेकेदारों की होती है। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam
एजेंटों के अनुसार, तय व्यवस्था के बावजूद जमीनी स्तर पर काम सही तरीके से नहीं हो रहा, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि मंडियों में लंबे समय तक गेहूं पड़े रहने से नुकसान बढ़ता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार पक्ष समय पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
परिवहन लागत की बात करें तो यह आमतौर पर दूरी के आधार पर तय होती है और प्रति 50 किलो बोरी या प्रति क्विंटल के हिसाब से ली जाती है। 10 किलोमीटर तक की दूरी पर यह खर्च करीब 5 से 8 रुपये प्रति बोरी होता है, जबकि ज्यादा दूरी होने पर यह 10 से 15 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच जाता है। इन दरों में लोडिंग, ढुलाई, अनलोडिंग और गोदाम में स्टैकिंग का पूरा खर्च शामिल रहता है, जो राज्य सरकार के आदेश और टेंडर शर्तों के अनुसार निर्धारित किया जाता है।
कमीशन एजेंटों का साफ कहना है कि जब जिम्मेदारी एजेंसियों और ठेकेदारों की है, तो खर्च और नुकसान का बोझ उन पर डालना उचित नहीं है। इसलिए वे मांग कर रहे हैं कि व्यवस्था को जल्द सुधारा जाए और तय नियमों के अनुसार भुगतान व उठान सुनिश्चित किया जाए। Gehu Ka Vajan Ho Rha Kam
पंजाब में गेहूं खरीदी का हाल
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक गुरजीत सिंह के अनुसार जिले में विभिन्न एजेंसियों द्वारा बड़े स्तर पर गेहूं की खरीद की गई है। इसमें सबसे ज्यादा खरीद PUNGRAIN ने की है, जिसने कुल 1,12,385 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है।
इसके बाद MARKFED ने 98,232 मीट्रिक टन, PUNSUP ने 85,604 मीट्रिक टन और पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने 66,334 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है। वहीं, निजी व्यापारियों द्वारा भी 12,125 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है।
इन आंकड़ों से साफ है कि सरकारी एजेंसियां इस बार खरीद प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं, लेकिन उठान और ढुलाई में हो रही देरी के कारण पूरी व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में खरीद के साथ-साथ समय पर उठान सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी हो गया है, ताकि मंडियों में किसी तरह की अव्यवस्था और नुकसान से बचा जा सके।
निष्कर्ष:
आम की खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किसानों के लिए एक नया और लाभकारी रास्ता खोल रहा है। कैनोपी प्रबंधन और नई प्रूनिंग मशीनों की मदद से पेड़ों की ऊंचाई नियंत्रित करना, देखभाल को आसान बनाना और उत्पादन बढ़ाना अब पहले से कहीं ज्यादा संभव हो गया है।
इन तकनीकों को अपनाकर किसान न सिर्फ श्रम और लागत कम कर सकते हैं, बल्कि फलों की गुणवत्ता में सुधार कर बेहतर बाजार मूल्य भी हासिल कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, आधुनिक बागवानी तकनीकों के साथ आम की खेती को अधिक व्यवस्थित, उत्पादक और मुनाफेदार बनाया जा सकता है, जो भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

