मूंगफली की खेती की संपूर्ण जानकारी: बुवाई, सिंचाई, रोग नियंत्रण और उत्पादन

मूंगफली की खेती की संपूर्ण जानकारी: बुवाई, सिंचाई, रोग नियंत्रण और उत्पादन

Moongfli ki kheti kaise kre : मूंगफली भारत की प्रमुख तिलहनी फसलों में से एक है। इसकी खेती राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में बड़े स्तर पर की जाती है। मूंगफली की खेती किसानों के लिए कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है। सही किस्म, उचित खाद प्रबंधन और समय पर देखभाल करके किसान इसकी पैदावार को काफी बढ़ा सकते हैं।

मूंगफली के लिए उपयुक्त भूमि और खेत की तैयारी

मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए भुरभुरी दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे फलियों का विकास प्रभावित होता है और फसल में रोग बढ़ सकते हैं।

खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें। इसके पश्चात 2-3 बार कल्टीवेटर चलाकर खेत को समतल बना लें। अंतिम जुताई के समय दीमक और अन्य कीटों से बचाव के लिए क्विनालफॉस दवा का प्रयोग करना लाभकारी रहता है। Moongfli ki kheti kaise kre

बुवाई का सही समय और बीज की मात्रा

मूंगफली की बुवाई मानसून शुरू होने के साथ की जाती है। उत्तर भारत में इसकी बुवाई का सही समय 15 जून से 15 जुलाई तक माना जाता है। समय पर बुवाई करने से अंकुरण अच्छा होता है और उत्पादन बढ़ता है।

  • गुच्छेदार किस्मों के लिए बीज मात्रा: 75-80 किलो प्रति हेक्टेयर
  • फैलने वाली किस्मों के लिए बीज मात्रा: 60-70 किलो प्रति हेक्टेयर
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बुवाई के लिए हमेशा स्वस्थ और प्रमाणित बीज का उपयोग करना चाहिए। बीज को बुवाई से पहले थाइरम, कार्बेन्डाजिम या मैनकोजेब से उपचारित करना आवश्यक होता है। इससे बीज जनित रोगों से बचाव होता है और अंकुरण बेहतर होता है। Moongfli ki kheti kaise kre

कतार दूरी और बुवाई की विधि

  • गुच्छेदार किस्मों के लिए कतार दूरी: 30 सेमी
  • फैलने वाली किस्मों के लिए कतार दूरी: 45 सेमी
  • पौधे से पौधे की दूरी: 15 सेमी

बीज को लगभग 5-6 सेमी गहराई पर बोना चाहिए। बुवाई सीड ड्रिल या हल के पीछे की जा सकती है। सही दूरी रखने से पौधों को पर्याप्त धूप और पोषण मिलता है।

खाद और उर्वरक प्रबंधन

मूंगफली दलहनी फसल होने के कारण इसे ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती। लेकिन शुरुआती बढ़वार के लिए थोड़ी मात्रा में नाइट्रोजन देना लाभकारी रहता है।

  • नाइट्रोजन: 15-20 किलो प्रति हेक्टेयर
  • फास्फोरस: 50-60 किलो प्रति हेक्टेयर
  • गोबर की खाद: 5-10 टन प्रति हेक्टेयर
  • जिप्सम: 250 किलो प्रति हेक्टेयर

गोबर की सड़ी खाद खेत की उर्वराशक्ति बढ़ाती है और मिट्टी को भुरभुरी बनाती है। जिप्सम के प्रयोग से फलियां अच्छी बनती हैं और दाने भरपूर विकसित होते हैं।

नीम खली का फायदा

मूंगफली की खेती में नीम खली का प्रयोग काफी लाभकारी माना जाता है। अंतिम जुताई के समय लगभग 400 किलो नीम खली प्रति हेक्टेयर डालने से दीमक नियंत्रण में सहायता मिलती है और उत्पादन में 15-18 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे दानों में तेल की मात्रा भी बढ़ती है। Moongfli ki kheti kaise kre

सिंचाई प्रबंधन

मूंगफली खरीफ मौसम की फसल है इसलिए सामान्य बारिश में ज्यादा सिंचाई की जरुरत नहीं होती। लेकिन यदि बारिश कम हो तो फूल आने और फलियां बनने के समय सिंचाई अवश्य करनी चाहिए। ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो। लंबे समय तक जलभराव रहने से फलियां खराब हो सकती हैं और उत्पादन घट सकता है। इसलिए खेत में पानी निकासी की उचित व्यवस्था जरूर रखें। Moongfli ki kheti kaise kre

खरपतवार नियंत्रण और निराई-गुड़ाई

मूंगफली के छोटे पौधे खरपतवार से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। इसलिए समय पर निराई-गुड़ाई करना जरूरी होता है।

  • पहली निराई: फूल आने के समय
  • दूसरी निराई: 2-3 सप्ताह बाद

यदि खेत में खरपतवार ज्यादा हों तो पेंडीमेथालिन खरपतवारनाशी का छिड़काव किया जा सकता है। इससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन बढ़ता है।

मूंगफली के प्रमुख रोग और उनका नियंत्रण

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रोजेट रोग

इस रोग में पौधे छोटे रह जाते हैं और पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। यह वायरस जनित रोग है जो माहू कीट से फैलता है। प्रभावित पौधों को तुरंत खेत से निकाल देना चाहिए और इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करना चाहिए। Moongfli ki kheti kaise kre

टिक्का रोग

इस रोग में पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं और बाद में पत्तियां सूखकर गिरने लगती हैं। इससे उत्पादन काफी कम हो सकता है। बचाव के लिए डाइथेन एम-45 का छिड़काव करना चाहिए।

प्रमुख कीट और नियंत्रण

रोमिल इल्ली

यह कीट पत्तियों को खाकर पौधे को नुकसान पहुंचाता है। इसकी रोकथाम के लिए क्विनालफॉस दवा का छिड़काव करना चाहिए।

माहू कीट

यह कीट पौधों का रस चूसता है और वायरस रोग फैलाता है। नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव लाभकारी रहता है।

सफेद लट

यह कीट जड़ों को नुकसान पहुंचाता है जिससे पौधे सूखने लगते हैं। बचाव के लिए क्लोरोपायरिफॉस से बीज उपचार करना चाहिए। अधिक प्रकोप होने पर खेत में फोरेट का प्रयोग किया जा सकता है। Moongfli ki kheti kaise kre

कटाई और भंडारण

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जब पौधे पीले पड़ने लगें और नीचे की पत्तियां गिरने लगें तब फसल की कटाई करनी चाहिए। कटाई के बाद फलियों को अच्छी तरह सुखाना जरूरी होता है। फलियों में नमी लगभग 10 प्रतिशत से कम होनी चाहिए ताकि भंडारण के दौरान फफूंदी न लगे।

उत्पादन और कमाई

मूंगफली की खेती में यदि किसान उन्नत किस्मों के बीज, संतुलित खाद प्रबंधन, समय पर सिंचाई और सही रोग-कीट नियंत्रण तकनीक अपनाते हैं, तो सिंचित क्षेत्रों में औसतन 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। अनुकूल मौसम और बेहतर देखभाल मिलने पर पैदावार इससे भी ज्यादा हो सकती है।

मूंगफली की खेती में जुताई, बीज, खाद, दवाइयों, मजदूरी और सिंचाई सहित कुल लागत लगभग 25 से 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक आती है। वहीं बाजार में अच्छे भाव मिलने पर किसानों को बेहतर मुनाफा प्राप्त होता है।

अच्छी पैदावार और सही मार्केट रेट मिलने पर किसान आसानी से शुद्ध लाभ कमा सकते हैं। इसके अलावा मूंगफली का भूसा पशुओं के चारे के रूप में उपयोग होता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का भी फायदा मिलता है। Moongfli ki kheti kaise kre

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