Gobar Gomutra se Kamaai : आज के समय में किसान सिर्फ खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पशुपालन को भी अपनी आय का अहम हिस्सा बना रहे हैं। हालांकि कई पशुपालकों को यह चिंता रहती है कि अगर गाय दूध देना बंद कर दे, तो उसका खर्च कैसे निकलेगा। लेकिन अब गाय केवल दूध का ही नहीं, बल्कि गोबर और गोमूत्र के जरिए भी कमाई का बड़ा साधन बन रही है। प्राकृतिक खेती के बढ़ते चलन के बीच ये दोनों चीजें किसानों के लिए अतिरिक्त आय और कम लागत वाली खेती का मजबूत आधार बनती जा रही हैं।
प्राकृतिक खेती में बढ़ी गोबर और गोमूत्र की मांग
रासायनिक खाद और कीटनाशकों के लगातार बढ़ते उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है और खेती की लागत भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में किसान दोबारा प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर लौट रहे हैं। प्राकृतिक खेती में गाय के गोबर और गोमूत्र का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि ये खेत की मिट्टी को स्वस्थ रखने के साथ उत्पादन लागत घटाने में मदद करते हैं।
गोबर से तैयार होती है पौष्टिक जैविक खाद

गाय के गोबर में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और कई सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद करते हैं। रासायनिक खादों के लगातार इस्तेमाल से जहां जमीन की उर्वरता घट रही है, वहीं गोबर की खाद मिट्टी को फिर से उपजाऊ बनाने का काम करती है।
आज कई किसान गोबर से वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय मिल रही है। इसके अलावा गांवों में गोबर से बने कंडे, जैविक खाद और अन्य उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
गोमूत्र से बनता है प्राकृतिक कीटनाशक
गोमूत्र का उपयोग प्राकृतिक कीटनाशक और पौधों की ग्रोथ बढ़ाने वाले घोल के रूप में किया जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, गोमूत्र का छिड़काव करने से फसलों में फफूंद और रस चूसने वाले कीटों का प्रभाव कम होता है। इससे किसानों का महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर होने वाला खर्च घट सकता है।

कई किसान गोमूत्र में नीम की पत्तियां, लहसुन और तंबाकू मिलाकर घर पर ही जैविक कीटनाशक तैयार करते हैं। इस देसी घोल के इस्तेमाल से सूंडी, माहू और अन्य हानिकारक कीटों का प्रभाव कम होता है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकते हैं। Gobar Gomutra se Kamaai
बीज उपचार में भी फायदेमंद है गोमूत्र
प्राकृतिक खेती करने वाले किसान बीज बोने से पहले उन्हें गोमूत्र मिले पानी में कुछ घंटों तक भिगोकर रखते हैं। इससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। किसानों का मानना है कि गोमूत्र आधारित घोल का नियमित उपयोग करने से फसल लंबे समय तक हरी-भरी रहती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी सुधरती है।
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कम लागत में बढ़ सकता है किसानों का मुनाफा Gobar Gomutra se Kamaai
आज खेती में बढ़ती लागत किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। खाद, दवाइयों और कीटनाशकों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती किसानों के लिए कम खर्च में बेहतर उत्पादन का विकल्प बन रही है।
विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह मॉडल काफी लाभदायक माना जा रहा है। इससे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है, खेती की लागत घटती है और जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग किसानों को बाजार में बेहतर कीमत दिलाने में सहायता कर सकती है। Gobar Gomutra se Kamaai
