अरहर की फसल में दाना भरने का समय सबसे ख़ास होता है. इस दौरान सही उर्वरक, संतुलित नमी और कीट नियंत्रण जरूरी होता है. थोड़ी सी लापरवाही से भी दाने पिचके रह सकते हैं. अगर किसान समय पर स्प्रे और देखभाल करें, तो उपज में अच्छी बढ़ोतरी और बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है.
अरहर की फसल जब फूल और फलियों से भरने लगती है, तभी असली परीक्षा शुरू होती है. यही वह समय है जो तय करता है कि खेत से औसत पैदावार मिलेगी या रिकॉर्ड उत्पादन. अगर इस समय पर सही पोषण और देखभाल मिल जाए, तो दाने मोटे, चमकदार और अच्छे वजन के बनते हैं. थोड़ी सी लापरवाही से दाने पिचके भी रह सकते हैं. इसलिए किसान इस समय खास सावधानी बरतनी चाहिए . Arahar me daana bharte hi kare ye jaruri spre, daane banege mote , chamakdar or vajandaar

दाना भरने की अवस्था है सबसे अहम
इस समय अरहर की फसल दाना भरने की अवस्था में होती है. यानी फलियों के अंदर दाने बन रहे होते हैं. यही चरण पैदावार तय करता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पोटाश और सल्फर की खास जरूरत होती है. पोटाश दानों को मजबूत और सुडौल बनाता है. साथ ही पौधे की रोग से लड़ने की ताकत भी बढ़ाता है. वहीं सल्फर दानों की गुणवत्ता सुधारता है और प्रोटीन की मात्रा बेहतर करता है.अगर बुवाई के समय ये पोषक तत्व नहीं डाले गए हों, तो अब तरल उर्वरक का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है. इससे पौधे को तुरंत पोषण मिलता है और दाने तेजी से विकसित होते हैं.दाना भरने की अवस्था है सबसे अहम मानी जाती है
इस समय अरहर की फसल दाना भरने की अवस्था में होती है. यानी फलियों के अंदर दाने बन रहे होते हैं. यही समय पैदावार तय करता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पोटाश और सल्फर की खास जरूरत होती है. पोटाश दानों को मजबूत और सुडौल बनाता है. साथ ही पौधे की रोग से लड़ने की ताकत भी बढ़ाता है. वहीं सल्फर दानों की गुणवत्ता सुधारता है और प्रोटीन की मात्रा बेहतर करता है.अगर बुवाई के समय ये पोषक तत्व नहीं डाले गए हों, तो अब तरल उर्वरक का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है. इससे पौधे को तुरंत पोषण मिलता है और दाने तेजी से विकसित होते हैं.
एनपीके और बोरॉन का सही इस्तेमाल
जब फलियों में दाना बनने लगे, तब एनपीके 0:52:34 का एक किलो प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. इसमें मौजूद फास्फोरस दानों को मजबूती देता है और पोटेशियम उनकी चमक बढ़ाता है. इससे उपज में 15 से 20% बढ़ोतरी देखी जा सकती है. इसके साथ ही 20% बोरॉन 250 ग्राम प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करें. इससे दाने फटते नहीं हैं और पूरा वजन पकड़ते हैं. फलियों में दाने अच्छे से भरते हैं और बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं. Arahar me daana bharte hi kare ye jaruri spre, daane banege mote , chamakdar or vajandaar
नमी और कीट नियंत्रण का रखें ध्यान
दाना बनते समय खेत में नमी का संतुलन बहुत जरूरी है. अगर मिट्टी में दरारें पड़ जाएं या पानी की कमी हो, तो दाने छोटे और पिचके रह जाता हैं. हल्की सिंचाई करें, लेकिन पानी जमा न होने दें. जलभराव से जड़ें कमजोर हो सकती हैं. इस समय फली छेदक कीट बड़ा खतरा होता है. इल्लियां फलियों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. बचाव के लिए समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें. जो किसान जैविक तरीका अपनाना चाहते हैं, वे समुद्री शैवाल अर्क या अमीनो एसिड टॉनिक का उपयोग कर सकते हैं.
सही समय पर कटाई भी जरूरी
अच्छी पैदावार के लिए कटाई का समय भी सही होना चाहिए. जब करीब 80%फलिया भूरी हो जाएं, तभी कटाई करें. कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह सुखाएं, लेकिन बहुत तेज धूप में ज्यादा देर न रखें. ज्यादा धूप से दानों की चमक कम हो सकती है. भंडारण भी सही तरीके से करें, ताकि दानों का वजन और गुणवत्ता बनी रहे. साफ और सूखी जगह पर स्टोर करने से बाजार तक दाने सुरक्षित रहते हैं Arahar me daana bharte hi kare ye jaruri spre, daane banege mote , chamakdar or vajandaar

