Arunachal Flood Crisis: 425 गांव बाढ़ में डूबे, 541 हेक्टेयर फसल बर्बाद, 97 हजार लोग प्रभावित

Arunachal Flood Crisis: 425 गांव बाढ़ में डूबे, 541 हेक्टेयर फसल बर्बाद, 97 हजार लोग प्रभावित

लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने अरुणाचल प्रदेश में हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। Arunachal Flood Crisis के कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गांवों का संपर्क टूट गया है, सड़कें और पुल बह गए हैं तथा हजारों परिवार राहत शिविरों और प्रशासनिक सहायता पर निर्भर हैं। इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा असर किसानों, ग्रामीणों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर देखने को मिल रहा है।

Arunachal Flood Crisis से 425 गांव जलमग्न

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार Arunachal Flood Crisis के चलते राज्य के 425 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। कई गांवों तक पहुंचने वाली सड़कें बह गई हैं और पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भी कठिनाई आ रही है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

97 हजार से अधिक लोग बाढ़ संकट से प्रभावित

Arunachal Flood Crisis का असर राज्यभर में बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 97,182 से अधिक लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि कई गांवों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक सात लोगों की मौत भी हो चुकी है।

Arunachal Flood Crisis में किसानों को सबसे बड़ा नुकसान

इस आपदा का सबसे अधिक नुकसान कृषि क्षेत्र को हुआ है। Arunachal Flood Crisis के कारण लगभग 541.75 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब गई है। धान सहित कई खरीफ फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है और आगामी उत्पादन पर भी संकट गहरा गया है।

मवेशी बहने से किसानों की बढ़ी चिंता

बाढ़ के तेज बहाव में दर्जनों मवेशी बह गए हैं, जिससे किसानों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। खेती के साथ पशुपालन पर निर्भर परिवारों के लिए Arunachal Flood Crisis ने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। स्थानीय प्रशासन नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में जुटा है।

ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

लगातार बारिश और बाढ़ ने राज्य के ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया है। Arunachal Flood Crisis के दौरान 150 सड़कें, 19 पुल, 21 पुलियां, 221 जलापूर्ति प्रणालियां, 58 सरकारी भवन, 156 बिजली लाइनें, 224 बिजली खंभे, 10 जलविद्युत परियोजनाएं, दो अस्पताल और तीन स्कूल प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा सैकड़ों मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।

कुमे नदी में आई अचानक बाढ़ से बढ़ी तबाही

सोमवार तड़के ऊपरी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद कुमे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। Arunachal Flood Crisis के दौरान कुरुंग कुमे जिले के परसी पारलो सर्किल और डामिन उपखंड में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया। हुरी और डामिन को जोड़ने वाला पुल बह गया, निरीक्षण बंगला जलमग्न हो गया और कई मकानों के साथ एक चर्च भी क्षतिग्रस्त हो गया।

भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़क संपर्क बाधित

भारी बारिश के कारण पक्के केसांग जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-13 पर बड़ा भूस्खलन हुआ, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। पश्चिम कामेंग जिले में सेला सुरंग की ओर जाने वाली सड़क का हिस्सा भी बह गया। वहीं पापुम पारे जिले में भूस्खलन के कारण पोतिन-किमिन मार्ग बंद कर दिया गया। Arunachal Flood Crisis के चलते प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा नहीं करने की अपील की है।

वन क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में

लगातार बारिश और बाढ़ का असर पर्यावरण पर भी दिखाई दे रहा है। लगभग 1,010 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलभराव से प्रभावित हुआ है। Arunachal Flood Crisis के कारण मिट्टी का कटाव बढ़ने और जैव विविधता पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

राहत और बचाव अभियान लगातार जारी

राज्य सरकार, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य तेज़ी से चला रहे हैं। जहां सड़क संपर्क उपलब्ध है वहां राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है, जबकि कटे हुए क्षेत्रों तक वैकल्पिक माध्यमों से सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है, इसलिए प्रशासन लगातार सतर्कता बरत रहा है।

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