देश के कई हिस्सों में कुछ दिन पहले तक लगातार हो रही भारी बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए थे। वहीं अब कई राज्यों में अचानक बारिश थम गई है। मौसम वैज्ञानिक इस स्थिति को Monsoon Break बता रहे हैं। इसका मतलब मानसून का खत्म होना नहीं है, बल्कि कुछ दिनों के लिए बारिश का कमजोर पड़ जाना है।
इस दौरान बादल दिखाई देते हैं, लेकिन अधिकांश इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होती। यही वजह है कि किसानों से लेकर मौसम विशेषज्ञ तक इस समय Monsoon Break पर नजर बनाए हुए हैं।
Monsoon Break क्यों होता है?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जुलाई और अगस्त के दौरान एक या दो बार ऐसी स्थिति बनती है जब मानसून की सक्रियता कुछ दिनों के लिए कम हो जाती है। इसी स्थिति को Monsoon Break कहा जाता है। यह मानसून का सामान्य हिस्सा है, लेकिन यदि इसकी अवधि लंबी हो जाए तो खेती, जलाशयों और भूजल पर असर पड़ने लगता है। ऐसे समय में बारिश का वितरण भी असमान हो जाता है और कुछ क्षेत्रों में मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहता है।
अगले कुछ दिन क्यों हैं महत्वपूर्ण?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अगले 6 से 7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत, पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में 19 से 20 जुलाई तक अच्छी बारिश की संभावना कमजोर बताई गई है। यदि Monsoon Break की स्थिति बनी रहती है तो तापमान बढ़ सकता है और उमस लोगों की परेशानी भी बढ़ा सकती है।
Monsoon Break का खरीफ फसलों पर क्या असर पड़ेगा?
देश में इस समय खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार का दौर चल रहा है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, अरहर, मूंग, उड़द और अन्य फसलें समय पर होने वाली बारिश पर निर्भर करती हैं। यदि Monsoon Break के कारण कई दिनों तक बारिश नहीं होती तो खेतों की नमी कम हो जाती है। इससे बीज अंकुरण प्रभावित हो सकता है, पौधों की बढ़वार धीमी पड़ सकती है और भविष्य में उत्पादन कम होने की आशंका बढ़ जाती है।
क्या पूरे देश में सूखे जैसे हालात बनेंगे?
फिलहाल पूरे देश में एक जैसी स्थिति नहीं है। मानसून की मुख्य ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से हट गई है, जिसके कारण बारिश का पैटर्न बदल गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अच्छी बारिश जारी रह सकती है। वहीं उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में Monsoon Break के कारण कुछ दिनों तक मौसम अपेक्षाकृत शुष्क बना रह सकता है। इसलिए पूरे देश में सूखे जैसे हालात बनने की संभावना फिलहाल नहीं मानी जा रही है।
अल नीनो क्यों बढ़ा रहा है चिंता?
इस बार मौसम वैज्ञानिकों की चिंता अल नीनो को लेकर भी बढ़ गई है। अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमीय प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसका प्रभाव अक्सर कमजोर मानसून के रूप में देखा जाता है। यदि अल नीनो मजबूत होता है तो Monsoon Break की अवधि लंबी हो सकती है और इससे खरीफ फसलों के साथ-साथ जल भंडारण पर भी असर पड़ सकता है।
कब लौट सकती है अच्छी बारिश?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जैसे ही बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनेगा, मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। स्काईमेट के अनुमान के मुताबिक 19 से 20 जुलाई के आसपास कई इलाकों में बारिश फिर से तेज होने की संभावना है। इसके बाद Monsoon Break समाप्त होने के साथ मानसूनी गतिविधियां सामान्य हो सकती हैं और किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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किसानों को क्या करना चाहिए?
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि Monsoon Break के दौरान किसानों को मौसम की जानकारी पर लगातार नजर रखनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है वहां जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करें ताकि मिट्टी की नमी बनी रहे। खेतों में खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण के उपाय अपनाएं। साथ ही स्थानीय कृषि विभाग द्वारा जारी सलाह का पालन करें और आवश्यकता पड़ने पर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों पर भी विचार करें।
आम लोगों पर Monsoon Break का क्या असर होगा?
बारिश कम होने से कई शहरों में गर्मी और उमस बढ़ सकती है। लगातार बादल रहने के बावजूद बारिश नहीं होने से मौसम असहज बना रहता है। वहीं जिन इलाकों में पहले बाढ़ जैसी स्थिति थी, वहां कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि यदि Monsoon Break लंबा चलता है तो पेयजल स्रोतों और जलाशयों में पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
अगले कुछ दिन रहेंगे बेहद अहम
इस समय देश में मौसम की दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। एक तरफ कुछ राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है, जबकि दूसरी ओर कई इलाकों में Monsoon Break के कारण बारिश कमजोर पड़ गई है। आने वाले कुछ दिन किसानों, मौसम विभाग और प्रशासन के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। यदि मानसून जल्द दोबारा सक्रिय होता है तो खरीफ फसलों को राहत मिलेगी, लेकिन बारिश में ज्यादा देरी होने पर खेती पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
