असम में आई भीषण बाढ़ ने लाखों लोगों की जिंदगी के साथ किसानों की मेहनत पर भी पानी फेर दिया है। Assam Floods Me Kisanon Ki Fasalon Ka Nuksan इस समय देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश और ब्रह्मपुत्र नदी के उफान के कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। इससे धान, जूट, चाय, सब्जियां और बांस जैसी प्रमुख फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं, जबकि किसानों के सामने दोबारा खेती शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
Assam Floods Me Kisanon Ki Fasalon Ka Nuksan: किसानों पर टूटा दोहरा संकट
इस बार आई बाढ़ ने किसानों की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है। Assam Floods Me Kisanon Ki Fasalon Ka Nuksan केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों मवेशियों के बह जाने से ग्रामीण परिवारों की आय पर भी गहरा असर पड़ा है। जिन किसानों ने खरीफ सीजन के लिए अपनी पूरी पूंजी लगाई थी, उनकी मेहनत कुछ ही दिनों में पानी में बह गई।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं।
24 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि जलमग्न
Assam Floods Me Kisanon Ki Fasalon Ka Nuksan का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 24,897.27 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ के पानी में डूब चुकी है।
सबसे अधिक नुकसान इन फसलों को हुआ है:
- धान
- जूट
- चाय बागान
- पारंपरिक सब्जियां
- बांस की खेती
लगातार जलभराव और कई स्थानों पर तटबंध टूटने के कारण किसानों की अधिकांश फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं।
25 जिलों के 1800 से अधिक गांव प्रभावित
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार राज्य के 25 जिलों के 1,800 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 9 लाख से ज्यादा लोग इस आपदा की चपेट में आए हैं और हजारों परिवारों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।सरकार ने अब तक 148 से अधिक राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां करीब 30,000 लोग रह रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पेयजल और आवश्यक सामग्री लगातार पहुंचाई जा रही है।
ब्रह्मपुत्र की बाढ़ से 41 लोगों की मौत
Assam Floods Me Kisanon Ki Fasalon Ka Nuksan के साथ-साथ यह बाढ़ जनहानि का भी बड़ा कारण बनी है। ASDMA के अनुसार अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले 24 घंटों में भी कई लोगों की जान गई, जिससे राहत एवं बचाव कार्य और तेज कर दिए गए हैं।शिवसागर, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, होजाई, जोरहाट, कामरूप, कामरूप महानगर, कार्बी आंगलोंग और नागांव सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
हजारों मवेशी बहने से किसानों की बढ़ी चिंता
Assam Floods Me Kisanon Ki Fasalon Ka Nuksan का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। हजारों मवेशियों के बह जाने से किसानों की आय का दूसरा बड़ा स्रोत भी खत्म हो गया है। कई गांवों में पशुओं के लिए चारा और सुरक्षित स्थान की कमी बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
सेना, वायुसेना और ड्रोन से पहुंचाई जा रही राहत
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना, वायुसेना, NDRF और राज्य की अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। दूर-दराज के गांवों तक राशन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामान पहुंचाने के लिए ड्रोन तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है।प्रशासन का कहना है कि जहां सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है, वहां ड्रोन और नावों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
राहत सामग्री पहुंचाने में देरी का आरोप
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि कई प्रभावित गांवों तक समय पर राहत सामग्री नहीं पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि राशन, स्वच्छ पेयजल, कपड़े, दवाइयां और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने में देरी हो रही है।उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि तकनीकी विशेषज्ञों और कृषि उपकरणों की विशेष टीम भेजी जाए, ताकि किसान जल्द दोबारा खेती शुरू कर सकें और प्रभावित परिवार अपने घरों का पुनर्निर्माण कर सकें।
हरियाणा में किसानों के लिए कृषि विभाग की नई सलाह
सरकार का दावा – राहत कार्य तेजी से जारी
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार लगातार प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचा रही है। सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में अब तक 3 लाख किलोग्राम से अधिक चावल सहित बड़ी मात्रा में राहत सामग्री वितरित की जा चुकी है। आने वाले दिनों में और अधिक सहायता भेजी जाएगी ताकि कोई भी प्रभावित परिवार जरूरी सुविधाओं से वंचित न रहे।
आगे किसानों के सामने बड़ी चुनौती
Assam Floods Me Kisanon Ki Fasalon Ka Nuksan आने वाले कृषि सीजन पर भी असर डाल सकता है। पानी उतरने के बाद किसानों को खेतों की सफाई, नई बुवाई, बीज, खाद और कृषि उपकरणों की आवश्यकता होगी। यदि समय पर सरकारी सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाता है, तो किसान जल्द खेती दोबारा शुरू कर सकेंगे। अन्यथा इस बाढ़ का असर लंबे समय तक कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर दिखाई देगा।
