Assam Rice Variety असम का जीआई (Geographical Indication) टैग प्राप्त जोहा चावल अपनी प्राकृतिक खुशबू, बेहतरीन स्वाद और उच्च पोषण गुणों के कारण देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी तेजी से पहचान बना रहा है। यह पारंपरिक धान की किस्म वर्तमान में लगभग 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती है और इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। Assam Rice Variety

खास बात यह है कि जोहा चावल का निर्यात अब यूके (UK) और इटली (Italy) जैसे यूरोपीय देशों तक पहुंच चुका है, जहां इसकी प्रीमियम क्वालिटी के कारण अच्छी कीमत मिल रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लोकप्रियता और मांग के बावजूद इस पारंपरिक किस्म का खेती क्षेत्र धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, जो किसानों और कृषि विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। Assam Rice Variety
Assam Rice Variety
जब भी असम का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले वहां की मशहूर चाय की याद आती है। लेकिन असम केवल चाय उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक धान की किस्मों के लिए भी देशभर में पहचान रखता है। राज्य के किसान बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार के धान की खेती करते हैं, जिनमें से कई किस्मों की मांग अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच चुकी है।
इन्हीं खास किस्मों में जीआई (Geographical Indication) टैग प्राप्त जोहा चावल का नाम प्रमुख है। अपनी प्राकृतिक खुशबू, बेहतरीन स्वाद और पोषक गुणों के कारण यह चावल असम के लोगों की पहली पसंद माना जाता है। अब इसकी लोकप्रियता देश की सीमाओं से निकलकर यूके (UK) और इटली (Italy) जैसे देशों तक पहुंच गई है, जहां इसकी लगातार मांग बढ़ रही है। हालांकि, बढ़ते निर्यात और वैश्विक पहचान के बावजूद इस पारंपरिक धान की खेती का रकबा समय के साथ बढ़ने के बजाय धीरे-धीरे घटता जा रहा है, जो इसके संरक्षण और उत्पादन को लेकर चिंता का विषय बनता जा रहा है। Assam Rice Variety

असम का प्रसिद्ध जोहा चावल अपनी प्राकृतिक खुशबू, बेहतरीन स्वाद और उच्च पोषण गुणों के कारण देश-विदेश में खास पहचान बना चुका है। यह असम और पूर्वोत्तर भारत में उगाई जाने वाली एक प्रीमियम सुगंधित धान की पारंपरिक किस्म है, जिसकी मांग घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी लगातार बढ़ रही है। अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और क्षेत्रीय पहचान के चलते जोहा चावल को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त हो चुका है।
इस चावल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मनमोहक प्राकृतिक सुगंध है, जो इसे बासमती सहित अन्य सुगंधित चावलों से अलग पहचान दिलाती है। इसके दाने छोटे से मध्यम आकार के होते हैं और पकने के बाद यह बेहद मुलायम, स्वादिष्ट और सुगंधित बन जाता है। यही वजह है कि जोहा चावल का उपयोग विशेष अवसरों, पारंपरिक व्यंजनों और प्रीमियम खाद्य उत्पादों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। बढ़ती वैश्विक मांग के चलते इसका निर्यात यूके (UK), इटली (Italy) समेत कई देशों में भी किया जा रहा है, जिससे किसानों के लिए बेहतर आय के अवसर पैदा हो रहे हैं।
जोहा चावल की क्या है खासियत?
जोहा चावल केवल अपने बेहतरीन स्वाद और प्राकृतिक खुशबू के लिए ही नहीं, बल्कि पोषण गुणों के कारण भी खास माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड के साथ-साथ सामान्य चावल की तुलना में अधिक प्रोटीन पाया जाता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, इसका सेवन रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) के स्तर को नियंत्रित रखने में भी सहायक हो सकता है, हालांकि इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है। Assam Rice Variety

इसकी खेती मुख्य रूप से असम की उपजाऊ ब्रह्मपुत्र घाटी में की जाती है। जोहा चावल को ‘साली’ धान के रूप में उगाया जाता है, जिसकी फसल लगभग 135 दिनों में तैयार हो जाती है और सर्दियों के मौसम में इसकी कटाई की जाती है। यह चावल असम की सांस्कृतिक विरासत का भी अहम हिस्सा है। बिहू जैसे प्रमुख त्योहारों के अलावा खीर, पुलाव, पीठा और अन्य पारंपरिक व्यंजनों में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है। मेहमानों के स्वागत और विशेष अवसरों पर भी जोहा चावल से बने व्यंजनों को विशेष महत्व दिया जाता है, जिससे इसकी सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अहम भूमिका साबित होती है। Assam Rice Variety
कितनी है जोहा चावल की पैदावार?
जोहा चावल की खेती मुख्य रूप से खरीफ (साली) सीजन में की जाती है। इसकी फसल तैयार होने में लगभग 135 से 165 दिन का समय लगता है और नवंबर से दिसंबर के बीच इसकी कटाई की जाती है। यह पारंपरिक धान की किस्म होने के कारण इसकी खेती आज भी अधिकांश किसान पारंपरिक कृषि पद्धतियों से करते हैं। खेतों में रासायनिक उर्वरकों की बजाय गोबर की खाद और अन्य जैविक खादों का अधिक उपयोग किया जाता है, जिससे इसकी गुणवत्ता और प्राकृतिक सुगंध बरकरार रहती है। Assam Rice Variety
हालांकि, अन्य आधुनिक धान किस्मों की तुलना में जोहा चावल की पैदावार अपेक्षाकृत कम होती है। औसतन करीब 1 टन प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिलता है, लेकिन इसकी प्रीमियम गुणवत्ता, विशिष्ट खुशबू और बढ़ती घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण किसानों को इसका अच्छा बाजार भाव प्राप्त होता है। यही वजह है कि कम उत्पादन के बावजूद इसकी खेती किसानों के लिए लाभदायक मानी जाती है। Assam Rice Variety
कटाई के बाद भी इसकी गुणवत्ता और प्राकृतिक सुगंध को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए पारंपरिक बांस से बने कंटेनरों (लूम) में इसका भंडारण किया जाता है। यह पारंपरिक तरीका जोहा चावल की विशेष पहचान और गुणवत्ता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Assam Rice Variety
कितने हेक्टेयर में होती है जोहा चावल की खेती?
असम का प्रसिद्ध जोहा चावल राज्य की सबसे महत्वपूर्ण पारंपरिक सुगंधित धान किस्मों में से एक माना जाता है। इसकी खेती राज्य के कुल धान क्षेत्रफल के लगभग 5 प्रतिशत हिस्से में की जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में जोहा चावल की खेती करीब 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही है, जिससे हर वर्ष लगभग 30,000 मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त होता है।
हालांकि, आधुनिक उच्च उत्पादक धान किस्मों की तुलना में जोहा चावल की पैदावार कम होती है, लेकिन इसकी अनोखी प्राकृतिक खुशबू, उत्कृष्ट स्वाद और प्रीमियम बाजार मूल्य के कारण किसानों को इसका बेहतर दाम मिलता है। यही कारण है कि कम उत्पादन के बावजूद इसकी खेती आर्थिक रूप से लाभदायक मानी जाती है और इसकी मांग देश के साथ-साथ यूके (UK), इटली (Italy) सहित कई विदेशी बाजारों में भी लगातार बढ़ रही है। Assam Rice Variety
इसके बावजूद कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में जोहा चावल का रकबा धीरे-धीरे घट रहा है। यदि इसके संरक्षण, बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीकों और निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो यह पारंपरिक धान किस्म किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ असम की कृषि और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दिला सकती है।
यूके और इटली तक पहुंचा जोहा चावल का निर्यात
असम का जीआई टैग प्राप्त जोहा चावल अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है। इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए मार्च 2026 में पहली बार असम से जोहा चावल की खेप यूनाइटेड किंगडम (UK) और इटली के लिए निर्यात की गई। यह कदम असम के किसानों और राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
करीब 25 मीट्रिक टन जोहा चावल का यह निर्यात कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और असम कृषि विभाग के सहयोग से किया गया। इसका उद्देश्य जीआई टैग प्राप्त कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना और स्थानीय किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना है।
यह निर्यात एपीडा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत जीआई टैग वाले उत्पादों के उत्पादकों और विदेशी खरीदारों के बीच सीधे व्यापारिक संबंध स्थापित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में जोहा चावल की मांग बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में इसके निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और असम के किसानों की आय बढ़ाने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
