किसानों के लिए अब गोबर बेचकर भी होगी कमाई, जानें पूरी जानकारी Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026

किसानों के लिए अब गोबर बेचकर भी होगी कमाई, जानें पूरी जानकारी Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026

Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026: गाय-भैंस पालने वाले किसानों के लिए गोबर अब अतिरिक्त कमाई का जरिया बन रहा है। गुजरात की बनास डेयरी पशुपालकों से करीब 1 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीद रही है। इससे किसानों को दूध बेचने के साथ गोबर से भी आमदनी करने का अवसर मिल रहा है। Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026 पशुपालन से जुड़े किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके तहत गोबर का इस्तेमाल बायो-सीएनजी और जैविक खाद बनाने में किया जा रहा है।

इस पहल की खास बात यह है कि पशुपालकों को गोबर बेचने के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं होती। डेयरी की ओर से घर या फार्म से गोबर खरीदा जाता है और भुगतान दूध के पैसे के साथ हर 15 दिन में सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। हालांकि, यह सुविधा संबंधित क्षेत्र में उपलब्ध होने और डेयरी की खरीद व्यवस्था पर निर्भर करती है।

Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026 में गोबर कितने रुपये किलो खरीदा जा रहा है?

बनास डेयरी की गोबर खरीद पहल के तहत पशुपालकों से करीब 1 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदा जा रहा है। इससे किसान अपने पशुओं से मिलने वाले दूध के अलावा गोबर से भी अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026 का उद्देश्य गोबर का बेहतर उपयोग करना और पशुपालकों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है।

अगर कोई पशुपालक प्रतिदिन 50 किलो गोबर बेचता है, तो उसे करीब 50 रुपये प्रतिदिन मिल सकते हैं। इस हिसाब से 30 दिनों में लगभग 1,500 रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। वास्तविक कमाई गोबर की मात्रा, खरीद की दर और स्थानीय व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026 के तहत भुगतान कैसे मिलता है?

इस पहल में गोबर का वजन पशुपालक के घर या फार्म पर किया जाता है। खरीदे गए गोबर के हिसाब से किसान को भुगतान मिलता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गोबर की बिक्री का पैसा हर 15 दिन में दूध के भुगतान के साथ सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। इस व्यवस्था से किसानों को गोबर बेचने के लिए अलग से बाजार तलाशने की जरूरत कम हो सकती है। Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026 जैसी पहल पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने और गोबर के उचित प्रबंधन में मदद कर सकती है।

गोबर से बायो-सीएनजी बनाने की तैयारी

बनास डेयरी गोबर का इस्तेमाल बायो-सीएनजी बनाने के लिए कर रही है। इस प्रक्रिया में गोबर से गैस तैयार की जाती है, जिसका उपयोग वाहनों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इससे गोबर को उपयोगी ऊर्जा में बदलने का अवसर मिलता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, डेयरी के चार प्लांट प्रतिदिन करीब 340 टन गोबर का इस्तेमाल कर रहे हैं। थराद और राधनपुर में दो नए प्लांट लगाए जा रहे हैं। इनके शुरू होने के बाद गोबर इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़कर प्रतिदिन करीब 515 टन होने की उम्मीद है। इससे अधिक पशुपालकों से गोबर खरीदने की संभावना बढ़ सकती है।

Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026 से जैविक खाद भी बनेगी

गोबर से केवल बायो-सीएनजी ही नहीं बनाई जाती, बल्कि गैस तैयार होने के बाद बची सामग्री से जैविक खाद भी बनाई जाती है। बनास डेयरी इस खाद को ‘भूमि अमृत’ नाम से स्थानीय दुग्ध समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाती है। किसान इस खाद का उपयोग खेतों में कर सकते हैं। इससे गोबर का बेहतर इस्तेमाल होता है और खेती के लिए जैविक खाद उपलब्ध होती है। Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026 के अंतर्गत गोबर का उपयोग ऊर्जा और कृषि, दोनों क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है।

बनासकांठा में लाखों पशुओं से गोबर की बड़ी संभावना

गुजरात के बनासकांठा जिले में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 28 लाख पशु हैं, जिनमें लगभग 24 लाख पशु बनास डेयरी से जुड़े पशुपालकों के हैं। अनुमान है कि जिले में प्रतिदिन करीब 24,000 टन गोबर निकलता है। इतनी बड़ी मात्रा में गोबर उपलब्ध होने के कारण बायोगैस उत्पादन की संभावनाएं भी अधिक हैं। डेयरी भविष्य में करीब 200 बायोगैस प्लांट लगाने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित योजना से गोबर के व्यावसायिक उपयोग और पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026

Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026 का लाभ किन किसानों को मिल सकता है?

इस पहल का लाभ उन पशुपालकों को मिल सकता है जिनके क्षेत्र में बनास डेयरी या संबंधित दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से गोबर की खरीद की व्यवस्था उपलब्ध है। गाय और भैंस पालने वाले किसान अपनी उपलब्ध गोबर की मात्रा के आधार पर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। हालांकि, गोबर खरीदने की सुविधा हर गांव में उपलब्ध होना जरूरी नहीं है। इसलिए किसानों को अपने नजदीकी दुग्ध सहकारी समिति या बनास डेयरी के संबंधित कार्यालय से खरीद की दर, गोबर की गुणवत्ता, वजन और भुगतान की शर्तों की जानकारी लेनी चाहिए।

बायो-सीएनजी की कीमत से वाहन चालकों को भी फायदा

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बनास डेयरी के प्लांटों से तैयार बायो-सीएनजी करीब 75 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है, जबकि गुजरात में सामान्य सीएनजी की कीमत करीब 92 रुपये प्रति किलो बताई गई है। वास्तविक कीमत स्थान और समय के अनुसार बदल सकती है। अगर बायो-सीएनजी की कीमत सामान्य सीएनजी से कम रहती है, तो इससे वाहन चालकों को भी बचत हो सकती है। इस तरह गोबर से तैयार ईंधन किसानों, डेयरी और परिवहन क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

Banas Dairy Gobar Kharid Yojana 2026 से पशुपालकों को क्या फायदा होगा?

बनास डेयरी की गोबर खरीद पहल पशुपालकों को दूध के अलावा कमाई का एक अतिरिक्त विकल्प देती है। गोबर से बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार होने से इसका व्यावसायिक उपयोग बढ़ता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और गोबर का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसानों को ध्यान रखना चाहिए कि करीब 1 रुपये प्रति किलो की दर और भुगतान की व्यवस्था संबंधित खरीद केंद्र के अनुसार लागू हो सकती है। गोबर बेचने से पहले स्थानीय दुग्ध समिति से वर्तमान नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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