देश में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। मिट्टी की उर्वरता और कृषि भूमि की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाने की सलाह दी जा रही है। इसी बीच संसद में सरकार से पूछा गया कि Chemical Fertilizer Se Kitni Krishi Bhumi Kharab Hui है? सरकार के जवाब ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Chemical Fertilizer Se Kitni Krishi Bhumi Kharab Hui, सरकार के पास नहीं आंकड़े
राज्यसभा में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि सरकार ने ऐसा कोई अध्ययन नहीं कराया है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से देश की कितनी कृषि भूमि प्रभावित हुई है।इसका मतलब है कि Chemical Fertilizer Se Kitni Krishi Bhumi Kharab Hui, इसका कोई आधिकारिक राष्ट्रीय आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि इस संबंध में अभी तक कोई विशेष अध्ययन नहीं कराया गया है।
मिट्टी की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता
रासायनिक उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल को लेकर कृषि विशेषज्ञ लंबे समय से किसानों को जागरूक करते रहे हैं। लगातार खेती में मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि मिट्टी की सेहत का सीधा असर फसल की उत्पादकता और किसानों की आय पर पड़ता है।इसी वजह से Chemical Fertilizer Se Kitni Krishi Bhumi Kharab Hui जैसे सवाल अब कृषि नीति और किसानों के बीच चर्चा का विषय बन रहे हैं। हालांकि सरकार के पास इस संबंध में जमीन के प्रभावित क्षेत्रफल का कोई आधिकारिक अध्ययन उपलब्ध नहीं है।
सरकार प्राकृतिक और जैविक खेती को दे रही बढ़ावा
कृषि राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक खेती और जैविक खेती पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण और खेती की लागत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करना है।सरकार के अनुसार Chemical Fertilizer Se Kitni Krishi Bhumi Kharab Hui, इसका अध्ययन भले ही नहीं हुआ है, लेकिन जैविक और प्राकृतिक खेती का क्षेत्र लगातार बढ़ाया जा रहा है।
18.93 लाख हेक्टेयर भूमि जैविक खेती के दायरे में
सरकार ने बताया कि देश में अब तक 18.93 लाख हेक्टेयर भूमि को जैविक खेती के दायरे में लाया जा चुका है। इससे करीब 33.63 लाख किसानों को लाभ मिला है।जैविक खेती में रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है। ऐसे में Chemical Fertilizer Se Kitni Krishi Bhumi Kharab Hui के साथ-साथ जैविक खेती के विस्तार के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
पूर्वोत्तर में भी बढ़ा जैविक खेती का क्षेत्र
पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन यानी MOVCDNER के तहत काम किया जा रहा है। सरकार के अनुसार इस मिशन के तहत 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जैविक खेती के अंतर्गत लाया गया है।इस योजना से करीब 2.74 लाख किसानों को लाभ मिला है। सरकार का लक्ष्य खेती को अधिक टिकाऊ बनाना और किसानों को जैविक उत्पादन से जोड़ना है।
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23.13 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े
कृषि मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) के तहत अब तक 23.13 लाख किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। वहीं 11.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के तहत कवर किया गया है।प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य, पर्यावरण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि Chemical Fertilizer Se Kitni Krishi Bhumi Kharab Hui इसका सटीक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।
संसद में सरकार के जवाब से क्या साफ हुआ?
सरकार के जवाब से यह स्पष्ट है कि देश में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से प्रभावित कृषि भूमि का राष्ट्रीय स्तर पर कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। Chemical Fertilizer Se Kitni Krishi Bhumi Kharab Hui इस सवाल का जवाब देने के लिए सरकार ने अभी तक कोई अलग अध्ययन नहीं कराया है।वहीं, सरकार प्राकृतिक और जैविक खेती के विस्तार पर जोर दे रही है।
Chemical Fertilizer Se Kitni Krishi Bhumi Kharab Hui जैसे सवालों पर भविष्य में अध्ययन होने से मिट्टी के स्वास्थ्य और कृषि भूमि की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है। यह सवाल किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मिट्टी की गुणवत्ता सीधे खेती की उत्पादकता और लंबे समय तक कृषि की स्थिरता से जुड़ी है।
