Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन का काम कर रहे हैं। पशुपालन से अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए किसानों को पशुओं की उत्तम नस्लों के चयन की भी आवश्यकता है। देखने में आता है कि कई बार जानकारी के अभाव में पशुपालक किसान ऐसी नस्ल की गाय या भैंस का पालन करते हैं जिनसे उन्हें अधिक लाभ नहीं मिल पाता है। गाय-भैंस जैसे दुधारू पशुओं का पालन मुख्य रूप से उनके दूध के लिए किया जाता है। ऐसे में पशुपालक को चाहिए कि उत्तम नस्ल की गाय या भैंस का पालन करें ताकि उसे अधिक लाभ मिल सके। गाय की अपेक्षा भैंस से अधिक दूध प्राप्त होता है। इसलिए अधिकांश किसान या डेयरी उद्योग में भैंसों का पालन अधिक किया जाता है।

Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle
डेयरी बिज़नेस के लिए भैंस की नस्ल चुनते समय सबसे बड़ा फोकस दूध की मात्रा, फैट प्रतिशत और स्थानीय मौसम के अनुसार अनुकूलता पर होना चाहिए। पशुपालक यदि डेयरी का बिजनेस शरू करने की सोच रहे है तो सही समय पर सही नस्ल का चुनाव करके दूध उत्पादन की मात्रा को बढ़ा सकते है इसके लिए आज हम आपको भारत की कुछ भैंस की कुछ प्रमुख नस्लों के बारे में जनाकरी देंगे Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle
मुर्रा भैंस
यह भैंस की सबसे लोकप्रिय नस्ल है, जो हरियाणा के रोहतक, हिसार और जींद जिले के साथ-साथ पंजाब के पटियाला और नाभा में पाई जाती है. काले रंग की भैंस से एक ही व्यांत में 1600-1800 लीर दूध उत्पादन हो जाता है. जानकारी के लिये बता दें कि मुर्रा भैंस के दूध में वसा की 7 फीसदी मात्रा पाई जाती है. मुर्रा नस्ल को जल्दी पचने वाले चीजें और फलीदार चारा खुराक के रूप में दिया जाता है. हालाकिं अच्छे दूध उत्पादन के लिये मक्की, गेहूं, जौं, जई और बाजरा के दानों के साथ-साथ तेल बीजों की खल खिलाई जाती है. मुर्रा नस्ल की भैंस को साफ-सफाई से रख-रखाव की जरूरत होती है. ये नस्ल दिनभर में 12-16 लीटर दूध देती है.
खरीद और आमदनी
मुर्रा नस्ल की भैंस की कीमत 1 लाख रुपये से अधिक होती है. कई किसान और पशुपालक ये भैंस खरीदकर डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. मुर्रा भैंस की खरीद के लिये कई राज्य सरकारें आर्थिक अनुदान भी दे रही हैं. सब्सिड़ी लागू होने के बाद मुर्रा भैंस को 50,000 रुपये में खरीदा जा सकता है. भारत सरकार द्वारा भी राष्ट्रीय गोकुल मिशन और पशु किसान क्रेडिट कार्ड पर पशुओं की खरीद के लिये सब्सिडी दी जा रही है Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle
सुरती भैंस
छोटे किसानों की आमदनी को दोगुना करने में सुरती भैंस का बड़ा योगदान रहता है, वैसे तो ये गुजरात से ताल्लुक रखती है, लेकिन उत्तर भारत में डेरी फार्मिंग के लिये काफी लोकप्रिय है. बाकी भैंसों के मुकाबले सुरती भैंस का आकार थोड़ा छोटा होता है, लेकिन अच्छे पशु आहार खिलाने पर ये साल भर में 1600-1800 लीटर दूध दे देती है.
भैंस की सुरती नस्ल इसका रंग भूरा और सिल्वर ग्रे होता है साथ ही त्वचा काले या भूरे रंग की होती है. इस भैंस का मध्यम आकार, नुकीला धड़, लंबा सिर, उभरी हुई आंखें और हंसिया के आकार की सींग होती है. यह कम चारे और सूखे चारे (भूसे) पर भी अच्छी तरह पल जाती हैं, जिससे इन्हें पालना किफायती है। कम चारे में ज्यादा दूध, कम रखरखाव खर्च और उच्च फैट वाला दूध मिलने के कारण यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है. सूरती भैंस को दूध देने वाली बेहतरीन नस्लों में गिना जाता है
जाफराबादी भैंस
जाफराबादी भैंस (jafarabadi buffalo) की नस्ल काफी मजबूत कदकाठी की होती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस भैंस के दमदार शरीर की क्षमता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह भैंस शेर से भिंड़ने की क्षमता भी रखती है। इसी के साथ ही इसकी दूध देने की क्षमता भी अच्छी है। इस नस्ल की भैंस गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र की मूल निवासी है और गिर के जंगलों में पाई जाती है। यह भैंस गुजरात के जूनागढ़, भावनगर व पोरबंदर जिलों में अधिक देखने को मिलती है। Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle
जाफराबादी भैंस प्रतिदिन 10 से 15 लीटर से लेकर 20 से 25 लीटर तक दूध दे सकती है। वहीं इस नस्ल की भैंस की औसत दूध देने की क्षमता की बात करें तो यह भैंस प्रति ब्यांत 1000 से 1200 लीटर तक दूध देती है। भैंस की जाफराबादी नस्ल की कीमत 70-80 हजार रुपए से शुरू होकर एक-डेढ़ लाख रुपए तक होती है। इसकी कीमत दूध देने की मात्रा और आयु पर निर्भर करती है।
मेहसाना भैंस
भैंस की मेहसाना नस्ल मुख्य रूप से गुजरात के मेहसाणा जिले में पाई जाती है। इस जिले के नाम से ही इसका नाम मेहसाना भैंस पड़ा है। इस नस्ल का पालन गुजरात के अहमदाबाद, साबरकांठा, बनासकांठा व गांधीनगर जिलों में किया जाता है। इसके अलावा महाराष्ट्र सहित भारत के अन्य राज्यों में भी इसका पालन किया जा रहा है। बता दें कि महसाना भैंस की उत्पत्ति हरियाणा की मुर्रा नस्ल की भैंस और गुजरात की सुरती नस्ल की भैंस के क्रॉस ब्रीडिंग से हुई है। Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle
इस नस्ल की भैंस का रंग काला और भूरा होता हैमेहसाना भैंस प्रतिदिन 7 से 10 लीटर तक दूध देती है। इसके दूध में फैट की मात्रा 6 से 7 प्रतिशत के बीच होती है। यह भैंस प्रति ब्यांत औसत 1500 से 2000 लीटर तक दूध दे सकती मेहसाना भैंस की कीमत इसके दूध देने की क्षमता, आयु, ब्यांत के दिन आदि बातों पर निर्भर करती है। आमतौर पर मेहसाना भैंस की कीमत 40,000 रुपए से लेकर 80,000 रुपए के बीच होती है। Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle
भदावरी भैंस
भदावरी भैंस का नाम भारत के एक पुराने राज्य भदावर के नाम पर पड़ा है। आजादी से पहले इटावा, आगरा, भिंड, मुरैना व ग्वालियर जिलों के कुछ भागों को मिलाकर एक छोटा सा राज्य हुआ करता था जिसका नाम भदावर था। माना जाता है कि उसी राज्य में विकसित होने के कारण इस भैंस नाम भदावरी पड़ा है। भदावरी भैंस मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में अधिक पाली जाती हैं। खास बात यह है कि इस नस्ल का पालन अन्य भैंस की नस्लों के मुकाबले आसानी से किया जा सकता है, क्योंकि यह भैंस किसी भी प्रकार की जलवायु में रह सकती है और कम आहार खाकर भी बेहतर क्वालिटी का दूध देती है।
भदावरी भैंस का शरीर मध्यम आकार का होता है। इसका रंग तांबिया होता है और माथा छोटा होता है। इसके खुर का रंग काला होता है। इसके शरीर पर कम बाल होते हैं। इसकी टांगे छोटी और मजबूत होती हैं। भदावरी भैंस की दूध की क्वालिटी काफी अच्छी होती है। हालांकि यह भैंस मुर्रा व सुरती भैंस जितना अधिक दूध तो नहीं देती है लेकिन कम लागत में बेहतर दूध देने की क्षमता रखती है। भदावरी भैंस प्रतिदिन 6 से 8 लीटर दूध देती है। इसके दूध में 8.5 से 14 प्रतिशत तक वसा की मात्रा पाई जाती है। यदि प्रति ब्यांत दूध की मात्रा की बात करें तो भदावरी भैंस औसत प्रति ब्यांत 1300 से 1500 लीटर दूध देती है।
नीली रवि भैंस
निली-रवि भैंस डेयरी व्यवसाय के लिए अत्यंत लोकप्रिय और उच्च उत्पादन देने वाली नस्ल है, जिसे खासकर पंजाब क्षेत्र में पाला जाता है। इसकी पहचान काले चमकदार शरीर पर माथे, टांगों या पूंछ के सिरे पर सफेद निशानों से होती है। यह भैंस सामान्यतः 10 से 18 लीटर तक दूध देती है, और अच्छे प्रबंधन में इससे भी अधिक उत्पादन संभव है। इसके दूध में फैट प्रतिशत अच्छा होता है, जिससे घी, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों में अधिक लाभ मिलता है। Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle
निली-रवि का स्वभाव शांत और मिलनसार होता है, इसलिए इसे संभालना आसान रहता है और यह मशीन मिल्किंग के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है। यह नस्ल गर्मी और सर्दी दोनों परिस्थितियों में खुद को ढाल लेती है, हालांकि अत्यधिक गर्म क्षेत्रों में ठंडक और पानी की पर्याप्त व्यवस्था जरूरी होती है। कुल मिलाकर, निली-रवि भैंस उच्च दूध उत्पादन, अच्छे फैट और आसान प्रबंधन के कारण डेयरी किसानों के लिए एक भरोसेमंद और लाभदायक विकल्प है।
गोदावरी भैंस
गोदावरी भैंस (अक्सर मराठवाड़ी टाइप के रूप में जानी जाती है) महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक मजबूत और अनुकूलनशील नस्ल है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम संसाधनों—जैसे सीमित चारा और साधारण देखभाल—में भी अच्छी तरह पाली जा सकती है। यह भैंस सामान्यतः 6–10 लीटर तक दूध देती है, जो छोटे और मध्यम डेयरी किसानों के लिए स्थिर आय का अच्छा स्रोत बनता है। इसका शरीर मध्यम आकार का होता है और यह गर्म तथा सूखे मौसम को आसानी से सहन कर लेती है,
इसलिए कठिन जलवायु वाले क्षेत्रों में भी इसका प्रदर्शन संतोषजनक रहता है। गोदावरी भैंस का स्वभाव शांत होता है, जिससे इसे संभालना आसान रहता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है। कुल मिलाकर, यह नस्ल ज्यादा खर्च किए बिना नियमित दूध उत्पादन देने वाली, भरोसेमंद और कम जोखिम वाली डेयरी भैंस मानी जाती है।
पंढरपुरी भैंस
पंढरपुरी भैंस अपनी बहुत लंबी और तलवार जैसी मुड़ी हुई सींगों के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे अन्य नस्लों से अलग पहचान देती हैं। यह नस्ल मुख्यतः महाराष्ट्र के सूखे और गर्म क्षेत्रों में पाई जाती है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहन करने की क्षमता है, इसलिए यह राजस्थान जैसे गर्म इलाकों में भी आसानी से पाली जा सकती है। पंढरपुरी भैंस सामान्यतः 6–12 लीटर तक दूध देती है और कम चारे में भी संतोषजनक उत्पादन बनाए रखती है।
इसका स्वभाव शांत होता है, जिससे इसे संभालना आसान रहता है, और यह लंबी दूरी तक चलने व चराई करने में भी सक्षम होती है। कम खर्च, गर्म जलवायु में अनुकूलता और स्थिर दूध उत्पादन के कारण पंढरपुरी भैंस छोटे और मध्यम डेयरी किसानों के लिए एक व्यावहारिक और लाभदायक विकल्प मानी जाती है।
नागपुरी भैस
नागपुरी भैंस अपनी कठिन परिस्थितियों में भी टिके रहने की क्षमता के लिए जानी जाती है। यह मुख्यतः महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में पाई जाती है और इसकी पहचान इसके लंबे, चपटे और पीछे की ओर फैले हुए सींगों से होती है। यह नस्ल गर्मी और सूखे मौसम को आसानी से सहन कर लेती है, इसलिए कम पानी और सीमित चारे वाले क्षेत्रों में भी इसका पालन सफल रहता है। नागपुरी भैंस सामान्यतः 5–10 लीटर तक दूध देती है, जो भले ही बहुत ज्यादा न हो, लेकिन इसका उत्पादन स्थिर रहता है।
इसका स्वभाव शांत होता है और यह लंबी दूरी तक चराई करने में सक्षम होती है, जिससे पालन लागत कम आती है। मजबूत शरीर, अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता और कम रखरखाव के कारण नागपुरी भैंस छोटे किसानों के लिए एक भरोसेमंद और किफायती डेयरी विकल्प मानी जाती है। Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle
और जाने – डेयरी बिजनेस शुरू करने के लिए गाय की टॉप नस्ले
मराठवाडी भैंस
मराठवाड़ी भैंस एक किफायती, टिकाऊ और देसी परिस्थितियों में अच्छी तरह ढलने वाली नस्ल है, जिसे खासतौर पर महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में पाला जाता है। इसका शरीर मध्यम आकार का, रंग आमतौर पर काला या गहरा भूरा होता है और सींग हल्के मुड़े हुए होते हैं। यह नस्ल गर्मी और सूखे मौसम को सहन करने में सक्षम है, इसलिए जहां पानी और हरे चारे की कमी रहती है, वहां भी यह अच्छी तरह जीवित रहती है और उत्पादन देती है। Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle
दूध उत्पादन की बात करें तो मराठवाड़ी भैंस सामान्यतः 6–10 लीटर प्रतिदिन दूध देती है, और इसकी lactation अवधि भी संतुलित रहती है, जिससे पूरे साल आय बनी रहती है। इसके दूध में फैट प्रतिशत अच्छा होता है, जो घी, पनीर और अन्य डेयरी प्रोडक्ट बनाने के लिए लाभदायक है। यह भैंस कम गुणवत्ता वाले चारे (सूखा चारा, भूसा आदि) पर भी अपना उत्पादन बनाए रखती है, जिससे छोटे किसानों के लिए इसका पालन आसान और सस्ता हो जाता है। Dairy business Ke Liye Bhais Ki Top 10 Nasle

