26 साल शिक्षक रहे धनीराम गुप्ता, खेती में आजमा रहे नए प्रयोग,सालाना कमा रहे 8 लाख रुपये Dhaniram Gupta Farming Success Story

26 साल शिक्षक रहे धनीराम गुप्ता, खेती में आजमा रहे नए प्रयोग,सालाना कमा रहे 8 लाख रुपये  Dhaniram Gupta Farming Success Story

Dhaniram Gupta Farming Success Story: कहते हैं कि जहां चाह होती है, वहां राह जरूर निकलती है। मध्य प्रदेश के सागर जिले के केसली तहसील के केवलारी कला गांव के रहने वाले धनीराम गुप्ता ने अपनी मेहनत से इस कहावत को सच साबित किया है। Dhaniram Gupta Farming Success Story एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिन्होंने करीब 26 साल तक शिक्षक के रूप में बच्चों को पढ़ाया और बाद में खेती को अपना नया व्यवसाय बना लिया।

धनीराम गुप्ता ने खेती में बागवानी, प्राकृतिक खेती और अलग-अलग कृषि प्रयोगों को अपनाया। आज वह अपनी खेती से सालाना करीब 6 से 8 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। इसके साथ ही वह अपने क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।

Dhaniram Gupta Farming Success Story 26 साल तक शिक्षक के रूप में किया काम

धनीराम गुप्ता ने वर्ष 1991 से 2017 तक हाई स्कूल से लेकर कॉलेज स्तर तक अध्यापन का कार्य किया। करीब 26 वर्षों तक उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा देने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने का काम किया। शिक्षक के रूप में काम करने के बावजूद उनकी खेती और बागवानी में रुचि बनी रही। Dhaniram Gupta Farming Success Story

वर्ष 2016 में उन्हें ग्राम पंचायत में आयोजित हॉर्टिकल्चर विभाग की एक बैठक में शामिल होने का अवसर मिला। इस बैठक में उन्हें बागवानी से संबंधित योजनाओं और खेती की नई संभावनाओं के बारे में जानकारी मिली। बागवानी की जानकारी उन्हें काफी पसंद आई और उन्होंने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। यहीं से Dhaniram Gupta Farming Success Story में एक नया मोड़ आया। Dhaniram Gupta Farming Success Story

सरकारी योजना से मिली बागवानी की प्रेरणा

हॉर्टिकल्चर विभाग की बैठक में जानकारी मिलने के बाद धनीराम गुप्ता ने बागवानी से जुड़ी योजना के लिए आवेदन किया। इसके बाद वर्ष 2017 में उन्होंने करीब ढाई एकड़ जमीन में 200 आम के पौधे लगाए। पौधरोपण के बाद उन्होंने धीरे-धीरे खेती और बागवानी पर ध्यान देना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने शिक्षक की नौकरी छोड़कर पूरी तरह कृषि को अपना लिया। उनका यह फैसला उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। उन्होंने खेती को केवल पारंपरिक तरीके से करने के बजाय इसमें नए प्रयोग करने शुरू किए।

शिक्षक से किसान बनने का फैसला

धनीराम गुप्ता का मानना है कि शिक्षक समाज में बदलाव लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम होता है, लेकिन खेती के जरिए भी समाज में सकारात्मक बदलाव किया जा सकता है। उनके अनुसार प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसान पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही प्राकृतिक तरीके से तैयार की गई कृषि उपज लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने खेत में प्राकृतिक खेती के अलग-अलग प्रयोग शुरू किए। Dhaniram Gupta Farming Success Story में खेती के साथ पर्यावरण संरक्षण का विचार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Dhaniram Gupta Farming Success Story

Dhaniram Gupta Farming Success Story 8 एकड़ पैतृक जमीन पर शुरू की खेती

धनीराम गुप्ता के पास करीब 8 एकड़ पैतृक जमीन है। पहले वह अपनी जमीन पर खेती का काम दूसरे लोगों से करवाते थे। लेकिन बागवानी में रुचि बढ़ने के बाद उन्होंने खुद खेती की जिम्मेदारी संभालनी शुरू की। धनीराम ने देखा कि उनके गांव में कई किसानों द्वारा लगाए गए बगीचे किसी न किसी कारण से उजड़ गए थे। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में बागवानी को बेहतर तरीके से विकसित करने का निर्णय लिया। करीब 9 साल पहले लगाए गए आम के पौधे अब बड़े पेड़ों का रूप ले चुके हैं। उनके खेत में आम के अलावा नींबू, आंवला और सागौन के पेड़ भी लगाए गए हैं।

Dhaniram Gupta Farming Success Story 2 एकड़ में कर रहे प्राकृतिक खेती

धनीराम गुप्ता ने अपनी 8 एकड़ जमीन में से करीब 2 एकड़ जमीन प्राकृतिक खेती के लिए सुरक्षित रखी है। इस जमीन पर वह अलग-अलग प्रकार के अनाज और फसलों की खेती करते हैं। प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसल का इस्तेमाल मुख्य रूप से उनके परिवार के लिए किया जाता है। परिवार की जरूरत पूरी होने के बाद बची हुई उपज को दूसरे लोगों को भी दिया जाता है। इस तरह उन्होंने अपने खेत में बागवानी के साथ प्राकृतिक खेती को भी जगह दी है। Dhaniram Gupta Farming Success Story में खेती के इस विविध मॉडल को महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और जीवामृत खुद करते हैं तैयार

प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले कई कृषि इनपुट धनीराम गुप्ता खुद तैयार करते हैं। इनमें नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, जीवामृत और घना अमृत जैसे प्राकृतिक कृषि इनपुट शामिल हैं। वह इनका इस्तेमाल अपनी खेती में करते हैं और आसपास के किसानों को भी इनके बारे में जानकारी देते हैं। उनका प्रयास है कि किसान स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके खेती की लागत को नियंत्रित कर सकें। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ धनीराम किसानों को खेती में प्रयोग करने और अपनी जमीन व स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं। Dhaniram Gupta Farming Success Story

75 से ज्यादा किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा

खेती में किए जा रहे प्रयोगों और प्राकृतिक खेती के प्रति उनकी सक्रियता को देखते हुए कृषि विभाग ने धनीराम गुप्ता को प्राकृतिक खेती क्लस्टर की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद उन्होंने अपने क्षेत्र के 75 से ज्यादा किसानों को चिन्हित कर प्राकृतिक खेती से जोड़ने का काम शुरू किया। वह किसानों को प्राकृतिक खेती, प्राकृतिक कृषि इनपुट तैयार करने और खेती में स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल के बारे में जानकारी देते हैं। इस पहल के जरिए वह अपने क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को इसके तरीकों के बारे में जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।

मौसम की चुनौतियों के बीच खेती से लाखों की कमाई

किसानों के सामने हर साल मौसम से जुड़ी कई चुनौतियां रहती हैं। कभी अत्यधिक बारिश तो कभी सूखे की स्थिति फसल उत्पादन और किसान की आय को प्रभावित कर सकती है। धनीराम गुप्ता ने भी इन परिस्थितियों का सामना किया है। हालांकि उन्होंने खेती में अलग-अलग प्रयोग करके एक ही फसल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया। बागवानी, प्राकृतिक खेती और विभिन्न फसलों के संयोजन से उन्होंने अपनी कृषि गतिविधियों में विविधता लाई। धनीराम के अनुसार इन प्रयोगों की वजह से वह औसतन सालाना 6 से 8 लाख रुपये तक की कमाई खर्च काटने के बाद कर लेते हैं। Dhaniram Gupta Farming Success Story

खेती में विविधीकरण से बढ़ाया कमाई का दायरा

धनीराम गुप्ता ने अपनी जमीन को केवल एक प्रकार की फसल तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने आम के साथ नींबू, आंवला और सागौन जैसे पेड़ों को भी खेत का हिस्सा बनाया। इसके अलावा 2 एकड़ जमीन में प्राकृतिक खेती की जा रही है। अलग-अलग कृषि गतिविधियों को एक साथ अपनाने से उन्होंने अपनी खेती को विविध बनाने का प्रयास किया है। खेती में विविधीकरण का उद्देश्य अलग-अलग कृषि गतिविधियों से आय के अवसर तैयार करना और किसी एक फसल पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है। धनीराम भी इसी दिशा में लगातार प्रयोग कर रहे हैं।

खेती के साथ किसानों को दे रहे नई दिशा

धनीराम गुप्ता अब केवल अपनी खेती तक सीमित नहीं हैं। प्राकृतिक खेती क्लस्टर की जिम्मेदारी मिलने के बाद वह दूसरे किसानों को भी प्राकृतिक खेती से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। वह किसानों को प्राकृतिक इनपुट तैयार करने, खेती में स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल और प्राकृतिक खेती की तकनीकों के बारे में जानकारी देते हैं। इस वजह से उनकी खेती की कहानी अब व्यक्तिगत सफलता से आगे बढ़कर किसानों के बीच जागरूकता फैलाने का माध्यम बन रही है। Dhaniram Gupta Farming Success Story

पर्यावरण संरक्षण पर भी दे रहे जोर

धनीराम गुप्ता खेती को केवल आय का साधन नहीं मानते। उनका मानना है कि खेती के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा सकता है। उनके खेत में आम, नींबू, आंवला और सागौन जैसे पेड़ मौजूद हैं। इसके साथ प्राकृतिक खेती को अपनाकर वह टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। Dhaniram Gupta Farming Success Story में बागवानी और प्राकृतिक खेती का यह संयोजन खेती के साथ पर्यावरण के प्रति उनकी सोच को भी दर्शाता है।

26 साल की नौकरी के बाद खेती बनी नई पहचान

धनीराम गुप्ता ने करीब 26 साल तक शिक्षक के रूप में काम करने के बाद खेती को अपनी नई पहचान बनाया। उन्होंने सरकारी योजना से मिली जानकारी का उपयोग करते हुए आम का बगीचा लगाया और इसके बाद प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़े। आज वह अपनी 8 एकड़ जमीन में अलग-अलग कृषि गतिविधियां कर रहे हैं और प्राकृतिक खेती के जरिए अन्य किसानों को भी जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। Dhaniram Gupta Farming Success Story यह बताती है कि खेती में लगातार सीखने, नए प्रयोग करने और उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करने से किसान अपनी कृषि व्यवस्था को बेहतर बना सकते हैं। Dhaniram Gupta Farming Success Story

खेती से बदली पहचान और बढ़ी आमदनी

धनीराम गुप्ता की कहानी दिखाती है कि खेती को योजनाबद्ध तरीके से अपनाकर इसे आय का बेहतर माध्यम बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षक की नौकरी के बाद खेती में कदम रखा और बागवानी तथा प्राकृतिक खेती को अपनी कृषि व्यवस्था का हिस्सा बनाया। आज उनके खेत में आम के पेड़ों के साथ कई अन्य पेड़ और फसलें मौजूद हैं। प्राकृतिक खेती के माध्यम से वह अपने परिवार के लिए अनाज का उत्पादन करने के साथ-साथ दूसरे किसानों को भी इस पद्धति के बारे में जागरूक कर रहे हैं। उनकी मेहनत, खेती में किए गए प्रयोग और किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने की पहल ने उन्हें अपने क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है।

author
Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

Related Articles

1 Comment

Avarage Rating:
  • 0 / 10

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *