मध्यप्रदेश में 2 हजार नई दुग्ध समितियां गठित, मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने की तैयारी तेज Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana

मध्यप्रदेश में 2 हजार नई दुग्ध समितियां गठित, मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने की तैयारी तेज Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana

मध्यप्रदेश में डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए सरकार लगातार नई पहल कर रही है। Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana के तहत प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों का विस्तार किया जा रहा है। अब तक करीब 1,926 नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित की जा चुकी हैं, जबकि 801 निष्क्रिय समितियों को फिर से सक्रिय किया गया है। सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को देश का ‘मिल्क कैपिटल’ बनाना है। इसके लिए दूध उत्पादन, संग्रह, प्रसंस्करण और दुग्ध उत्पादों की बिक्री को मजबूत करने के साथ पशुपालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में 2 हजार नई दुग्ध समितियां गठित

Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana के तहत गांवों में दुग्ध सहकारी समितियों का नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में अभी तक 1,926 नई समितियां गठित हो चुकी हैं। वहीं 801 पुरानी और निष्क्रिय समितियों को दोबारा कामकाज से जोड़ा गया है। सरकार ने वर्ष 2028-29 तक 3,827 और नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने का लक्ष्य रखा है। अगले पांच वर्षों में प्रदेश के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियां स्थापित करने की योजना है।

दूध संग्रह में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी

डेयरी क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का असर दूध संग्रह पर भी देखने को मिल रहा है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में प्रतिदिन 8.73 लाख किलोग्राम दूध का संग्रह किया जा रहा था। वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 9.66 लाख किलोग्राम प्रतिदिन हो गया। वहीं वर्ष 2026-27 में जुलाई तक प्रतिदिन करीब 9.75 लाख किलोग्राम दूध का संग्रह किया गया। Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana के तहत दूध संग्रह व्यवस्था को मजबूत करने और ज्यादा पशुपालकों को सहकारी समितियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

पशुपालकों को बढ़ा भुगतान

दूध संग्रह बढ़ने के साथ पशुपालकों को मिलने वाले भुगतान में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024-25 में दुग्ध उत्पादकों को 1,477 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 1,780 करोड़ रुपये हो गई। यानी भुगतान में 27 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana का एक प्रमुख उद्देश्य पशुपालकों को दूध की बिक्री के लिए बेहतर और नियमित बाजार उपलब्ध कराना भी है।

ग्वालियर और जबलपुर दुग्ध संघों को ब्याज मुक्त ऋण

डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए ग्वालियर और जबलपुर दुग्ध संघों को वित्तीय सहायता दी गई है। ग्वालियर दुग्ध संघ को दूध संग्रह और प्रसंस्करण के लिए 470 लाख रुपये, जबकि जबलपुर दुग्ध संघ को 500 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया है। इस वित्तीय सहायता से दोनों दुग्ध संघों की दूध संग्रह और प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डेयरी व्यवस्था को डिजिटल बनाने की तैयारी

सरकार अब दूध की पूरी सप्लाई चेन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दे रही है। दूध संग्रह से लेकर खरीद और बिक्री तक की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की योजना है। Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana में डिजिटल मॉनिटरिंग को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मैदानी स्तर पर दूध खरीद में लगे कर्मचारियों की निगरानी के लिए आईटी आधारित सिस्टम विकसित किया जाएगा।

घी, दही और छाछ की बिक्री बढ़ाने पर जोर

सरकार दूध के साथ अन्य दुग्ध उत्पादों का बाजार भी बढ़ाना चाहती है। घी, दही और छाछ की बिक्री बढ़ाने के लिए शहरी क्षेत्रों में नए दुग्ध पार्लर आवंटित करने की तैयारी है। इससे सहकारी समितियों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा और पशुपालकों के लिए आय के नए अवसर तैयार हो सकते हैं। Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana के तहत वैल्यू एडेड डेयरी उत्पादों के कारोबार को बढ़ावा देने से किसानों की आमदनी को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

दुग्ध समितियों में लगाए जाएंगे माइक्रो एटीएम

ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध समितियों को आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाने के लिए माइक्रो एटीएम लगाने की योजना भी बनाई जा रही है। इससे दुग्ध उत्पादकों और ग्रामीण लोगों को स्थानीय स्तर पर बैंकिंग एवं वित्तीय लेन-देन की सुविधा मिलने की उम्मीद है। Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana के जरिए डेयरी समितियों को केवल दूध संग्रह केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों का मजबूत केंद्र बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

एमपीसीडीएफ को दुग्ध सहकारी समितियों में महिला सदस्यता बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। डेयरी गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूती मिल सकती है। Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana में ग्रामीण स्तर पर सहकारिता को मजबूत करने के साथ महिलाओं को डेयरी गतिविधियों से जोड़ना भी महत्वपूर्ण पहल है।

मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने की तैयारी

मध्यप्रदेश सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ डेयरी सहकारिता को गांव-गांव तक पहुंचाने पर काम कर रही है। Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana के तहत समितियों का विस्तार, दूध संग्रह बढ़ाना, प्रसंस्करण क्षमता मजबूत करना और दुग्ध उत्पादों का बाजार विकसित करना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। अगर नई समितियों के गठन और दूध संग्रह में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहता है, तो मध्यप्रदेश को देश का ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने के लक्ष्य को मजबूती मिल सकती है।

पशुपालकों के लिए क्या फायदा होगा?

इस डेयरी विस्तार से पशुपालकों को बेहतर बाजार, नियमित भुगतान, आधुनिक दूध संग्रह व्यवस्था और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच मिलने की उम्मीद है। Doodh Utpadan Badhane Ke Liye Sarkari Yojana के माध्यम से डेयरी क्षेत्र को संगठित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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Bhawna Purbia is an agriculture writer and digital content creator. He regularly writes about farming techniques, agricultural news, government schemes, and agribusiness trends. Through Kheti Junction, he aims to provide useful and reliable information to farmers across India.

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