Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra: महाराष्ट्र के जालना जिले में पानी की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। कम बारिश और सीमित सिंचाई सुविधा के कारण यहां पारंपरिक खेती से अच्छी आमदनी हासिल करना मुश्किल होता है। ऐसे में अंबड तालुका के पिठोरी सिरसगांव के दो किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra की यह कहानी बताती है कि किसान कम पानी में भी आधुनिक खेती के जरिए अच्छी कमाई का रास्ता तलाश सकते हैं।
किसान संभाजी अशोक काकडे और नारायण हरिभाऊ गोरे ने फल बागवानी को अपनी आमदनी का नया जरिया बनाने का फैसला किया। दोनों किसानों ने मोबाइल के जरिए ड्रैगन फ्रूट की खेती से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने दूसरे किसानों की बागों का दौरा किया और खेती की तकनीक को समझकर अपने खेत में इसका प्रयोग शुरू किया।
डेढ़ एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती, 6 लाख रुपये खर्च
किसान संभाजी अशोक काकडे ने 1 जनवरी 2024 को करीब डेढ़ एकड़ जमीन में ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए। इस खेती को तैयार करने में उन्हें करीब 6 लाख रुपये का खर्च आया। मोबाइल के माध्यम से उन्हें पता चला कि ड्रैगन फ्रूट की बाजार में अच्छी मांग है और इसकी खेती में कई पारंपरिक फसलों की तुलना में पानी की जरूरत कम होती है।
इसके बाद उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का फैसला किया। डेढ़ एकड़ जमीन में पौधारोपण के लिए उन्होंने सोलापुर जिले के पंढरपुर तालुका से करीब साढ़े पांच हजार पौधे मंगवाए। Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra में किसान द्वारा खुद जानकारी जुटाकर खेती शुरू करना इसकी खास बात है।
खुद तैयार किया ड्रैगन फ्रूट खेती का स्ट्रक्चर
ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए पौधों को सहारा देने के लिए पोल और विशेष स्ट्रक्चर की जरूरत होती है। किसान संभाजी काकडे ने यह स्ट्रक्चर खुद तैयार किया। इससे उन्हें निर्माण लागत कम करने में मदद मिली। किसान के मुताबिक, ड्रैगन फ्रूट की फसल में कई दूसरी फसलों की तुलना में रोगों का प्रकोप कम देखने को मिलता है। गर्मी के मौसम में भी इसे तुलनात्मक रूप से कम पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि पानी की कमी वाले इलाकों में ड्रैगन फ्रूट किसानों के लिए एक बेहतर वैकल्पिक फसल बन सकती है।
15 लाख रुपये तक आमदनी की उम्मीद
संभाजी काकडे को उम्मीद है कि डेढ़ एकड़ खेत से पहली बार में करीब 15 टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हो सकता है। इससे उन्हें लगभग 10 से 15 लाख रुपये तक की आमदनी होने की उम्मीद है। बाजार में अच्छी मांग को देखते हुए किसान अपनी उपज को सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर और पुणे के बाजारों में बेचने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि खेती की लागत निकालने के बाद भी अच्छी आमदनी हासिल हो सकती है। Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra
संभाजी काकडे दूसरे किसानों को भी समूह बनाकर ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके अनुसार, बाजार की मांग और कम पानी की जरूरत को देखते हुए किसान इसे अतिरिक्त आय के विकल्प के रूप में अपना सकते हैं। Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra
दूसरे किसान ने भी शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती
संभाजी काकडे के साथ किसान नारायण हरिभाऊ गोरे ने भी ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। खेती शुरू करने से पहले उन्होंने इस फसल की खेती कर रहे दूसरे किसानों से बातचीत की और उनकी बाग का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में ड्रैगन फ्रूट लगाने का फैसला किया। नारायण गोरे ने भी मोबाइल के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी जुटाई। उन्होंने सोलापुर जिले के पंढरपुर तालुका से करीब 6 हजार पौधे मंगवाए, जिनमें से लगभग साढ़े पांच हजार पौधों की खेत में रोपाई की गई। उनकी कहानी भी Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra को मजबूत बनाती है। Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra
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स्ट्रक्चर खुद बनाया, 30 फीसदी तक लागत बचाई
नारायण गोरे ने भी ड्रैगन फ्रूट की बाग के लिए जरूरी पोल और स्ट्रक्चर खुद तैयार किया। इससे खेती की लागत में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक की बचत हुई। 6 हजार पौधों को खेत तक लाने और परिवहन सहित करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया। अब किसान को उम्मीद है कि करीब साढ़े पांच हजार पौधों से पहली बार में लगभग साढ़े सात से आठ लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है। कम पानी वाले क्षेत्र में यह प्रयोग किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra
कम पानी में खेती बनी किसानों के लिए उम्मीद
जालना जैसे कम बारिश वाले क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। दोनों किसानों ने पानी की कमी को चुनौती मानने के बजाय ऐसी फसल का चुनाव किया, जिसमें तुलनात्मक रूप से कम पानी की जरूरत होती है। ड्रैगन फ्रूट को बाजार में अच्छी मांग वाला फल माना जाता है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इसकी मांग कई बाजारों में बनी हुई है। ऐसे में सही तकनीक, बाजार की जानकारी और लागत प्रबंधन के साथ इसकी खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का अच्छा विकल्प बन सकती है।
दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बनी कहानी
पिठोरी सिरसगांव के इन दोनों किसानों ने खेती शुरू करने से पहले जानकारी जुटाई, दूसरे किसानों के अनुभव समझे और खेत में लगने वाला स्ट्रक्चर खुद तैयार कर लागत कम करने की कोशिश की। Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra की यह कहानी दिखाती है कि पानी की कमी वाले क्षेत्रों में किसान आधुनिक और बाजार आधारित खेती को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। Dragon Fruit Farming Success Story in Jalna Maharashtra
इन किसानों का प्रयोग दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकता है। हालांकि ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू करने से पहले स्थानीय जलवायु, मिट्टी, बाजार, लागत और उपलब्ध सिंचाई सुविधा की जानकारी लेना जरूरी है।
