फरवरी की गर्मी ने बिगाड़ी फूलगोभी की हालत! ‘फजीनेस’ से किसान हुए परेशान, इस तरह बचाएं अपनी फसल February ki garmi ne bigadi fulgobhi ki halat! Fazines se kisan hue pareshan , is tarh bachaye apni fasal

फरवरी की गर्मी ने बिगाड़ी फूलगोभी की हालत! ‘फजीनेस’ से किसान हुए परेशान, इस तरह बचाएं अपनी फसल February ki garmi ne bigadi fulgobhi ki halat! Fazines se kisan hue pareshan , is tarh bachaye apni fasal

फरवरी की बढती गर्मी फूलगोभी की फसल को प्रभावित कर रही है . तापमान बढ़ने के कारण फसल में ‘फजीनेस’ की समस्या सामने आ रही है, जिससे फूल बिखर रहे हैं और बाजार में सही दाम नहीं मिल पा रहा. विशेषज्ञों के अनुसार , समय पर रोपाई और उचित फसल प्रबंधन से इस नुकसान से बचा जा सकता है.

February ki garmi ne bigadi fulgobhi ki halat! Fazines se kisan hue pareshan , is tarh bachaye apni fasal

‘फजीनेस’ क्या है और क्यों होती है समस्या?

बढ़ता तापमान बना बड़ी चुनौती

विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि फसल तैयार होने के समय गर्मी बढ़ जाए, तो कर्ड का गठन सही से नहीं हो पाता. इससे फूल का रंग, आकार और कसावट सभी प्रभावित होते हैं. इस वजह से मंडियों में ऐसी उपज की मांग कम हो जाती है और दाम गिर जाते हैं.

रोपाई का सही समय क्यों है जरूरी?

डॉ. प्रमोद कुमार के मुताबिक , अच्छी गुणवत्ता और बेहतर पैदावार के लिए रोपाई का समय सबसे खास भूमिका निभाता है. कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर अक्टूबर के 15 दिनों के अंदर तक रोपाई कर लेनी चाहिए. इस समय बोई गई फसल को फूल बनने के दौरान पर्याप्त ठंडक मिलती है, जिससे कर्ड बड़ा, सफेद और ठोस बनता है.

यदि किसान निर्धारित समय के बाद रोपाई करते हैं, तो फसल के विकास के दौरान तापमान बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे क्वालिटी में गिरावट आ सकती है.February ki garmi ne bigadi fulgobhi ki halat! Fazines se kisan hue pareshan , is tarh bachaye apni fasal

बाजार मूल्य पर सीधा असर

फूलगोभी की कीमत मुख्य रूप से उसके रंग, आकार और कसावट पर निर्भर करती है. आकर्षक और एक समान आकार के फूलों की मांग मंडियों में अधिक रहती है. समय पर रोपाई करने वाले किसानों को बेहतर क्वालिटी की उपज मिलती है, जिससे उन्हें अच्छा बाजार दाम प्राप्त होता है.

इसके विपरीत, फजीनेस से प्रभावित फूलों की बिक्री कम दाम पर करनी पड़ती है. इससे उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है.

कैसे करें सही प्रबंधन?

समय पर की गई योजना और सही तकनीक अपनाकर ‘फजीनेस’ जैसी समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. इससे न केवल उत्पादन बेहतर होगा, बल्कि किसानों को अपनी उपज का अधिकतम मूल्य भी मिल सकेगा.February ki garmi ne bigadi fulgobhi ki halat! Fazines se kisan hue pareshan , is tarh bachaye apni fasal

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