फरवरी की बढती गर्मी फूलगोभी की फसल को प्रभावित कर रही है . तापमान बढ़ने के कारण फसल में ‘फजीनेस’ की समस्या सामने आ रही है, जिससे फूल बिखर रहे हैं और बाजार में सही दाम नहीं मिल पा रहा. विशेषज्ञों के अनुसार , समय पर रोपाई और उचित फसल प्रबंधन से इस नुकसान से बचा जा सकता है.
भारत के कई इलाको में इन दिनों मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. कभी ठण्ड तो कभी अचानक से गर्मी का बढ़ना , इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर रबी फसलों पर पड़ रहा है. खासतौर पर फूलगोभी की खेती करने वाले किसानों को फरवरी में बढ़ते तापमान के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा हैं कि, खेतों में गोभी के फूल छोटे रह जा रहे हैं साथ ही उनका आकार भी बिखरा हुआ दिख रहा है. इस वजह से बाजार में उनकी कीमत भी कम हो रही है. और इससे किसानो को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है .February ki garmi ne bigadi fulgobhi ki halat! Fazines se kisan hue pareshan , is tarh bachaye apni fasal

‘फजीनेस’ क्या है और क्यों होती है समस्या?
डॉ. प्रमोद कुमार के मुताबिक , फूलगोभी का सही विकास तापमान और रोपाई के समय पर निर्भर करता है. जब तापमान अनुकूल सीमा से अधिक हो जाता है, तो गोभी का ‘कर्ड’ यानी फूल सही तरह से विकसित नहीं हो पाता. इसके दाने ढीले और बिखरे हुए दिखाई देते हैं. इस स्थिति को तकनीकी भाषा में ‘फजीनेस’ कहा जाता है. फजीनेस की समस्या आने पर फूल ठोस नहीं बनता और उसका वजन भी घट जाता है. इससे न केवल क्वालिटी में कमी आती है, किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. इससे किसानो को उत्पादन की लागत निकलना भी मुश्किल हो जाता है.
बढ़ता तापमान बना बड़ी चुनौती
फूलगोभी एक नाज़ुक फसल है, जिसे मध्यम ठंडा मौसम चाहिए. फरवरी में अचानक तापमान बढ़ने से फूल बनने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है. जिससे किसान देर से रोपाई करते हैं, और उनकी फसल पर इसका ज्यादा असर देखने को मिलता है.
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि फसल तैयार होने के समय गर्मी बढ़ जाए, तो कर्ड का गठन सही से नहीं हो पाता. इससे फूल का रंग, आकार और कसावट सभी प्रभावित होते हैं. इस वजह से मंडियों में ऐसी उपज की मांग कम हो जाती है और दाम गिर जाते हैं.
रोपाई का सही समय क्यों है जरूरी?
डॉ. प्रमोद कुमार के मुताबिक , अच्छी गुणवत्ता और बेहतर पैदावार के लिए रोपाई का समय सबसे खास भूमिका निभाता है. कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर अक्टूबर के 15 दिनों के अंदर तक रोपाई कर लेनी चाहिए. इस समय बोई गई फसल को फूल बनने के दौरान पर्याप्त ठंडक मिलती है, जिससे कर्ड बड़ा, सफेद और ठोस बनता है.
यदि किसान निर्धारित समय के बाद रोपाई करते हैं, तो फसल के विकास के दौरान तापमान बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे क्वालिटी में गिरावट आ सकती है.February ki garmi ne bigadi fulgobhi ki halat! Fazines se kisan hue pareshan , is tarh bachaye apni fasal
बाजार मूल्य पर सीधा असर
फूलगोभी की कीमत मुख्य रूप से उसके रंग, आकार और कसावट पर निर्भर करती है. आकर्षक और एक समान आकार के फूलों की मांग मंडियों में अधिक रहती है. समय पर रोपाई करने वाले किसानों को बेहतर क्वालिटी की उपज मिलती है, जिससे उन्हें अच्छा बाजार दाम प्राप्त होता है.
इसके विपरीत, फजीनेस से प्रभावित फूलों की बिक्री कम दाम पर करनी पड़ती है. इससे उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है.
कैसे करें सही प्रबंधन?
किसानों को खेती के वैज्ञानिक कैलेंडर का पालन करना चाहिए. समय पर रोपाई, संतुलित सिंचाई और तापमान के अनुसार फसल प्रबंधन बेहद जरूरी है. खेत की नियमित निगरानी और उचित पोषक तत्वों का उपयोग भी कर्ड के बेहतर विकास में सहायक होता है.
समय पर की गई योजना और सही तकनीक अपनाकर ‘फजीनेस’ जैसी समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है. इससे न केवल उत्पादन बेहतर होगा, बल्कि किसानों को अपनी उपज का अधिकतम मूल्य भी मिल सकेगा.February ki garmi ne bigadi fulgobhi ki halat! Fazines se kisan hue pareshan , is tarh bachaye apni fasal

