उत्तर भारत में खरबूजे की बुवाई का सबसे अच्छा समय फरवरी का मध्य माना जाता है. वहीं पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में नवंबर से जनवरी के बीच इसकी बुवाई की जाती है. खरबूजे की किस्म के अनुसार 3 से 4 मीटर चौड़ी क्यारियां तैयार करें. हर टीले पर दो बीज बोएं और टीलों के बीच लगभग 60 सेंटीमीटर की दूरी रखे
गर्मियों का मौसम आते ही वह फल जो अपनी खुशबु से लोगो को अपनी और आकर्षित करता है वह है खरबूजा. रसीला, मीठा और ठंडक देने वाला यह फल सिर्फ स्वाद ही नहीं, सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है. यही वजह है कि गर्मियों में इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है. अगर किसान भाई सही समय और वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें, तो कम समय में अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं.
खरबूजा मूल रूप से ईरान, अनातोलिया और आर्मेनिया क्षेत्र से आया हुआ माना जाता है, लेकिन आज यह भारत की प्रमुख फसलों में शामिल है. इसमें लगभग 90% तक पानी और करीब 9% कार्बोहाइड्रेट होता है. साथ ही यह विटामिन ए और विटामिन सी का अच्छा स्रोत है. भारत में पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है.february-march me kare kharbuje ki buvai, jaane behtar utpadan ke aasan tarike

मिट्टी का pH स्तर 6 से 7 के बीच होना चाहिए. ज्यादा लवणीय या खारी मिट्टी में यह फसल अच्छी नहीं होती. एक ही खेत में बार-बार खरबूजा लगाने से बचें. फसल चक्र अपनाना जरूरी है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और बीमारियों का खतरा भी कम हो.
बुवाई से पहले खेत की 2-3 बार गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लें. अंतिम जुताई के समय अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिला दें, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हो सके.
सही समय और बीज बोने की विधि
उत्तर भारत में खरबूजे की बुवाई का सबसे अच्छा समय फरवरी का मध्य माना जाता है. वहीं पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में नवंबर से जनवरी के बीच इसकी बुवाई की जाती है.
किस्म के अनुसार 3 से 4 मीटर चौड़ी क्यारियां तैयार करें. हर टीले पर दो बीज बोएं और टीलों के बीच लगभग 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें. इससे बेलों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और पौधों का विकास अच्छा होता है.
अगर किसान नर्सरी से पौध तैयार करना चाहते हैं, तो जनवरी के अंतिम सप्ताह या फरवरी के पहले सप्ताह में पॉलीथीन बैग में बीज बो सकते हैं. 25 से 30 दिन में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं. रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई जरूर करें.
खरपतवार नियंत्रण और देखभाल
खरबूजे की शुरुआती बढ़वार के समय खेत को खरपतवार से मुक्त रखना बहुत जरूरी है. अगर समय पर निराई-गुड़ाई न की जाए, तो खरपतवार लगभग 30% तक उपज कम कर सकते हैं. बुवाई के 15-20 दिन बाद पहली गुड़ाई करें. जरूरत के अनुसार दो से तीन बार निराई करनी पड़ सकती है.
साथ ही पौधों में कीट और रोग की निगरानी भी जरूरी है. बेलों पर पत्तियों का रंग बदलना या फल में दाग दिखाई देना रोग का संकेत हो सकता है. समय रहते कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपचार करें.february-march me kare kharbuje ki buvai, jaane behtar utpadan ke aasan tarike

सिंचाई का सही तरीका
गर्मी के मौसम में खरबूजे को नियमित सिंचाई की जरूरत नहीं होती है. सामान्यत: सप्ताह में एक बार पानी देना पर्याप्त रहता है. लेकिन खेत में पानी भरने से बचना चाहिए. अधिक नमी से फल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है.
फूल आने और फल लगने के समय बेलों को ज्यादा गीला न करें. भारी मिट्टी में बार-बार सिंचाई करने से बचें. बेहतर मिठास और स्वाद के लिए कटाई से 3 से 6 दिन पहले सिंचाई बंद कर देना या कम कर देना लाभदायक होता है.february-march me kare kharbuje ki buvai, jaane behtar utpadan ke aasan tarike
पैदावार और कमाई की संभावना
सही देखभाल करने और वैज्ञानिक तरीको को अपनाने से खरबूजे की फसल 70 से 90 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है. प्रति एकड़ अच्छी पैदावार मिलने पर किसान गर्मियों के सीजन में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. बाजार में मांग अधिक होने से इसकी बिक्री भी आसान रहती है.
अगर किसान मौसम, मिट्टी और सिंचाई प्रबंधन का ध्यान रखें, तो खरबूजे की खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल साबित हो सकती है. गर्मियों में इसकी मांग और मिठास दोनों ही किसानों की कमाई बढ़ाने में मदद करती हैं.
