Gujarat Rainfall Deficit: गुजरात में इस साल मानसून की कमजोर शुरुआत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में अब तक सामान्य से 82 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिसके चलते खरीफ फसलों की बुवाई की रफ्तार काफी धीमी पड़ गई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत तक केवल 12.71 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो सकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 62 फीसदी कम है। Gujarat Rainfall Deficit
बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर मूंगफली, सोयाबीन, कपास, बाजरा और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई पर देखने को मिल रहा है। पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण कई किसानों ने फिलहाल बुवाई रोक दी है और अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो बुवाई का रकबा और फसल उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं, जिससे किसानों की लागत और आय पर भी असर पड़ने की आशंका है। Gujarat Rainfall Deficit
हालांकि, मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में राज्य के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां तेज होने और अच्छी बारिश की संभावना जताई है। किसान भी अब जल्द बारिश होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि खेतों में बुवाई का काम तेजी से शुरू हो सके और खरीफ सीजन को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। Gujarat Rainfall Deficit
Gujarat Rainfall Deficit
गुजरात में मानसून की सुस्त चाल ने खरीफ सीजन की शुरुआत को प्रभावित कर दिया है। राज्य में सामान्य से 82 फीसदी कम बारिश दर्ज होने के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है, जिससे बड़ी संख्या में किसान खरीफ फसलों की बुवाई रोककर अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कमजोर मानसून का असर कृषि गतिविधियों पर साफ दिखाई दे रहा है और बुवाई की रफ्तार पिछले साल की तुलना में काफी धीमी पड़ गई है। Gujarat Rainfall Deficit
कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून के अंत तक गुजरात में केवल 12.71 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो सकी है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 33.90 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार अब तक की बुवाई में करीब 62 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति किसानों के साथ-साथ कृषि विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।
राज्य का सामान्य खरीफ बुवाई क्षेत्र करीब 85 लाख हेक्टेयर माना जाता है, लेकिन अब तक केवल 15 फीसदी रकबे में ही बुवाई पूरी हो सकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में व्यापक और अच्छी बारिश नहीं होती है, तो बुवाई का समय और प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों के उत्पादन, किसानों की आय और कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। Gujarat Rainfall Deficit

बारिश की कमी का सबसे अधिक असर तिलहन और नकदी फसलों पर देखने को मिल रहा है। मूंगफली, सोयाबीन और कपास जैसी प्रमुख फसलों का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक केवल 4.29 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन फसलों की बुवाई हुई है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग पांच गुना कम है। कई जिलों में किसानों ने पहली हल्की बारिश के बाद खेत तैयार तो कर लिए हैं, लेकिन पर्याप्त और लगातार वर्षा नहीं होने के कारण बुवाई शुरू नहीं की है। Gujarat Rainfall Deficit
हालांकि, मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में गुजरात के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां तेज होने और अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि पूर्वानुमान के अनुसार पर्याप्त वर्षा होती है, तो खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है। फिलहाल राज्य के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं।
मूंगफली, सोयाबीन और कपास की बुवाई में बड़ी गिरावट
गुजरात में कमजोर मानसून का सबसे अधिक असर राज्य की प्रमुख खरीफ फसलों पर देखने को मिल रहा है। कृषि विभाग के अनुसार, अब तक मूंगफली की बुवाई केवल 4.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो सकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 73 फीसदी कम है। राज्य में मूंगफली प्रमुख तिलहन फसल मानी जाती है, इसलिए इसकी धीमी बुवाई किसानों और कृषि विशेषज्ञों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है। Gujarat Rainfall Deficit
वहीं, सोयाबीन की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस बार इसका रकबा 87 फीसदी घटकर केवल 15,406 हेक्टेयर रह गया है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान सोयाबीन की बुवाई टाल रहे हैं और मौसम अनुकूल होने का इंतजार कर रहे हैं। Gujarat Rainfall Deficit

कपास की खेती भी मानसून की बेरुखी से प्रभावित हुई है। जून के अंत तक किसानों ने केवल 6.83 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई की है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 51 फीसदी कम है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश को लेकर बनी अनिश्चितता और खेतों में पर्याप्त नमी की कमी के कारण किसान बड़े पैमाने पर बुवाई का जोखिम नहीं उठा रहे हैं। यदि जल्द अच्छी और लगातार बारिश होती है, तो आगामी दिनों में खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीद की जा रही है। Gujarat Rainfall Deficit
हजारों हेक्टेयर फसलें डूबीं, किसानों की बढ़ी मुश्किलें
दलहन फसलों की बुवाई में सबसे ज्यादा गिरावट
गुजरात में कमजोर मानसून का असर लगभग सभी खरीफ फसलों पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, अनाज फसलों की बुवाई में मामूली बढ़त दर्ज की गई है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक किसानों ने 38,874 हेक्टेयर क्षेत्र में अनाज फसलों की बुवाई की है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 7 फीसदी अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि कुछ इलाकों में सीमित बारिश का लाभ किसानों ने अनाज की फसलों के लिए उठाया है। Gujarat Rainfall Deficit
इसके विपरीत, दलहन फसलों की बुवाई में भारी गिरावट देखने को मिली है। इस वर्ष अब तक केवल 5,479 हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन फसलों की बुवाई हो सकी है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग पांच गुना कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने और मानसून की अनिश्चितता के कारण किसान दलहन की बुवाई फिलहाल टाल रहे हैं।
दक्षिण गुजरात में राहत, सौराष्ट्र में सबसे ज्यादा संकट
राज्य में मानसून की स्थिति एक समान नहीं है। दक्षिण गुजरात के सूरत और तापी जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे वहां किसानों को कुछ राहत मिली है और बुवाई गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, राज्य के अधिकांश जिलों में अब भी सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है, जिससे खेतों की तैयारी और खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित बनी हुई है।
सबसे गंभीर स्थिति सौराष्ट्र क्षेत्र में देखने को मिल रही है। यहां देवभूमि द्वारका जिले में अब तक 100 फीसदी वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जबकि क्षेत्र के नौ अन्य जिलों में भी 90 फीसदी से अधिक बारिश की कमी बनी हुई है। लगातार सूखे जैसे हालात के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पा रही है। ऐसे में किसान बुवाई शुरू करने के बजाय अच्छी और लगातार बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द व्यापक वर्षा नहीं हुई, तो खरीफ सीजन और फसल उत्पादन दोनों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
