Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha: उत्तर प्रदेश के अमरोहा की हितेश चौधरी ने कृषि, प्राकृतिक उत्पादों और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़कर सफलता की एक नई मिसाल कायम की है। Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha आज इसलिए खास है क्योंकि उनके नेतृत्व में तैयार किए जा रहे कृषि उत्पाद अब स्थानीय बाजार से निकलकर देश के बड़े बाजारों और विदेशों तक पहुंच रहे हैं।
हितेश चौधरी प्रखंड बायो एनर्जी किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से किसानों और ग्रामीण महिलाओं को कृषि आधारित व्यवसाय से जोड़ रही हैं। कंपनी का ब्रांड नाम ‘किसान वेदा’ है। इसके तहत प्राकृतिक शहद, मिलेट्स कुकीज, अचार, मोरिंगा पाउडर और कई अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
छोटे स्तर से शुरू हुआ बड़ा सफर
हितेश चौधरी का सफर अचानक शुरू नहीं हुआ। उन्होंने वर्ष 2020 में एनआरएलएम के तहत महिला स्वयं सहायता समूह के साथ काम शुरू किया। शुरुआत में गन्ने की सिंगल बड चिप नर्सरी और गाय के गोबर से दीपक बनाने जैसे काम किए गए। इसके बाद 17 अप्रैल 2021 को उन्होंने निजी एफपीओ की स्थापना की। एफपीओ के जरिए किसानों को उत्पादन के साथ बाजार से जोड़ने पर ध्यान दिया गया। धीरे-धीरे इस पहल का विस्तार हुआ और बड़ी संख्या में किसान तथा ग्रामीण महिलाएं इससे जुड़ती चली गईं।
आज करीब 3,000 किसान और 1,000 ग्रामीण महिलाएं इस पहल से जुड़ी बताई जाती हैं। यही वजह है कि Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha केवल एक महिला उद्यमी की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर कृषि आधारित व्यवसाय के विस्तार की कहानी भी बन गई है।
विदेशी बाजार में किसान वेदा के उत्पादों की मांग
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की ओर से लगाए गए ट्रेड शो में किसान वेदा के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। यहां घरेलू खरीदारों के साथ विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी उत्पादों में रुचि दिखाई। इटली, ओमान, जापान और नीदरलैंड के खरीदारों ने प्राकृतिक शहद और मिलेट्स से तैयार उत्पादों की खरीद में दिलचस्पी दिखाई। विदेशी बाजार से मिली प्रतिक्रिया ने एफपीओ के उत्पादों के लिए नए अवसर खोले हैं। यह उपलब्धि Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि स्थानीय किसानों के उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच रहे हैं। Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha
नीदरलैंड और जापान से शहद की मांग
किसान वेदा के प्राकृतिक शहद को ट्रेड शो में विशेष प्रतिक्रिया मिली। ओमान, जापान और नीदरलैंड के प्रतिनिधिमंडलों ने शहद की खरीद को लेकर आधिकारिक समझौते किए हैं। नीदरलैंड के खरीदारों ने भविष्य में टन के हिसाब से शहद की बल्क सप्लाई की मांग रखी है। शुरुआत में करीब 1,000 से 1,500 बोतलों के पहले बैच की सप्लाई पर सहमति बनी है। यदि आगे बड़े स्तर पर बल्क ऑर्डर मिलते हैं तो इससे एफपीओ से जुड़े मधुमक्खी पालकों और किसानों के लिए बाजार का दायरा और बढ़ सकता है।
इटली में मिलेट्स कुकीज की मांग
शहद के साथ-साथ मिलेट्स से तैयार उत्पादों को भी विदेशी बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इटली के खरीदारों ने ज्वार और रागी से तैयार कुकीज में रुचि दिखाई। इन कुकीज के लिए करीब ₹1,600 से ₹2,000 प्रति किलो की दर पर समझौता हुआ है। मिलेट्स को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलकर बाजार में उतारने से किसानों को केवल कच्ची उपज बेचने के बजाय प्रसंस्कृत उत्पादों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। किसान वेदा के उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले ऐसे ऑर्डर Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha को और महत्वपूर्ण बनाते हैं।
कमल ककड़ी और आंवले के अचार की भी मांग
किसान वेदा केवल शहद और कुकीज तक सीमित नहीं है। कंपनी द्वारा तैयार किए जाने वाले पारंपरिक उत्पादों में कमल ककड़ी का अचार, करौंदे, आंवला और लहसुन का अचार भी शामिल हैं। ट्रेड शो में इन उत्पादों को भी खरीदारों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि और ग्रामीण उत्पादों को प्रोसेस करके पैक्ड फूड के रूप में बाजार में उतारना एफपीओ के कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे किसानों की उपज के लिए नए बाजार तैयार करने और ग्रामीण महिलाओं को प्रसंस्करण तथा पैकेजिंग जैसे कामों से जोड़ने में मदद मिलती है।
मोरिंगा पाउडर से लेकर लेमनग्रास उत्पाद तक
किसान वेदा के उत्पादों में मोरिंगा पाउडर, नीम शहद, मिलेट्स नमकीन और मल्टीग्रेन आटा भी शामिल हैं। इसके अलावा लेमनग्रास से चाय, तेल, हैंड सैनिटाइजर और फिनाइल जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। उत्पादों को मूल्यवर्धित रूप देने से ग्रामीण क्षेत्र में छोटे स्तर के प्रसंस्करण व्यवसायों के लिए भी अवसर बनते हैं। Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha
120 हेक्टेयर में ताइवान पिंक अमरूद की खेती
हितेश चौधरी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्र में फसल विविधीकरण पर भी काम किया है। उनके अनुसार, कोलकाता से टिश्यू कल्चर पौधे मंगवाकर करीब 120 हेक्टेयर क्षेत्र में एडवांस ताइवान पिंक अमरूद की खेती कराई गई है।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को केवल गन्ने पर निर्भर रहने के बजाय दूसरी फसलों और बागवानी से भी जोड़ना है। अमरूद की खेती के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय के विकल्प तैयार करने पर जोर दिया गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना क्षेत्र में इस तरह के फसल विविधीकरण को Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha के एक अहम हिस्से के रूप में देखा जा सकता है। Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha
गन्ने के साथ मल्टी क्रॉपिंग का मॉडल
किसानों की आय के अलग-अलग स्रोत तैयार करने के लिए एफपीओ मल्टी क्रॉपिंग मॉडल को बढ़ावा दे रहा है। गन्ने के साथ अमरूद, मोरिंगा, गेहूं और मिलेट्स जैसे रागी और ज्वार की खेती की जा रही है। इस मॉडल का उद्देश्य खेती में विविधता लाना और किसानों को अलग-अलग कृषि उत्पादों के बाजार से जोड़ना है। एक ही फसल पर निर्भरता कम होने से किसानों के पास आय के कई विकल्प हो सकते हैं। Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha
किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास
एफपीओ खुद किसानों की उपज का खरीदार बनकर उसे आगे बाजार तक पहुंचाने का प्रयास करता है। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए केवल स्थानीय बिचौलियों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है। हितेश चौधरी के अनुसार, उदाहरण के तौर पर यदि रागी का बाजार भाव ₹60 प्रति किलो है, तो एफपीओ किसानों से करीब ₹63 प्रति किलो की दर पर खरीद करता है। इस तरह एफपीओ और किसान के बीच सीधा कारोबारी संबंध बनाने की कोशिश की जाती है। Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha
₹50 लाख तक पहुंचा वार्षिक कारोबार
हितेश चौधरी की पहल ने धीरे-धीरे कारोबार का रूप लिया और एफपीओ का वार्षिक टर्नओवर करीब ₹50 लाख तक पहुंच गया। उनके अनुसार, व्यक्तिगत आय करीब ₹10 से ₹11 लाख तक है। अब इस वित्तीय वर्ष में ₹1 करोड़ का टर्नओवर पार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नए उत्पादों, बेहतर बाजार और विदेशी खरीदारों के साथ कारोबार बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। यह आर्थिक विस्तार Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha को कृषि उद्यमिता के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार से भी जोड़ता है।
ये भी देखे: महाराष्ट्र में पोल्ट्री कारोबार पर सूखे का असर, मक्का महंगा होने से बढ़ी लागत
प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण
हितेश चौधरी किसानों और ग्रामीण महिलाओं को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण गतिविधियों में भी काम करती रही हैं। कृषि विभाग, नमामि गंगे और परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत बनाए गए क्लस्टरों के माध्यम से किसानों और सखियों को प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। प्राकृतिक खेती के साथ-साथ कृषि उपज के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बिक्री पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए खेती के अलावा मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के क्षेत्र में रोजगार के अवसर तैयार हो रहे हैं।
अब मोरिंगा लड्डू और बर्फी होगी लॉन्च
विदेशी बाजार से मिले ऑर्डर और ट्रेड शो में मिली प्रतिक्रिया के बाद किसान वेदा नए उत्पाद लॉन्च करने की तैयारी में है। इनमें मोरिंगा के लड्डू और मोरिंगा की बर्फी शामिल हैं। इसके अलावा कस्तूरी, काली और सुगंधा हल्दी से जुड़े उत्पादों के साथ विशेष हल्दी अचार भी तैयार करने की योजना है। इन उत्पादों को बाजार की मांग के अनुसार पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ पेश किया जाएगा। Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha
अमरोहा से विदेशों तक पहुंची सफलता की कहानी
Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha यह बताती है कि किसानों की उपज को एफपीओ, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित कारोबार को आगे बढ़ाया जा सकता है। अमरोहा से शुरू हुआ यह प्रयास अब इटली, ओमान, जापान और नीदरलैंड जैसे देशों के खरीदारों तक पहुंच चुका है।
करीब 3,000 किसानों और 1,000 ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी के साथ किसान वेदा स्थानीय कृषि उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले समय में नए उत्पादों और अंतरराष्ट्रीय बाजार से बढ़ती मांग के साथ इस एफपीओ के कारोबार का दायरा और बढ़ने की संभावना है। Hitesh Chaudhary Success Story in Amroha ग्रामीण उद्यमिता, महिला भागीदारी और कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन से जुड़ी एक उल्लेखनीय कहानी के रूप में सामने आई है।

1 Comment