EL Nino 2026: 81% संभावना, साल के अंत तक बेहद ताकतवर हो सकता है अल नीनो, खेती पर बढ़ा बड़ा खतरा

EL Nino 2026: 81% संभावना, साल के अंत तक बेहद ताकतवर हो सकता है अल नीनो, खेती पर बढ़ा बड़ा खतरा

EL Nino 2026 को लेकर अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA की नई रिपोर्ट ने दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर में विकसित हो रही जलवायु परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और वर्ष 2026 के अंत तक अल नीनो के बेहद शक्तिशाली रूप लेने की 81 प्रतिशत संभावना जताई गई है।

यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो इसका असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि, जल संसाधन, खाद्य उत्पादन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

NOAA की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

अमेरिका की नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (CPC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक EL Nino 2026 लगातार मजबूत होता जा रहा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच इसके बहुत अधिक शक्तिशाली बनने की 81 प्रतिशत संभावना है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि यदि वर्तमान समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियां बनी रहती हैं तो इसका प्रभाव 2027 की शुरुआती वसंत ऋतु तक जारी रह सकता है। इससे दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम सामान्य पैटर्न से काफी अलग देखने को मिल सकता है।

साल 2026 के अंत तक और मजबूत होगा EL Nino 2026

वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में प्रशांत महासागर का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे EL Nino 2026 को अतिरिक्त ऊर्जा मिल रही है। समुद्र के भीतर गर्म पानी की मात्रा सामान्य से अधिक दर्ज की जा रही है और यह स्थिति आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो यह पिछले कई दशकों के सबसे प्रभावशाली अल नीनो घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है।

समुद्र के बढ़ते तापमान से क्यों बढ़ रही है चिंता?

प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह का तापमान लगातार सामान्य से अधिक बना हुआ है। इसके साथ ही समुद्र के भीतर गर्म पानी की एक मजबूत केल्विन वेव (Kelvin Wave) पूर्व दिशा की ओर बढ़ रही है।यही गर्म पानी EL Nino 2026 को लगातार मजबूती प्रदान कर रहा है। समुद्र और वातावरण के बीच बढ़ता यह ऊर्जा संतुलन वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

हवाओं में बदलाव भी दे रहे हैं बड़े संकेत

वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली सामान्य व्यापारिक हवाएं कमजोर पड़ रही हैं। इसके कारण बादलों और वर्षा के वितरण में भी बदलाव दिखाई दे रहा है।इंडोनेशिया और आसपास के क्षेत्रों में सामान्य से कम बादल बन रहे हैं, जबकि मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में बादलों की गतिविधि बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञ इन संकेतों को EL Nino 2026 के लगातार मजबूत होने का स्पष्ट संकेत मान रहे हैं।

भारत के मानसून पर कितना पड़ेगा असर?

भारत की कृषि काफी हद तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर करती है। ऐसे में EL Nino 2026 का प्रभाव भारतीय मानसून की चाल को प्रभावित कर सकता है।यदि मानसून कमजोर रहता है तो कई राज्यों में वर्षा सामान्य से कम हो सकती है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होगी। वहीं कुछ क्षेत्रों में असामान्य वर्षा और बाढ़ जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।

खेती पर क्यों मंडरा रहा है बड़ा खतरा?

EL Nino 2026 का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। वर्षा का असंतुलित वितरण किसानों के लिए कई तरह की चुनौतियां खड़ी कर सकता है।कम बारिश की स्थिति में धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलें प्रभावित हो सकती हैं। सिंचाई के लिए जल उपलब्धता घटने से उत्पादन लागत बढ़ सकती है। दूसरी ओर, जिन क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश होगी वहां जलभराव, फसल रोग और उत्पादन में गिरावट की संभावना भी बढ़ जाएगी।

किसानों को अभी से क्या तैयारी करनी चाहिए?

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को मौसम आधारित कृषि प्रबंधन अपनाना चाहिए। वर्षा की अनिश्चितता को देखते हुए जल संरक्षण, सूखा सहनशील किस्मों का चयन और संतुलित सिंचाई व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी होगा।

इसके अलावा कृषि वैज्ञानिकों और भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी मौसम पूर्वानुमान पर नियमित नजर रखना भी किसानों के लिए लाभदायक रहेगा, ताकि बदलती परिस्थितियों के अनुसार समय रहते फैसले लिए जा सकें।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ेगा असर

यदि EL Nino 2026 अनुमान के अनुसार बेहद शक्तिशाली बनता है तो इसका प्रभाव केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा। कई देशों में खाद्यान्न उत्पादन घट सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना रहेगी।

जल संसाधनों पर असर, ऊर्जा उत्पादन में बदलाव और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसी कारण दुनिया भर की मौसम एजेंसियां लगातार इस जलवायु प्रणाली की निगरानी कर रही हैं।

वैज्ञानिकों का क्या कहना है?

NOAA के वैज्ञानिक मॉडल बताते हैं कि समुद्र और वातावरण के बीच बन रही मौजूदा परिस्थितियां लगातार अल नीनो को मजबूत कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके 2027 की शुरुआत तक सक्रिय बने रहने की संभावना भी काफी अधिक है।

हालांकि मौसम वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में समुद्री परिस्थितियों में बदलाव होने पर पूर्वानुमानों में संशोधन संभव है। इसलिए नियमित अपडेट पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

administrator
Kheti Junction Administration Team is dedicated to providing reliable Agri News, tractor updates, agri machinery information, farming technologies, government schemes, market trends, crop cultivation knowledge, and agribusiness opportunities. The team works to connect farmers with the latest agricultural developments, modern equipment, and practical insights to support productivity, profitability, and sustainable growth across India.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *