Animal Health Tips: मानसून का मौसम किसानों और पशुपालकों के लिए राहत लेकर आता है, लेकिन इसी दौरान दुधारू पशुओं में कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने पशुपालकों को गलघोंटू रोग (Hemorrhagic Septicemia) को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
विभाग के अनुसार बारिश के मौसम में यह बीमारी तेजी से फैल सकती है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर पशु की मौत तक हो सकती है। ऐसे में Animal Health Tips को अपनाना हर पशुपालक के लिए बेहद जरूरी हो जाता है।
मानसून में क्यों बढ़ जाता है गलघोंटू रोग का खतरा?
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी और गर्मी अधिक होने के कारण गलघोंटू रोग फैलाने वाले जीवाणु तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। यही वजह है कि गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशु इस संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। संक्रमित पशु के संपर्क, दूषित पानी और गंदे वातावरण से बीमारी तेजी से फैल सकती है। पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते Animal Health Tips अपनाकर इस बीमारी से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
गलघोंटू रोग के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
गलघोंटू रोग की शुरुआत अचानक तेज बुखार से होती है। इसके बाद पशु को सांस लेने में परेशानी होने लगती है और गर्दन व जबड़े के आसपास सूजन दिखाई देती है। संक्रमित पशु चारा कम खाने लगता है, सुस्त हो जाता है और उसका दूध उत्पादन तेजी से घटने लगता है। कई मामलों में पशु पूरी तरह दूध देना भी बंद कर देता है। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो Animal Health Tips के अनुसार बिना देरी किए पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके।
समय पर टीकाकरण सबसे प्रभावी बचाव
बिहार सरकार के पशुपालन विभाग ने मानसून शुरू होने से पहले सभी दुधारू पशुओं का गलघोंटू रोग के खिलाफ टीकाकरण कराने की सलाह दी है। विभाग कई जिलों में विशेष टीकाकरण अभियान भी चला रहा है ताकि अधिक से अधिक पशुपालकों तक यह सुविधा पहुंच सके। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर लगाया गया टीका पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और संक्रमण का खतरा काफी कम कर देता है। बेहतर पशुधन प्रबंधन के लिए Animal Health Tips में नियमित टीकाकरण को सबसे महत्वपूर्ण उपाय माना गया है।
81% संभावना, साल के अंत तक बेहद ताकतवर हो सकता है अल नीनो, खेती पर बढ़ा बड़ा खतरा
साफ-सफाई से संक्रमण को रोका जा सकता है
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को सलाह दी है कि पशुओं के रहने की जगह हमेशा साफ, सूखी और हवादार रखें। गंदगी और लगातार बनी रहने वाली नमी संक्रमण फैलने का सबसे बड़ा कारण बनती है। यदि कोई पशु बीमार हो जाए तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर देना चाहिए ताकि संक्रमण अन्य पशुओं तक न पहुंचे। इसके साथ ही साफ पानी, संतुलित आहार और नियमित देखभाल पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। Animal Health Tips के अनुसार अच्छी स्वच्छता कई गंभीर पशु रोगों से बचाव का आसान तरीका है।
पशुपालक किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
मानसून के दौरान पशुओं की नियमित निगरानी करना जरूरी है। यदि किसी पशु को तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ, गर्दन में सूजन या दूध उत्पादन में अचानक कमी दिखाई दे तो तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लें। पशुओं को साफ पानी उपलब्ध कराएं, पोषक आहार दें और पशुशाला में जलभराव नहीं होने दें। विशेषज्ञों का मानना है कि Animal Health Tips को नियमित रूप से अपनाने से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और डेयरी व्यवसाय में होने वाले आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकता है।
बिहार सरकार ने पशुपालकों से की यह अपील
बिहार सरकार के पशुपालन विभाग ने सभी पशुपालकों से अपील की है कि मानसून के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही न करें। समय पर टीकाकरण कराएं, पशुशाला की साफ-सफाई बनाए रखें, संक्रमित पशुओं को अलग रखें और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। विभाग का कहना है कि Animal Health Tips का पालन करके गलघोंटू रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और दुधारू पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है।
