Paddy Cultivation: ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में हुई भारी बारिश के बाद किसानों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। बेलपहाड़ ब्लॉक के कडुपाड़ा गांव में बारिश के पानी के साथ बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश (औद्योगिक राख) खेतों तक पहुंच गई। कई खेतों में राख की मोटी परत जमने से खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो गई हैं। ऐसे समय में जब किसान Paddy Cultivation के लिए खेत तैयार कर रहे थे, इस घटना ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
खरीफ सीजन की तैयारी पर पड़ा असर
स्थानीय किसानों के अनुसार, पास में डंप की गई फ्लाई ऐश तेज बारिश के दौरान बहकर सीधे कृषि भूमि में पहुंच गई। कुछ खेतों में राख की परत इतनी अधिक है कि जुताई और रोपाई जैसे सामान्य कृषि कार्य भी मुश्किल हो गए हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द सफाई नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। विशेष रूप से Paddy Cultivation करने वाले किसानों को सबसे अधिक नुकसान होने की आशंका है।
किसानों ने लगाए नियमों के उल्लंघन के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से परिवहन कंपनियां और ठेकेदार कृषि भूमि, तालाबों, नदियों तथा प्राकृतिक जल निकासी वाले क्षेत्रों के पास बिना निर्धारित नियमों का पालन किए फ्लाई ऐश डाल रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण हर मानसून में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं और इसका सीधा असर खेती पर पड़ता है। किसानों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो Paddy Cultivation सहित अन्य खरीफ फसलें लगातार जोखिम में रहेंगी।
मिट्टी की उर्वरता पर क्यों बढ़ी चिंता?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित तरीके से खेतों में जमा फ्लाई ऐश मिट्टी के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इससे मिट्टी में मौजूद जैविक गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं, जलधारण क्षमता प्रभावित हो सकती है और पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलने में बाधा आ सकती है। यही कारण है कि किसान केवल वर्तमान फसल ही नहीं बल्कि भविष्य की Paddy Cultivation को लेकर भी चिंतित हैं। यदि लंबे समय तक राख खेतों में बनी रहती है तो मिट्टी की उत्पादकता पर इसका असर दिखाई दे सकता है।
किसानों ने पहले ही दी थी चेतावनी
स्थानीय किसान कुंजबिहारी ने बताया कि जिस स्थान पर फ्लाई ऐश डंप की गई थी, उसके बारे में किसानों ने पहले ही चेतावनी दी थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि बारिश होने पर राख खेतों तक पहुंच जाएगी और फसलों को नुकसान होगा। किसानों का आरोप है कि चेतावनी के बावजूद डंपिंग जारी रही, जिसका परिणाम अब पूरे गांव के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस लापरवाही से Paddy Cultivation की तैयारियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
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फ्लाई ऐश डंपिंग को बताया गैरकानूनी
ग्रामीणों का कहना है कि कृषि भूमि के आसपास इस प्रकार फ्लाई ऐश डालना पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने मांग की है कि जमीन मालिक, फ्लाई ऐश पहुंचाने वाले परिवहनकर्ता और संबंधित उद्योगों की जिम्मेदारी तय की जाए। किसानों का कहना है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं और Paddy Cultivation करने वाले किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ेगा।
प्रशासन ने जांच का दिया आश्वासन
झारसुगुड़ा के कलेक्टर चव्हाण कुनाल मोतीराम ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसानों के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया जाएगा और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
समय पर समाधान नहीं हुआ तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खेतों से फ्लाई ऐश को जल्द नहीं हटाया गया तो धान की रोपाई में देरी के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। इससे किसानों की लागत बढ़ने और उत्पादन घटने की संभावना है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी परीक्षण, वैज्ञानिक सलाह और समय पर सुधारात्मक उपाय अपनाना जरूरी होगा ताकि Paddy Cultivation पर दीर्घकालिक प्रभाव को कम किया जा सके।
