भारत में इस साल EL Nino Alert को लेकर कई राज्यों में कृषि विभाग सतर्क है। संभावित कम बारिश को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। सरकार 15 जुलाई से तीन चरणों वाली कंटीजेंसी योजना लागू करेगी, जिसके तहत कम वर्षा की स्थिति में धान की खेती सीमित करने और किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस रणनीति का उद्देश्य किसानों की आय और फसल उत्पादन को सुरक्षित रखना है।
EL Nino Alert के चलते लागू होगी तीन चरणों वाली कंटीजेंसी योजना
संभावित EL Nino Alert के प्रभाव को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने जिलेवार कंटीजेंसी प्लान तैयार किया है। यह योजना 15 जुलाई, 30 जुलाई और 15 अगस्त तक होने वाली बारिश की स्थिति के आधार पर लागू होगी। कृषि वैज्ञानिकों, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और जिला प्रशासन के साथ चर्चा के बाद यह रणनीति तैयार की गई है ताकि कम बारिश की स्थिति में किसानों को समय रहते उचित सलाह और विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें।
सरकार का मानना है कि समय पर निर्णय लेने से खेती में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
50 लाख एकड़ में धान की जगह होगी वैकल्पिक फसलों की खेती
अगर EL Nino Alert के कारण मानसून सामान्य से कमजोर रहता है, तो सरकार लगभग 50 लाख एकड़ भूमि पर धान की जगह कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा देगी।
पिछले खरीफ सीजन में तेलंगाना में करीब 1.4 करोड़ एकड़ क्षेत्र में खेती हुई थी, जिसमें लगभग 70 लाख एकड़ में धान लगाया गया था। इस बार अब तक लगभग 60 लाख एकड़ में बुवाई हो चुकी है, लेकिन बारिश की कमी जारी रहने पर धान का रकबा घटकर 30 से 40 लाख एकड़ तक सीमित रह सकता है।
ऐसी स्थिति में किसानों को मूंग, उड़द, अरहर, मूंगफली, बाजरा और ज्वार जैसी फसलें अपनाने की सलाह दी जाएगी, जिनमें पानी की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है।
33 जिलों में बारिश की स्थिति पर लगातार निगरानी
EL Nino Alert को देखते हुए राज्य सरकार सभी 33 जिलों में बारिश की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। 10 जुलाई तक 13 जिलों में सामान्य वर्षा दर्ज की गई, जबकि 20 जिलों में औसत से कम बारिश हुई है।
जहां वर्षा कम है, वहां जिला कलेक्टर, कृषि अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक संयुक्त रूप से हालात की समीक्षा कर रहे हैं। आवश्यकता के अनुसार किसानों को वैकल्पिक खेती और मौसम आधारित सलाह दी जा रही है।
कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विभाग के साथ होगी उच्च स्तरीय समीक्षा
कृषि मंत्री थुम्मला नागेश्वर राव कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों, भारतीय मौसम विभाग (IMD), ICRISAT, IIOR और CRIDA के वैज्ञानिकों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में EL Nino Alert की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करते हुए कंटीजेंसी योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सरकार ने डायनेमिक डिस्ट्रिक्ट स्पेसिफिक रिस्पॉन्स (DSR) रणनीति अपनाई है, जिसके तहत रियल-टाइम वर्षा निगरानी, भूजल स्तर का आकलन, जलवायु जोखिम विश्लेषण, फसल विविधीकरण और मिट्टी में नमी बनाए रखने जैसे उपाय शामिल किए गए हैं।
धान की बुवाई कब करें, किसानों को क्या सलाह दी गई
EL Nino Alert के बीच कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे लगातार दो से तीन दिनों में कम से कम 50 मिमी बारिश होने के बाद ही धान की बुवाई शुरू करें।
यदि बारिश में देरी होती है तो किसान धान के बजाय कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली फसलों का चयन करें। इनमें प्रमुख रूप से मूंगफली, मूंग, उड़द, अरहर, बाजरा और ज्वार शामिल हैं। इससे कम वर्षा की स्थिति में भी उत्पादन और आय पर अधिक असर नहीं पड़ेगा।
बीज, खाद और कृषि इनपुट की पर्याप्त व्यवस्था
सरकार ने स्पष्ट किया है कि EL Nino Alert के बावजूद किसानों को बीज, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री की कमी नहीं होने दी जाएगी।
बारिश की अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही जिलों और मंडलों में बीज, खाद तथा अन्य कृषि इनपुट का पर्याप्त भंडारण किया गया है। साथ ही रायथु वेदिका, व्हाट्सएप ग्रुप और कृषि विभाग के फील्ड स्टाफ के माध्यम से किसानों तक मौसम आधारित तकनीकी सलाह लगातार पहुंचाई जा रही है।
किसानों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख
इस बार मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों के लिए मौसम आधारित खेती की योजना अपनाना बेहद जरूरी होगा। EL Nino Alert के दौरान जल्दबाजी में धान की बुवाई करने के बजाय पर्याप्त बारिश का इंतजार करना अधिक सुरक्षित रहेगा। जिन क्षेत्रों में वर्षा कम रहने की संभावना है, वहां कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों का चयन नुकसान कम करने के साथ बेहतर उत्पादन देने में मदद कर सकता है।
