Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops : भारत के वैज्ञानिकों ने कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी Indian Council of Agricultural Research के केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला AI आधारित जीन एडिटर विकसित किया है। इस नई तकनीक की सहायता से भविष्य में ऐसी फसलें तैयार की जा सकेंगी जो अधिक उत्पादन देंगी, कम पानी में भी अच्छी पैदावार करेंगी और मौसम की मार को बेहतर तरीके से सहन कर पाएंगी। विशेषज्ञ इसे खेती के भविष्य को बदलने वाली तकनीक मान रहे हैं।
AI आधारित जीन एडिटिंग तकनीक क्या है
जीन एडिटिंग ऐसी आधुनिक तकनीक है जिसके माध्यम से वैज्ञानिक किसी पौधे के DNA में बेहद सटीक बदलाव कर सकते हैं। इससे फसलों में नई खूबियां जोड़ी जा सकती हैं। उदाहरण के तौर पर किसी फसल को रोग प्रतिरोधी, सूखा सहन करने वाली या अधिक उत्पादन देने वाली बनाया जा सकता है।

अब तक दुनिया में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश जीन एडिटिंग तकनीकें बैक्टीरिया से प्राप्त प्रोटीन पर आधारित थीं, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने पहली बार AI की सहायता से नया जीन एडिटर तैयार किया है। यही वजह है कि इसे कृषि क्षेत्र में भविष्य बदलने वाली तकनीक माना जा रहा है।Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
डॉ. कुतुबुद्दीन अली मोल्ला की टीम ने किया बड़ा कमाल
इस महत्वपूर्ण शोध का नेतृत्व Dr. Kutubuddin Ali Molla ने किया। उनकी टीम ने यह साबित किया कि AI की मदद से तैयार किए गए एंजाइम पौधों के DNA में सफलतापूर्वक बदलाव कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने इस तकनीक का परीक्षण धान की फसल पर किया और शानदार परिणाम हासिल किए। इससे उम्मीद बढ़ी है कि भविष्य में गेहूं, मक्का, दलहन और दूसरी फसलों में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा।Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
“Plant-OpenCRISPR1” क्या है
भारतीय वैज्ञानिकों ने इस AI आधारित प्लेटफॉर्म का नाम “Plant-OpenCRISPR1” रखा है। यह तकनीक फसलों के DNA में बेहद सटीक बदलाव करने में सक्षम है। इसकी सहायता से खराब जीन हटाए जा सकते हैं, आवश्यक जीन को मजबूत बनाया जा सकता है और नई विशेषताएं जोड़ी जा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
किसानों को कैसे मिलेगा लाभ
अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो इसका सबसे अधिक लाभ किसानों को मिलेगा। AI आधारित जीन एडिटिंग की मदद से ऐसी फसलें विकसित की जा सकती हैं जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दें, रोगों और कीटों से कम प्रभावित हों और मौसम की मार को बेहतर तरीके से झेल सकें। इससे किसानों की लागत घट सकती है और उत्पादन बढ़ने से उनकी आय में भी सुधार हो सकता है।Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
जलवायु परिवर्तन के दौर में क्यों आवश्यक है यह तकनीक
पिछले कुछ वर्षों में मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। कहीं सूखा तो कहीं अत्यधिक बारिश खेती के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे में वैज्ञानिक ऐसी फसलें विकसित करना चाहते हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दें। AI आधारित यह तकनीक जलवायु परिवर्तन से प्रभावित खेती के लिए भविष्य में काफी उपयोगी साबित हो सकती है।Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
खाद्य सुरक्षा के लिए अहम कदम
भारत जैसे बड़े देश में बढ़ती आबादी के बीच खाद्य सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। आने वाले समय में ज्यादा उत्पादन देने वाली और मजबूत फसलों की जरूरत और बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित यह नई तकनीक देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। इससे कम संसाधनों में भी ज्यादा उत्पादन संभव हो सकेगा।Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
विदेशी पेटेंट पर निर्भरता हो सकती है कम
डॉ. मोल्ला के अनुसार वर्तमान में इस्तेमाल हो रही कई जीन एडिटिंग तकनीकों पर विदेशी कंपनियों के पेटेंट हैं, जिससे उनका उपयोग महंगा हो जाता है। लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों की यह नई तकनीक इन समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकती है। सबसे विशेष बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म रिसर्च और व्यावसायिक उपयोग दोनों के लिए खुला रहेगा। इससे कृषि अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
AI बदल रहा है कृषि विज्ञान का भविष्य
यह शोध इस बात का बड़ा उदाहरण है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल मोबाइल और कंप्यूटर तक सीमित नहीं है। कृषि, चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भी AI तेजी से अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। वैज्ञानिकों ने विशाल प्रोटीन डेटा का अध्ययन करके ऐसे नए एंजाइम तैयार किए हैं जो पौधों के DNA में प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI आधारित तकनीकें खेती में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
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इन वैज्ञानिकों का रहा महत्वपूर्ण योगदान
इस शोध में डॉ. कुतुबुद्दीन अली मोल्ला के साथ कई वैज्ञानिकों ने योगदान दिया। टीम में प्रिया दास, रोमियो साहा, देबास्मिता पांडा, चंदना घोष, एस पी अविनाश, सोनाली पांडा और मिर्जा जे बैग शामिल रहे। ये सभी वैज्ञानिक केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, कटक से जुड़े हैं। उनकी इस उपलब्धि को भारत के कृषि अनुसंधान क्षेत्र के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
दुनिया में बढ़ी भारत की पहचान
भारतीय वैज्ञानिकों की इस खोज ने दुनिया में भारत की नई पहचान बनाई है। अब भारत केवल कृषि प्रधान देश ही नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि तकनीक विकसित करने वाले देशों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तकनीक का सही तरीके से उपयोग किया गया तो भविष्य में भारत कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश बन सकता है। यह उपलब्धि किसानों, वैज्ञानिकों और पूरे कृषि क्षेत्र के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। Indian Scientists Develops World First AI Gene Editor For Crops
