Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story: हिमाचल प्रदेश में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ ऐसी फसलों और कृषि गतिविधियों को अपना रहे हैं, जिनसे कम जगह में बेहतर आमदनी हासिल की जा सके। मशरूम उत्पादन भी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। बिलासपुर जिले के किसान जगदीश वर्मा ने करीब 17 साल की मेहनत से मशरूम उत्पादन को अपनी आय का मजबूत जरिया बनाया है। उनकी कहानी Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story के रूप में दूसरे किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
जगदीश वर्मा बटन मशरूम के साथ शिटाके मशरूम का भी उत्पादन करते हैं। उन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने उत्पादन को बढ़ाया। सरकारी योजनाओं से मिली सहायता और अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने मशरूम उत्पादन को व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाया। Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story
17 साल से मशरूम उत्पादन कर रहे हैं जगदीश वर्मा
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के झंडूता उपमंडल के पराहु गांव के किसान जगदीश वर्मा करीब वर्ष 2009 से मशरूम उत्पादन से जुड़े हैं। उन्होंने शुरुआत बटन मशरूम से की थी। शुरुआती अनुभव हासिल करने के बाद वर्ष 2017 से उन्होंने बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू किया। समय के साथ जगदीश वर्मा ने बटन मशरूम के अलावा शिटाके मशरूम का उत्पादन भी शुरू किया। अलग-अलग प्रजातियों की खेती करके उन्होंने अपनी आय के स्रोत को बढ़ाया। आज उनका अनुभव करीब 17 वर्षों का हो चुका है।
बटन मशरूम के साथ शिटाके की खेती
जगदीश वर्मा का कहना है कि मशरूम की अलग-अलग प्रजातियों में बाजार के हिसाब से अच्छी संभावनाएं हैं। बटन मशरूम की मांग सामान्य बाजार में रहती है, जबकि शिटाके मशरूम को अपेक्षाकृत बेहतर कीमत मिल सकती है। उनके मुताबिक बटन मशरूम का भाव करीब 150 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है। Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story
वहीं शिटाके मशरूम की कीमत 800 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि उन्होंने शिटाके मशरूम को भी अपने उत्पादन का हिस्सा बनाया। Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story यह बताती है कि किसान एक ही तरह के उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय बाजार की मांग के अनुसार अलग-अलग मशरूम प्रजातियों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story
सरकारी योजनाओं से मिली 28 लाख रुपये की सहायता
मशरूम उत्पादन को बढ़ाने में जगदीश वर्मा को सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिला। बागवानी विभाग के अनुसार, वर्ष 2017-18 में उन्हें एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत करीब 8 लाख रुपये की सहायता दी गई। इसके बाद वर्ष 2021-22 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी RKVY के तहत उन्हें करीब 20 लाख रुपये की मदद मिली। इस तरह उन्हें अलग-अलग सरकारी योजनाओं के माध्यम से करीब 28 लाख रुपये की सहायता प्राप्त हुई। सरकारी सहायता ने उन्हें मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी सुविधाओं को विकसित करने और उत्पादन का स्तर बढ़ाने में मदद की।
बेहतर काम के लिए मिले कई पुरस्कार
मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए जगदीश वर्मा को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें जिला स्तरीय उत्कृष्ट किसान सम्मान, प्रगतिशील मशरूम उत्पादक पुरस्कार और कृषि अन्वेषक एवं किसान गोष्ठी पुरस्कार मिल चुके हैं। इन सम्मानों ने उनकी मेहनत और मशरूम उत्पादन के प्रति उनके समर्पण को पहचान दिलाई है। Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story आज हिमाचल प्रदेश के प्रगतिशील किसानों की सफलता की मिसाल के तौर पर देखी जा सकती है।
एक कमरे में 1 हजार बैग में मशरूम उत्पादन
जगदीश वर्मा वर्तमान में एक कमरे में करीब 1,000 बैग में मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के लिए कई अन्य कमरे भी तैयार किए हैं। मशरूम उत्पादन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए बहुत ज्यादा जमीन की आवश्यकता नहीं होती। सही तापमान, नमी, स्वच्छता और तकनीकी जानकारी के साथ सीमित जगह में भी मशरूम उत्पादन शुरू किया जा सकता है। इसी कारण किसान और युवा इसे स्वरोजगार के विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story
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कम जगह में शुरू किया जा सकता है मशरूम उत्पादन
पारंपरिक खेती के मुकाबले मशरूम उत्पादन के लिए खेत की बड़ी जमीन की जरूरत नहीं होती। किसान अपने घर या उपलब्ध कमरे में भी उचित व्यवस्था बनाकर इसका उत्पादन शुरू कर सकते हैं। हालांकि, उत्पादन शुरू करने से पहले मशरूम की प्रजाति, स्थानीय जलवायु, उत्पादन तकनीक, लागत और बाजार की मांग की जानकारी हासिल करना जरूरी है। प्रशिक्षण लेकर शुरुआत करने से उत्पादन में होने वाली गलतियों को कम किया जा सकता है। Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story
हिमाचल के किसानों के लिए बन रही प्रेरणा
जगदीश वर्मा ने करीब 17 साल तक लगातार मेहनत करके मशरूम उत्पादन में अपनी पहचान बनाई है। बटन मशरूम से शुरुआत करके शिटाके मशरूम तक पहुंचना उनकी मेहनत और सीखने की क्षमता को दर्शाता है। उनकी सफलता यह दिखाती है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ नए कृषि व्यवसाय को अपनाकर अपनी आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार कर सकते हैं। सरकारी योजनाओं का सही लाभ, बाजार की जानकारी और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल इस तरह के व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है। Jagdish Verma Mushroom Farming Success Story उन किसानों और युवाओं के लिए खास तौर पर प्रेरणादायक है, जो कम जगह में खेती से अच्छी आमदनी हासिल करने के विकल्प तलाश रहे हैं।

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